मनरेगा का नाम बदलने को लेकर भड़के हरीश राव
हैदराबाद, भारत राष्ट्र समिति (भारास) विधायक व पूर्व मंत्री टी. हरीश राव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा केंद्र सरकार की महात्मा गांधी नेशनल रूरल एम्प्लॉयमेंट गारंटी (नरेगा) योजना का नाम बदलकर दि विकसित भारत- गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) विकसित भारत- जी रामजी रखे जाने पर घोर आपत्ति जताई और कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का नाम हटाकर केंद्र ने जो नया विधेयक पारित किया है, वह केवल नाम बदलना ही नहीं, बल्कि देश की संघीय व्यवस्था पर प्रत्यक्ष हमला है।
पूर्व मंत्री टी. हरीश राव ने कांग्रेस की आलोचना करते हुए कहा कि बाहर फेडरल व्यवस्था व संविधान की दुहाई देते न थकने वाली कांग्रेस पार्टी संविधान के भीतर राज्यों को कमजोर करने वाली भाजपा सरकार के कदमों को आंतरिक रूप से समर्थन दे रही है। उन्होंने कहा कि गरीबों को काम देने वाली मनरेगा योजना में केंद्र की हिस्सेदारी 90 प्रतिशत और राज्य सरकार की हिस्सेदारी 10 प्रतिशत के बदले केंद्र की हिस्सेदारी 60 प्रतिशत व राज्य की हिस्सेदारी 40 प्रतिशत करके केंद्र सरकार ने विधेयक को हथियार के तौर पर उपयोग किया और राज्यों पर अतिरिक्त आर्थिक भार डालने का प्रयास किया है।
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हरीश राव ने कहा कि इतने महत्वपूर्ण विषय पर कांग्रेस का न बोलना विधेयक को आंतरिक रूप से समर्थन ही है। उन्होंने कहा कि अधिकारों के विकेंद्रीयकरण विषय में दोनों राष्ट्रीय पार्टियां कांग्रेस और भाजपा एक ही सिक्के के दो पहलू हैं, यह स्पष्ट हो चुका है। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि योजना के मौलिक स्वरूप पर चोट न करते हुए महात्मा गांधी का नाम यथावत बनाए रखकर राज्यों के अधिकारों का सम्मान किया जाए। उन्होंने कहा कि राज्यों को आर्थिक समस्याओं में ढकेलने वाला विधेयक देश की प्रगति में गतिरोध पैदा करेगा।
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