एफएलओ ने की अनक्रिप्टेड : लाइफ, लेगेसी एंड रीइन्वेंशन विषयक चर्चा

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नीना गुप्ता तथा मसाबा गुप्ता ने बेबाकी के साथ साझा किए अनुभव

हैदराबाद, फिक्की लेडीज ऑर्गनाइजेशन हैदराबाद चैप्टर द्वारा आज आईटीसी कोहिनूर में अनक्रिप्टेड : लाइफ, लेगेसी एंड रीइन्वेंशन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस विशेष सत्र में प्रसिद्ध अभिनेत्री नीना गुप्ता तथा डिजाइनर-उद्यमी मसाबा गुप्ता ने बेबाक तथा आत्मीयता के साथ चर्चा करते हुए विशिष्ट पहचान बनाने तथा सफलता हासिल करने जैसे विषयों पर अपने विचार साझा किए।

एफएलओ हैदराबाद की चेयरपर्सन सीता रेड्डी के साथ चर्चा करते हुए नीना गुप्ता ने अपने चिर-परिचित अंदाज में जीवन का मंत्र दिया। उन्होंने कहा कि काम मांगने में कभी संकोच या शर्म नहीं करनी चाहिए, क्योंकि कर्म ही पूजा है, लेकिन पैसे मांगने में शर्म होनी चाहिए। उन्होंने युवाओं और महिलाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि यदि आप शिक्षित हैं और कड़ी मेहनत करने के लिए तैयार हैं, तो जीवन में कभी असफल नहीं होंगे। उन्होंने इस बात पर भी बल दिया कि कोई भी काम छोटा नहीं होता है।

नीना गुप्ता ने आर्थिक स्वतंत्रता पर साझा किए विचार

व्यस्तता ही इंसान को मानसिक अवसाद से दूर रखने का सबसे प्रभावी जरिया है। संवाद के दौरान नीना गुप्ता ने उम्र की बाधाओं को तोड़ते हुए बताया कि उन्हें वास्तविक सफलता 60 वर्ष की आयु में फिल्म बधाई हो से मिली। उन्होंने व्यावहारिक सलाह देते हुए कहा कि महिलाओं को अपनी विशेषज्ञता और कौशल को दुनिया के सामने रखने में कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।आर्थिक स्वतंत्रता पर बात करते हुए उन्होंने स्वयं को एक एफडी पर्सन बताते हुए कहा कि जीवन में चाहे कैसी भी परिस्थिति रही हो, उनके पास कभी अवसाद में डूबे रहने की फुर्सत नहीं थी। उन्होंने कहा कि यदि मन में किसी चीज को पाने का सच्चा शौक हो, तो उसे हर हाल में हासिल किया जा सकता है।

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उद्यमी के रूप में `ना’ कहना सीखना सबसे जरूरी – मसाबा

मसाबा गुप्ता ने अवसर पर अपनी राह खुद बनाने के संघर्षों और अनुभवों सहित निर्णय लेने की क्षमता के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि खेल या अभिनय जैसे क्षेत्रों में सफल माता-पिता की संतान होने का दबाव हो सकता था, लेकिन फैशन की दुनिया में उन्होंने कभी इसे बोझ नहीं समझा, बल्कि इसे एक सकारात्मक प्रेरणा के रूप में लिया।

मसाबा ने उद्यमिता के चुनौतीपूर्ण पहलुओं पर कहा कि एक उद्यमी के रूप में ना कहना सीखना सबसे जरूरी है। मसाबा ने आगे कहा कि वे बाजार के चलन का पीछा करने के बजाय अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनती हैं। सफलता या असफलता कभी भी अंतिम नहीं होती है, बल्कि निरंतर आगे बढ़ते रहना ही जीवन का असली उद्देश्य है। मसाबा ने कहा कि जीवन में हमेशा वह नहीं मिलता, जिसके हम हकदार हैं, बल्कि वह मिलता है, जिसे हम नेगोशिएट कर पाते हैं।

सीता रेड्डी ने अपने स्वागत भाषण में एफएलओ हैदराबाद के 25वें गौरवशाली वर्ष के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि अनक्रिप्टेड केवल एक चर्चा नहीं है, बल्कि यह हर महिला को अपनी शक्ति को पहचानने का संदेश है। सीता रेड्डी ने महिला आरक्षण विधेयक के भविष्य के सकारात्मक प्रभावों भी का उल्लेख करते हुए उम्मीद जताई कि आने वाले समय में एफएलओ सदस्य भी सांसद और विधायक जैसे महत्वपूर्ण नेतृत्व भूमिकाओं में नजर आएंगी।

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