शहरी निकाय चुनावों के लिए तैयारियों में सक्रिय कविता
हैदराबाद, राज्य सरकार द्वारा शहरी स्थानीय निकायों के चुनावों की तैयारियों की घोषणा के साथ ही विभिन्न पार्टियाँ तैयारियों में सक्रिय हो गयी हैं। लगता है इस बार स्थानीय निकाय काफी दिलचस्प होने वाले हैं। एक और नयी पार्टी के रूप में पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव की पुत्री के. कविता की तेलंगाना जागृति भी मैदान में होगी। कविता ने अपने प्रभाव वाले क्षेत्रों में उम्मीदवारों का चयन भी शुरू कर दिया है।
सूत्रों के अनुसार, तेलंगाना जागृति की अध्यक्ष के. कविता द्वारा नगर निकाय चुनावों के लिए इच्छुक उम्मीदवारों के साथ बैठकें करने का सिलसिला जारी है। इससे आगामी नगरपालिका चुनावों को लेकर जागृति संगठन की सक्रिय तैयारियों के संकेत मिलते हैं। कविता ने अपने पूर्व बयानों को दोहराते हुए कहा कि जागृति के नेता स्थानीय निकाय चुनाव लड़ेंगे। इसके लिए विस्तृत रणनीतियों पर चर्चा की जा रही है। कविता ने अपने आवास पर संभावित उम्मीदवारों से मुलाकात कर चुनावी योजना, उम्मीदवार चयन और प्रचार की रणनीति की समीक्षा की।
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निजामाबाद से चुनाव लड़ने के संकेतों से बढ़ी सियासी चर्चा
पार्टी सूत्रों के अनुसार, जागृति निजामाबाद जिले में 20 से 30 नगरपालिका वार्डों में अपने उम्मीदवार उतार सकती है। सूत्रों ने यह भी संकेत दिया कि जागृति के उम्मीदवार लॉयन (शेर) चुनाव चिह्न पर चुनाव लड़ सकते हैं। आधिकारिक चुनाव अधिसूचना जारी होने से पहले कविता द्वारा उम्मीदवारों की जल्द घोषणा पर भी विचार किया जा रहा है। इसी संदर्भ में जागृति कार्यकर्ताओं ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लॉयन चिह्न का व्यापक प्रचार शुरू कर दिया है।
कविता के अपने गृह जिले निजामाबाद से चुनावी मैदान में उतरने के फैसले ने राजनीतिक हलकों में चर्चाओं को तेज कर दिया है। पूर्व में बीआरएस की सांसद और एमएलसी रह चुकीं कविता की वर्तमान राजनीतिक भूमिका को देखते हुए यह घटनाक्रम महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा औपचारिक अधिसूचना जारी होने और राजनीतिक दलों द्वारा अंतिम उम्मीदवार सूची घोषित किए जाने के बाद स्थिति स्पष्ट होगी, लेकिन निजामाबाद में होने वाले नगरपालिका चुनाव बहुकोणीय मुकाबले के संकेत दे रहे हैं। जहाँ सत्तारूढ़ कांग्रेस अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में है, वहीं भाजपा भी मजबूत संगठनात्मक मौजूदगी बनाए हुए है।
हालाँकि इस त्रिकोण के बीच बीआरएस की क्या स्थिति होगी, यह देखना काफी दिलचस्प होगा। इस पृष्ठभूमि में जागृति के प्रवेश ने स्थानीय राजनीतिक मुकाबले को नया आयाम दे दिया है।
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