जिंदगी में जोक्स जरूरी हैं…!!

डॉक्टर: चिंता मत करो, यह छोटी-सी सर्जरी है, घबराने की कोई बात नहीं!
मरीज़: लेकिन डॉक्टर, मैं तो ऑपरेशन के लिए नहीं आया था!
डॉक्टर: अरे हां, सॉरी! मुझे आदत हो गई है, ऐसा कहने की..!

हंसी से तनाव कम, मूड फ्रेश और सेहत बेहतर

यह जोक सरप्राइज़ एलिमेंट (अचानक ट्विस्ट) पर आधारित है, जो दिमाग को एक पल में चौंकाकर हंसा देता है। ऐसा होते ही अचानक पैदा हुआ तनाव गायब हो जाता है, जिससे मूड हल्का और फ्रेश महसूस होता है। यह क्षण हमें रोजमर्रा की उलझनों से निकालकर एक पल के लिए हल्केपन और आनंद की ओर ले जाता है। इसलिए सिर्फ कुछ सेकंड का एक जोक भी हमारी मानसिक थकान को दूर कर सकता है। कुछ सेकेंड्स का एक जोक या चुटकुला हमें पलभर में तरोताजा कर देता है, क्योंकि जोक्स का प्रभाव हमारे दिमाग और शरीर दोनों पर पड़ता है। जब हम हंसते हैं, तो हमारा मस्तिष्क एंडोर्फिन (खुशी के हार्मोन) छोड़ता है, जिससे तनाव कम होता है और हम रिलैक्स महसूस करते हैं। इसके अलावा हंसी से ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है, मांसपेशियों में आराम आता है और मूड फ्रेश हो जाता है। ओशो जोक्स को लेकर एक बहुत गंभीर बात कहा करते थे- अगर तुम्हारी जिंदगी में हंसने की वजहें कम हो रही हैं, तो इसका मतलब यह नहीं कि तुम्हें हंसी की ज़रूरत कम हो गई है, बल्कि इसका मतलब है कि जरूरत ज्यादा बढ़ गई है! शायद यही वजह है कि दुनिया में जोक्स और हास्य की परंपरा उतनी ही पुरानी है, जितना पुराना खुद इंसान है, इंसानी सभ्यता है। सबसे पुराने दर्ज जोक्स लगभग 4000 साल पुराने हैं।

हास्य का इतिहास: 4000 साल से चल रही है जोक्स की परंपरा

दुनिया के सबसे पुराने दर्ज जोक्स प्राचीन मेसोपोटामिया (1900 ईसा पूर्व) के हैं, जिनमें से एक आज भी मशहूर है। यह सुमेरियन सभ्यता (मौजूदा इराक क्षेत्र) से मिला है। यह जोक टॉयलेट ह्यूमर (शौचालय संबंधी मज़ाक) पर आधारित है पुरुष अपनी पत्नी से, एक ऐसी चीज़ बताओ, जो प्राचीन काल से आज तक कभी नहीं हुई। महिला अपने पति की गोद में बैठकऱ, किसी महिला ने कभी पाद नहीं मारा। मजाक या जोक के रूप में मिला यह संवाद बताता है कि 4000 साल पहले भी हास्य और शरीर से जुड़ी हल्की-फुल्की बातें लोगों को हंसाने का जरिया थीं। प्राचीन मिस्र (1600 ईसा पूर्व) की सभ्यता में फिरौन के दरबारों में भी जोक्स सुनाए जाते थे। एक मशहूर चुटकुला इस तरह है एक फिरौन अपनी नाव में यात्रा कर रहा था। एक भविष्यवक्ता ने कहा कि वह बहुत लंबी उम्र जिएगा। फिरौन ने कहा, क्या मैं सौ साल जिऊँगा? भविष्यवक्ता ने कहा, हाँ..। फिरौन ने फिर कहा, क्या मैं दो सौ साल जिऊँगा? भविष्यवक्ता ने कहा, बिल्कुल..! फिरौन खुश हुआ और कहा तो मैं अमर हूं! भविष्यवक्ता ने कहा, नहीं, लेकिन जब तक तुम मुझसे सवाल पूछते रहोगे, तब तक मैं हां कहता रहूंगा!

वास्तव में यह राजाओं की चापलूसी और भविष्यवाणियों का मज़ाक उड़ाने का तरीका था। ग्रीक दार्शनिक प्लेटो और अरस्तू ने भी हास्य को जीवन के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में देखा है। प्राचीन एथेंस में एक जोकर क्लब था, जिसके दर्जनों जोक्स आज भी मिलते हैं, मसलन- एक आदमी डॉक्टर के पास गया और कहा, डॉक्टर साहब! जब मैं आंखें खोलता हूं, तो मुझे कुछ नहीं दिखता! डॉक्टर ने कहा, तो आंखें बंद करके देखो! मिस्र और एथेंस की तरह प्राचीन भारत में भी संस्कृत साहित्य (नाट्यशास्त्र, पंचतंत्र, हितोपदेश, विदूषक पात्र) में हास्य-व्यंग्य का भरपूर प़ा मिलता है। पंचतंत्र की कहानियों में चतुराई भरे जोक्स और व्यंग्य हैं। भारतीय इतिहास में राजाओं के दरबारों में विद्वान विदूषकों जैसे- तेनालीराम और बीरबल की भी मौजूदगी रही है, जो अपने बुद्धि-कौशल से सिर्फ दरबार का माहौल ही बोझिल होने से नहीं बचाते थे, बल्कि हतप्रभ करने वाली चतुराई भरी बातें करके राजा सहित दरबारियों को हैरान कर देते थे, जिससे पूरा दरबार तरोताजा महसूस करता था।

जोक्स का सबसे तेज और वैराइटी से भरा विकास इसी दौर में

जोक्स या चुटकुलों का आधुनिक और व्यापक दौर 18वीं-19वीं शताब्दी में अखबारों और किताबों में जोक्स छपने से शुरू होता है तो बीसवीं शताब्दी के उत्तरार्ध तक रेडियो, टीवी के कॉमेडी शो और स्टैंड-अप कॉमेडी से जोक्स हर जगह और हर इंसान तक पहुंच गए। इस 21वीं शताब्दी में इंटरनेट, सोशल मीडिया और मीम्स के रूप में जोक्स का जलवा हम सब देखते हैं। वास्तव में जोक्स का सबसे तेज और वैराइटी से भरा विकास इसी दौर में हो रहा है। आज मुंबई और बैंग्लूरू जैसे शहरों में थियेटर्स की जगह स्टैंडअप कॉमेडी शो ने ले लिया है और अब भी जोक्स का तेज विकास जारी है। लब्बोलुआब यह है कि जोक्स हजारों सालों से मौजूद हैं और मानवीय अभिव्यक्ति की यह बुनियादी परंपरा हमेशा बनी। सभी सभ्यताओं में हमेशा से हास्य का महत्व रहा है, चाहे वह दरबारी मनोरंजन के रूप में रहा हो या आम जनता की हल्की-फुल्की हाजिर जवाबी के रूप में। इसलिए आज के मीम्स और स्टैंड-अप कॉमेडी उसी परंपरा की आधुनिक कड़ी हैं, जो 4000 साल पहले शुरू हुई थी! सवाल है, हर सभ्यता में, हर दौर में यानी जीवन में हमेशा जोक्स क्यों जरूरी हैं? क्या आज की आधुनिक तनाव भरी जीवनशैली में ये और ज्यादा महत्वपूर्ण हो गये हैं? जवाब है कि समाज को, व्यक्तिगत रूप से लोगों के लिए जोक्स पिछले किसी भी दौर से ज्यादा जरूरी हो गए हैं। क्योंकि जोक्स केवल हंसाने भर के लिए नहीं होते हैं, बल्कि ये मानसिक स्वास्थ्य, सामाजिक संबंध और भावनात्मक संतुलन बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ये हमारे तनाव को कम करते हैं, हमें हंसाते हैं और हंसने से शरीर में एंडोर्फिन (खुशी के हार्मोन) का स्तर बढ़ता है, जो तनाव और दर्द दोनों को गायब करने में मदद करता है।

चुटकुलों या जोक्स से मनोवैज्ञानिक सुरक्षा

चुटकुलों या जोक्स से इंसान को मनोवैज्ञानिक सुरक्षा मिलती है, क्योंकि कठिन परिस्थितियों में हास्य एक सुरक्षा तंत्र की तरह काम करता है, जिससे व्यक्ति समस्याओं को हल्के-फुल्के तरीके से देख पाता है। साथ ही जोक्स हमें सामाजिक रूप से लोगों के साथ जोड़ता है। जोक्स साझा करने से लोगों के बीच नज़दीकी बढ़ती है और यह सोशल बॉन्डिंग को मजबूत करता है। जोक्स से हमारी क्रिएटिविटी बढ़ती है। हमें चीजों को नए नजरिए से देखने और समस्याओं का हल अनोखे तरीके से निकालने में मदद करता है। एक महत्वपूर्ण सवाल यह भी है कि क्या आधुनिक तनावभरी जीवनशैली में जोक्स और ज्यादा महत्वपूर्ण हो गए हैं? इस सवाल का भी जवाब है हां, बिल्कुल! आज की आधुनिक जीवनशैली में लोग काम के दबाव, सोशल मीडिया की भागदौड़, आर्थिक चिंताओं और रिश्तों की उलझनों से घिरे रहते हैं। ऐसे में हास्य और जोक्स बेहद ज़रूरी हो गए हैं। आज वर्क प्लेस तनाव अपने चरम पर है। ऑफिस में मीटिंग्स, डेडलाइन्स और टारगेट्स के बीच अगर मज़ाक और हंसी का माहौल हो, तो कर्मचारियों की प्रोडक्टिविटी बढ़ती है। सोशल मीडिया पर लगातार अपडेट रहने की मजबूरी और ऑनलाइन विवादों के बीच मीम्स और फनी वीडियोज हमें मानसिक राहत देते हैं। साथ ही मानसिक रूप से स्वस्थ रहने का ये आसान जरिया हैं। हास्य से डिप्रेशन और एंग्जायटी कम होती है। इसीलिए मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ लाफ्टर थेरेपी को बहुत कारगर मानते हैं। आज के तनाव भरे जीवन में जोक्स और हास्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि एक स्वास्थ्य संबंधी ज़रूरत भी बन गए हैं।


अच्छा सेंस ऑफ ह्यूमर: बुद्धिमत्ता, आकर्षण और सफलता का संकेत

ऐसा देखा गया है कि सामान्य तौरपर, अच्छा सेंस ऑफ ह्यूमर किसी व्यक्ति की बुद्धिमत्ता (आईक्यू) और भावनात्मक समझ (ईक्यू) दोनों के बेहतर होने का सबूत होता है, क्योंकि जोक्स बनाने और सुनाने के लिए तेज़ दिमाग और सोचने की त्वरित क्षमता यानी क्विक विट की ज़रूरत होती है। यही नहीं मज़ेदार लोग आमतौर पर बेहतर कम्युनिकेशन स्किल्स और लोगों को बेहतर पढ़ने व समझने की क्षमता रखते हैं। ऐसे लोग चीजों को अलग-अलग दृष्टिकोण से देखने में सक्षम होते हैं, जिससे वे मुश्किल परिस्थितियों में आसानी से निपट लेते हैं। इसलिए, जोक्स और हास्य में रुचि रखने वाले लोग अक्सर अतिरिक्त
स्मार्ट होते हैं। लड़कियां भी ऐसे ही पुरुषों को ज्यादा पसंद करती हैं जिनका सेंस ऑफ ह्यूमर अच्छा होता है। यह निष्कर्ष वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित है। कई शोधों में पाया गया है कि महिलाएं मज़ाकिया और हंसाने वाले पुरुषों की तरफ अधिक आकर्षित होती हैं, क्योंकि सेंस ऑ़फ ह्यूमर इंटेलिजेंस का आधार होता है।

हास्यबुद्धि को तेज़ दिमाग का जरिया माना जाता है, जो एक अच्छे जीवन-साथी की पहचान होती है। ऐसे व्यक्ति के साथ रहने से तनाव कम होता है और ऐसे पुरुष से महिला को भावनात्मक सुरक्षा महसूस होती है। जो लोग मज़ाकिया होते हैं, वे आमतौर पर आत्मविश्वासी होते हैं और पुरुषों का आत्मविश्वास महिलाओं को हमेशा आकर्षित करता है। मज़ाकिया लोग अक्सर दूसरों के साथ घुल-मिल भी बहुत जल्दी जाते हैं, जिससे वे ज्यादा सामाजिक और करिश्माई दिखते हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि हंसोड़ होना इस बात का संकेत है कि वह मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ है, जिससे वह एक बेहतर साथी बन सकता है। इसीलिये महिलाएं ऐसे पुरुषों को ज्यादा पसंद करती हैं, जिनका सेंस ऑफ ह्यूमर अच्छा होता है, क्योंकि यह इंटेलिजेंस, आत्मविश्वास और सुरक्षा का संकेत देता है।

(लोकमित्र गौतम)

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