कुलपाकजी में जैन मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव 22 अप्रैल से

हैदराबाद, श्री नवकार धाम चैरिटेबल ट्रस्ट के तत्वावधान में श्री कुलपाक तीर्थ के समीप श्री नवकार धाम जैन मंदिर कुलपाकजी का प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव चंद्रयशविजयजी म.सा., जिनभद्रविजयजी म.सा., तीर्थसुन्दरविजयजी म.सा. आदि ठाणा-3, अभिनंदनचंद्रसागरजी म.सा. आदि ठाणा-5 एवं अर्चिताश्रीजी म.सा. आदि ठाणा के सान्निध्य में आगामी 22 से 26 अप्रैल तक भव्यता से आयोजित किया जाएगा। महोत्सव हेतु रामकोट स्थित श्री जैन सेवा संघ में पत्रिका लेखन कार्यक्रम आयोजित किया गया।

चंद्रयशविजयजी म.सा., जिनचन्द्रविजयजी म.सा. एवं अभिनंदनचंद्रसागरजी म.सा. आदि ठाणा के सान्निध्य में प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव के पत्रिका लेखन कार्यक्रम में 51 लाभार्थी परिवारों को पत्रिका लेखन के लिए विराजित किया गया। म.सा. की आज्ञानुसार पत्रिका लेखन का कार्य किया गया। लाभार्थियों ने पत्रिका में दी गई चिट के हिसाब से पत्रिका में मंदिर के प्राण-प्रतिष्ठा के नाम का उल्लेख किया।

अभिनंदनचन्द्र सागरजी म.सा. ने आशीर्वाद प्रदान करते हुए कहा कि विश्व की एकमात्र प्रतिमा जिसकी प्रतिष्ठा स्वयं पुंडरिक स्वामी के हाथों से हुई, यह सौभाग्य कुलपाक तीर्थ को प्राप्त हुआ है। कुलपाक तीर्थ में पहला जिनालय माणिक्य स्वामी दादा, दूसरा जिनालय गुरु मंदिर राजेन्द्रसूरीश्वर म.सा., तीसरा जिनालय मुनिश्वर स्वामी दादा, चौथा जिनालय आने वाले समय में बनेगा। म.सा. ने कहा कि जन कल्याण, आत्मकल्याण के निमित्त ऐसे कार्य में जो लक्ष्मी का उपयोग करते हैं, वह महालक्ष्मी बनते हैं। पत्रिका लेकर प्रतिष्ठा में कोई न कोई लाभ लें। इसी प्रकार शिखरबंध जिनालय के साथ विद्यालय भी होना चाहिए। सौभाग्य मिले तो प्रयास करें।

हजारों वर्षों पुरानी जिनालयों की परंपरा

चन्द्रयशजी विजयजी म.सा. ने कहा कि जिनालय की श्रृंखला विश्व में प्रसिद्ध है। विश्व के लोग कुलपाकजी में दर्शन व भ्रमण कर भारतीय संस्कृति एवं जैन संस्कृति को कैमरे में कैद कर ले जाते हैं। भगवान के जिनालयों की परंपरा आज की नहीं हजारों वर्षों की है। काल खंड में अनके जिनालय बने और काल खंड में जिनालय भूमि में समा गये। लोग आते रहे जिनालय को स्थापित कर भगवान का शासन आगे बढ़ाया। अभी 18500 पंचम काल बाकी है।

जब तक तीर्थ मंदिर रहेंगे, तब तक हमें जिन धर्म का बोध मिलता रहेगा और 18500 वर्ष का जिन शासन अखंड रूप से चलता रहेगा। इसके मूल में मंदिर हैं। पहले मंदिर बनाएँ, उसके बाद अस्पताल व स्कूल भी बनाएँ। जिनालय का निर्माण करेंगे, तो इतिहास में नाम अमर रहेगा। कुलपाकजी सुन्दरतम इतिहास के पन्नों में अंकित है। दक्षिण का यह पावन तीर्थ हैदराबाद को मिला है। कुलपाकजी का तीर्थ राजेन्द्रसूरीश्वर का तीर्थ, सिद्धांचल निर्माण, तीसरा मुनिश्वर स्वामी जिनालय बना उसके बाद नवकार जैन तीर्थ में महावीर स्वामी विराजमान होंगे। इसी प्रकार हंस मंदिर भी बन रहा है। इस प्रकार क्षेत्र में पंच तीर्थ हो जाएँगे।

इस दौरान महोत्सव के आरंभ के जाजम के चढ़ावो बोले गए, जिसका लाभ सुकन्याबाई मोतीलाल योगेश खरगांधी परिवार ने लिया। चेयरमैन हर्ष कुमार मुणोत ने प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव की विस्तार से जानकारी देते हुए कहा कि कुलपाकजी जैन तीर्थ से तीन किलोमीटर पहले श्री नवकार धाम जैन मंदिर का निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है। अब प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव का कार्यक्रम होगा। इस जिनालय में श्री महावीर स्वामी आदि जिन बिम्बों की प्राण प्रतिष्ठा होगी, जिसमें गौतम स्वामी, राजेन्द्र सूरीश्वरजी, शांतिसूरीश्वरजी आदि बिम्बों के साथ माता पद्मावती, नाकोड़ा भैरव शामिल हैं।

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जैन रत्न उपाधि से सम्पतराज कोठारी सम्मानित

महोत्सव 22 अप्रैल से आरंभ होगा। 25 अप्रैल को भव्य वरघोड़ा नाश्ते के बाद निकाला जाएगा। इसके बाद महिला के साँचे मेहंदी का कार्यक्रम होगा। 26 अप्रैल को प्रतिष्ठा का कार्यक्रम होगा। नगर के विभिन्न क्षेत्रों से 25 व 26 अप्रैल को बसों की व्यवस्था की जाएगी, ताकि अधिक से अधिक संख्या में भक्त इसमें हिस्सा ले सकें। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष प्रशांत कोचेटा ने सभी का स्वागत कर लाभार्थी को स्थान पर विराजित कराया। साथ ही अतिथियों का स्वागत किया। अवसर पर जैन रत्न उपाधि से सम्मानित किए जाने पर सम्पतराज कोठारी का सम्मान किया गया।

कार्यक्रम में श्री जैन सेवा संघ के मंत्री विमल मुथा, जैनरत्न संपतराज कोठारी, सीए जसराज श्रीश्रीमाल, निर्मल कोठारी, मोतीलाल भलगट, सुरेश गुगलिया, विक्रम श्रीश्रीमाल, मदनलाल संचेती, धर्मेन्द्र नाहर, पवन कटारिया, श्री नवकार धाम चैरिटेबल ट्रस्ट के चेयरमैन हर्ष कुमार मुणोत जैन, वाइस चेयरमैन बाबूलाल कांकरिया, पारसमल जैन, मैनेजिंग ट्रस्टी शिवराज सोनी, कोषाध्यक्ष प्रशांत कोचेटा, प्रतिष्ठा महोत्सव समिति के अध्यक्ष अशोक बजावत, उपाध्यक्ष ताराचंद बडेर मुथा, मुकेश कुमार चौहान, पारसमल बाफना, प्रवीण नहाटा, प्रधान संयोजक योगेश खरगाधी, संयोजक विनोद लुणावत, सज्जनराज भंडारी, महेन्द्र मुणोत, संजय कोचेटा, अशोक रामपुरिया, नरेश कटारिया व धर्मेन्द्र समदरिया ने सहयोग प्रदान किया।

कार्यक्रम में प्रशांत श्रीश्रीमाल, योगेश झाबक, अरुण मुथा, नरेश श्रीश्रीमाल, विश्वेश भांगड़िया, धर्मेन्द्र मुणोत, सह-संयोजक अभय कोठारी, नवरतन मखाना, अमित गुगलिया, रवि गडवाणी, विपिन बांठिया, अजित बोहरा, जयंतीलाल सुराणा, भावेश बोहरा, संयोजिका ऊषा बरलोटा, कल्पना सुराणा, तृष्णा बम्बोली, मंदिर के भूमि दानदाता माणिकचंद संदीप कुमार कटारिया, राजेन्द्र कुमार आशीष कुमार मोदी, भंवरलाल जिनेन्द्रराज गोलेच्छा, घीसूलाल मुकेश कुमार कटारिया, माणिकचंद संतोष कुमार पोकरणा, शांतिलाल दिनेश कुमार गोलेच्छा, रतनलाल संजय कुमार पोकरणा, लालचंद गौतमचंद कोठारी, केवलचंद सुमित कुमार पोकरणा आदि ने सहयोग प्रदान किया।

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