मिश्रीमलजी व रूपचंदजी के जन्म जयंती महोत्सव का भव्य आयोजन

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हैदराबाद, श्री मरुधर केसरी जैन गुरु सेवा समिति त्रयनगर के तत्वावधान में श्रमण संघीय भीष्म पितामह श्रमण सूर्य मरुधर केसरी श्री मिश्रीमलजी म.सा. की 135वीं जन्म जयंती एवं लोकमान्य संत शेरे राजस्थान वरिष्ठ प्रवर्तक श्री रूपचंदजी म.सा. की 99वीं जन्म जयंती उत्साहपूर्वक तप-त्याग-सामायिक के साथ मनायी गयी।

आज नगर के लोअर टैंकबंड स्थित भाग्यनगर गौशाला में आयोजित गुरुद्वय जन्मोत्सव में महाशतावधानी मुनिश्री अभिनंदन सागरजी म.सा. आदि ठाणा, प्रज्ञा ज्योति दक्षिण चंद्रिका श्री सुधाकवंरजी म.सा. आदि ठाणा, शासन दीपिका मधुर व्याख्यानी श्री राजमतीजी म.सा. राजुल आदि ठाणा, जैन दिवाकर ज्योति मेवाड़ चंद्रिका जयश्रीजी म.सा. आदि ठाणा, प्रवचन प्रभाविका डॉ. सुमंगलप्रभआजी म.सा. आदि ठाणा एवं शासन गौरव साध्वी श्री मगंलज्योतिजी म.सा. आदि ठाणा के सानिध्य में आयोजित कार्यक्रम में महाशतावधानी मुनिश्री अभिनंदन सागरजी म.सा. मंडल के पूज्य सुपात्रचंद्रजी म.सा. एवं नेमीचंदजी म.सा. ने अपने उद्बोधन में कहा कि महापुरुषों ने अपने जीवन में बहुत श्रेष्ठ कार्य किए, जिनके कारण उन्हें याद किया जाता है।

जन्मोत्सव से सभी को प्रेरणा मिली है। म.सा. ने कहा कि जीवन में गुरु का उपकार मत भूलो। महापुरुषों ने त्याग समर्पण साधना से श्रमण संघ की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका अदाकर जिनशासन की प्रभावना की। जिनशासन की प्रगति के साथ साथ समाज सेवा की। अस्पताल, विद्यालय की स्थापना कर उल्लेखनीय कार्य किया। महाशतावधानी पू. मुनिश्री अभिनंदन सागरजी म.सा. की प्रेरणा से स्कूल आरंभ किया गया है ताकि जैन समाज के बच्चे जैन स्कूल में पढ़ सकें। इसी प्रकार सिकंदराबाद में भी गुरुदेव के जन्मोत्सव पर स्कूल खोलने का भाव रखें।

गुरु भक्ति और मरुधर केसरी का प्रेरक जीवन

पूज्य श्री राजमतीजी म.सा. ने कहा कि महान पुरुषों का गुणगान करने से शुभ कर्मों की स्थिति बनती है। हम सभी को गुणगान करने का अवसर अनंत पुण्यवाणी से मिला है। अरिहंत भगवान, सिद्ध भगवान, आचार्य भगवान, उपाध्याय, गुरु चरणों के गुणगान से जीव कर्मों को खपाकर तीर्थंकर गोत्र बांध लेता है। इसका सदुपयोग करना चाहिए। महान पुरुषों की असीम कृपा से अवसर मिला है। जितना गुणगान करें, उतना लाभ होता है। जहां भी जाएं, गुरु के नाम को न छोड़ें। गुरु के नाम को अपनाये रखो। गुरु को अपनाने के बाद जीवन में कभी ठोकर नहीं खाते हैं।

अवसर पर जयश्रीजी म.सा. ने कहा कि आज से 135 वर्ष पूर्व मरुधर केसरी मिश्रीमलजी का जन्म हुआ। महापुरुष ने पाली मारवाड़ की भूमि पर जन्म लेकर मेहता कुल को पावन किया। केसरबाई और पिता शेषमल का सौभाग्य जगाया। जिनकी माताएं केसर बाई होती हैं, वे संतानें संसार में निराली हैं। जैन दिवाकर चौथमलजी म.सा. का नाम केसर बाई, मूर्ति पूजक राजेन्द्र सूरीश्वरजी की माता का नाम केसर बाई, मानव केसरी सौभाग्यमलजी की माता का नाम केसर बाई, मरुधर केसरी की माता का नाम भी केसर बाई।

मिश्रीमल के पांच वर्ष की उम्र में माता का साया सिर से गया तो बालक ने सोचा यही संसार में आना, जीना और संसार में मरना होता है। 17 वर्ष की उम्र में संयम के पथ पर अग्रसर होकर पूज्य बुद्धमलजी म.सा. के शिष्य बने। श्रावक से संत और मुनि और विकृति से संस्कृति की ओर ले जाने वाले महान संत बने। नर के रूप में आकर नारायण का रूप लिया। संतों का जीवन समाज और संघ की एकता के लिए समर्पित होता है।

मरुधर केसरी: एक अद्वितीय गुरु परंपरा का गौरव

मरुधर केसरी को 9 भाषाओं का ज्ञान था और 32 आगमों के दृष्टा रहे। 9 पदों से अलंकृत हुए। जिसके पुण्य अच्छे होते हैं उसे पद मिला करते हैं। कर्म अच्छे होते हैं उन्हें कुर्सियां मिला करती हैं। शेरे राजस्थान रूपमुनिजी म.सा ने 20 वर्ष की उम्र में संयम लिया। 76 वर्ष तक सयंम की पालना की। रूपमुनिजी म.सा जब तक जिंदा थे तब तक श्रमण संघ को आंच नहीं आई। श्रमण एक-दो संप्रदाय से नहीं बना बल्कि संघ 22 गुरुओं ने पदों का त्याग कर बनाया है। आज हमारी प्रवृत्ति ऐसी है जिधर दम उधर हम। गुरुओं ने हमें रास्ता बताया है। गुरु भगवंत ने धर्म सिखाया है।

पूज्य श्री सुधाकंवरजी म.सा के मंडल की विजयप्रभाजी म.सा. ने कहा कि यह संसार असार है अर्थात इस संसार में जिस व्यक्ति ने जन्म लिया है उसकी मृत्यु होगी लेकिन वही धन्य होते हैं, जो नाम अमर कर जाते हैं। जिस प्रकार एक दीपक से कई दीपक प्रकाशित होते हैं, उसी प्रकार एक महापुरुष से कई महापुरुष बन जाते हैं। डॉ. श्री सुमंगलप्रभाजी म.सा. ने कहा कि जिन महान गुरुओं को हम स्मरण कर रहे हैं उनके जीवन की ख्याति को जानेंगे।

जीवन में व्यक्तित्व की बात उपस्थित होती है। दीनों ही मसीहा थे। असहायों के सहायक थे। पूज्य श्री मंगलज्योतिजी म.सा. ने कहा कि महापुरुषों ने प्रभु वीर की वाणी को हमारे जन जन तक पहुँचाया। सिकंदराबाद में 80 प्रतिशत राजस्थानी हैं। कांटा प्रांत में मरुधर केसरी की परंपरा है। मरुधर केसरी का प्रिय पाली जिला का सेवास ग्राम था। जैन धर्म में साधना का साक्षात्कार होता है, चमत्कार नहीं होता। गुरुदेव जन्म से ही अद्भुत थे। महापुरुषों जब कुक्षी में आते हैं तो निराले होते हैं।

मरुधर केसरी की अहिंसा-प्रेरणा और गुरुवंदन

मिश्रीमलजी म.सा. ने जन जागरण कर कुप्रथाएं मिटाई। धर्म के नाम पर चल रही बलि प्रथाओं को मिटाया। डॉ. सुवृद्धिजी म.सा. ने गुरु वंदन का गीत प्रस्तुत किया। अवसर पर संबोधित करते हुए पूज्य विनयश्रीजी म.सा. ने कहा कि गुरुदेव का जन्मोत्सव मनाने आये हैं। दरबार में उनका गुणगान करें। भारत की भूमि में अनेक महान पुरुषों ने जन्म लिया लेकिन कुछ महान पुरुष ऐसे होते हैं, जिनका नाम इतिहास के पन्ने पर आता है।

ऐसे ही इतिहास के पन्नों पर उभर कर दो महान पुरुषों ने अहिंसा, दया, करुणा, अनुकंपा, धर्म की ज्योति जगाकर जिन शासन और भगवान महावीर के नाम को रोशन किया। नगर नगर, ग्राम ग्राम में जाकर अहिंसा धर्म अपनाने की प्रेरणा दी। कार्यक्रम में विशेष अतिथि मदनचंद लुणावत ने कहा कि मरुधर केसरी मिश्रीमलजी म.सा. देश के प्रसिद्ध संत थे। सदैव भावना रही कि समाज में एक ही रीति एक ही नीति रहे। इसी भावना से संगठन कायम रह सकता है। श्रमण संघ के प्राण थे।

इनका व्यक्तित्व जादुई था। एक बार दर्शन करने वाला गुरु चरणों का हो जाता था। आचार्य तुलसी ने कहा था कि मरुधर केसरी श्रद्धा के केन्द्र हैं। लोकमान्य संत पूज्य रूपचंदजी म.सा. का जीवन फूलों के गुलदस्ते के समान था। वाणी और चेहरे पर अपूर्व तेज था। उनके हृदय में श्रमण संघ की ज्योति प्रज्वलित रहती थी। हमेश साधना में लीन रहत थे। कार्यक्रम के विशेष अतिथि विनोद कुमार कीमती ने कहा कि शुभ अवसर हमें प्राप्त हुआ है।

श्रमण संघ और गुरुद्वय जन्मोत्सव की गौरवगाथा

हम दो महान संतों का जन्मोत्सव मानने के लिए एकत्रित हुए हैं। मरुधर केसरी मिश्रीलालजी म.सा. ने श्रमण संघ को एक करने में अहम भूमिका निभायी। राजस्थान में रहते हुए पाठशालाओं, छात्रावास का निर्माण करवाया। वे वचन सिद्ध थे। जो अपने संयम के बल से लोगों को प्रभावित करते थे। उन्होंने कभी भी राजस्थान नहीं छोड़ा पर उनकी प्रभावना से दक्षिण के हजारों लोग उनके श्रावक बने। शेरे राजस्थान पूज्य रूपमुनिजी का सानिध्य हमें सिकंदराबाद संघ में मिला था।

तब मेरे पिता जैनरत्न राजेन्द्र कुमार कीमती संयोजक थे और उनका वर्षावास बंजारा हिल्स के निवास पर हुआ। वे बहुत बड़ी शख्सियत थे। उनके प्रवचनों में छत्तीस कौम उपस्थित रहती थी। अवसर पर अध्यक्ष मीठालाल गांधी ने सभी का स्वागत करते हुए कहा कि जन्मोत्सव पर पधारे सभी गुरु भक्तों का आभार है। समिति सभी संघपति, अध्यक्ष, मंत्री गुरु भक्तों का स्वागत करती है। सभी के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करती है। कई वर्षों से समिति गुरुद्वय जन्मोत्सव भव्यता से आयोजित कर रही है।

गुरुदेव का नारा था एक ही रीति एक ही आवाज जगमग चमके जैन समाज। इसी का पालन करते हुए समिति कार्य कर रही है। समिति से सदस्य जुड़ें और इसे मजबूत बनायें। महामंत्री गौतमचन्द मुथा ने समिति की रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए कहा कि श्रमण संघ बनाने वाले महापुरुषों ने बहुत बड़ा त्याग किया। उसके बाद श्रमण संघ के साधु बैठ सके। यहां चतुर्विद साधु साध्वी पधारते हैं, मेल मिलाप से कार्यक्रम करते हैं। समिति वर्ष 2005 में आरंभ हुई। अब 20 साल पूर्ण हुए हैं।

मानव सेवा व गौशालाओं हेतु मिला आर्थिक सहयोग

समाज, मानव सेवा, जीव दया, विकलांग को कृत्रिम अंग, अन्नदान, गौशाला व बकराशाला में सहयोग दिया जाता है। कार्यक्रम से प्राप्त 3.70 लाख रुपये की राशि गौशालाओं एवं मानव सेवा के कार्यों में उपयोग की जाएगी। समिति के संयोजक काचीगुड़ा ग्रेटर हैदराबाद के कोषाध्यक्ष धर्मीचंद भंडारी ने अतिथियों, सभी संघों के पदाधिकारियों, गौतम प्रसादी के लाभार्थी मीठालाल गांधी परिवार, विशेष रूप से सिकंदराबाद संघ, काचीगुड़ा ग्रेटर हैदराबाद संघ, कोरा संघ, अमीरपेट संघ, श्रमणोपासक संघ, राजस्थानी मूर्तिपूजक संघ का स्वागत किया।

उन्होंने कहा कि मरुधरा के दोनों संतों का जन्मोत्सव हर साल मनाया जाता है। सौभाग्य है कि दोनों गुरुदेव के दर्शन वंदन व प्रवचन का लाभ मिला। कार्यक्रम का संचालन पवन कटारिया ने किया। अवसर पर धर्मराज रांका, स्वरूपचंद कोठारी, जैन सेवा संघ के अध्यक्ष योगेश सिंघी, महामंत्री अशोक मुथा, महावीर तातेड़, बसंत बाफणा, सुरेन्द्र कटारिया, किशोर मुथा, गौतमचंद डंक, सम्मानित अतिथि त्रयनगर के संघों के संघपति, अध्यक्ष, कार्याध्यक्ष एवं महामंत्री उपस्थित थे।

महोत्सव के विशेष सहयोगी मीठालाल रमेश मनसुख सज्जन मुकेश गांधी, गौतमचन्द प्रसन्नराज हेमंत विकास मुथा, भंवरलाल सुनिल कुमार पवन कुमार कटारिया, रणजीतमल नवरतनमल मुकेश जिनेन्द्र गुंदेचा, पुखराज धर्मीचंद प्रियेश कुमार भंडारी, मंगलचंद ज्ञानचंद कमलचंद प्रवीण पिंटू लोढा, केवलचंद मुकेश अंकेश राठौड, कांतिलाल धर्मेन्द्र कुमार अरविन्द नवनीत आनंद नाहर, शांतिलाल अशोक कुमार धर्मेन्द्र गुगलिया, पुखराज अनिल कुमार भंडारी, केवलचंद धर्मीचंद राजेन्द्र जितेन्द्र टपरावत, भंवरलाल अशोक प्रकाश अनिल डंक, धनराज किशनचंद टपरावत व जिवराज विमल अनिल सुनील चाणोदिया भी शामिल है।

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समारोह में समाज के गणमान्यजन रहे उपस्थित

कार्यक्रम में गौतमचंद पवन कुमार चाणोदिया, मदनलाल मनसुख नवरतन चंदन इशांत भलगट, चंदनमल विकास दिनेश मुकेश चाणोदिया, लादुराम गौतमचंद कमल सुरेश डंक, रामचन्द्र शांतिलाल बसंत रमेश भलगट, माणकचंद अशोक राहुल सिंघवी, उगमराज विजयराज पोकरणा, जुगराज सोहनलाल मोहनलाल गुगलिया, मांगीलाल शांतिलाल ललित गांधी, अशोक तरुण अनिल विमल चाणोदिया, जुगराज अखेराज निकेश दर्पण कोठारी, संपतराज गौतम उज्जवल मुणोत, प्रकाशचंद राजेश ऋषभ कांकरिया, नवरतनमल प्रदीप मुथा, भागचंद ज्ञानचंद कोचेटा व पूनमचंद संदीप कुमार कोचेटा भी शामिल है।

कार्यक्रम में सुरेश कुमार अभिषेक मुणोत, देवीचंद महावीरचंद रिषभ चाणोदिया, मंगलचंद संजय कटारिया, बिरदीचंद नरेन्द्र खुशांक मांडोत, बाबूलाल माणकचंद मोहित पोकरणा, जीवराज राजेश कुमार गुगलिया, महोत्सव सहयोगी संपतराज सुजीत अजित कोठारी, लालचंद केवलचंद विशाल पितलिया, दुलीचंद राजकुमार बोकाड़िया, नेमीचंद मीठालाल दिनेश डंक, मिश्रीमल गौतम नवरतन गुगलिया, शांतिलाल जवरीलाल गुगलिया, देवीचंद राजेश महेन्द्र आकाश डंक, जे. पारसमल संजय कटारिया, अमरचंद पवन महावीर बल्लावत, अमरचंद राजेश ऋषभ रितिक भंडारी, लादूराम अरिहंत गुगलिया, लादूराम निर्मल पदम कटारिया, प्रकाशचंद संजय भरत प्रफुल्ल बोहरा, भंवरलाल गौतमचंद बोहरा, चंपालाल अशोक यश चोपडा, नेमीचंद गौतम मोहित कटारिया, बंसीलाल अमित वैदमुथा, कूपचंद सुरेश सेहलोत बने।

गौमतप्रसादी में गांधी परिवार का हुआ सम्मान

कार्यक्रम में अतिथि एवं सहयोगी सहित गौमतप्रसादी के लाभार्थी सायरीबाई-मेघराज गांधी के दिव्य आशीष से मीठालाल रमेश कुमार, मनसुखलाल, सज्जनराज, मुकेश कुमार, नवीन कुमार आशीष, राहुल, पूजा, कौशिक, रियांशी, रुद्र एवं समस्त गांधी परिवार (मरुधर में बूसी) का सम्मान पदाधिकारियों ने किया।

कार्यक्रम में श्री मरुधर केसरी जैन गुरु सेवा समिति त्रयनगर हैदराबाद के मार्गदर्शक संपतराज कोठारी, भंवरलाल कटारिया, नवरतनमल गुन्देचा, गौतमचंद गुगलिया, सलाहकार संपतराज मुणोत, दुलीचंद बोकाड़िया, उगमराज पोकरणा, गौतमचन्द डंक, गौतमचंद चाणोदिया, शांतिलाल भलगट, मदनलाल भलगट, ज्ञानचंद लोढा, चेयरमैन कांतिलाल नाहर, अध्यक्ष मीठालाल गांधी, संयोजक धर्मीचंद भंडारी, महामंत्री गौतमचन्द मुथा, उपाध्यक्ष रणजीतमल गुन्देचा, मोहनलाल गुगलिया, जे. पारसमल कटारिया, चन्द्रप्रकाश लोढा, अशोक कुमार चाणोदिया, कोषाध्यक्ष बी. अशोक कुमार डंक, सहमंत्री पवन कटारिया, मुकेश राठौड़, सह-कोषाध्यक्ष गौतमचंद बोहरा, प्रसार प्रचार मंत्री राजेश गुगलिया व अन्य ने सहयोग प्रदान कर कार्यक्रम को भव्यता प्रदान की।

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