सदुपयोग संस्था के 3 दिवसीय ‘गीव-अवे’ दान अभियान कार्यक्रम का शुभारंभ
हैदराबाद, स्वैच्छिक संगठन सदुपयोग एवं गूंज संस्था के संयुक्त तत्वावधान में शुक्रवार से 3 दिवसीय दान अभियान ‘गीव-अवे’ कार्यक्रम आयोजत किया गया।
यहाँ जारी संयुक्त प्रेस विज्ञप्ति में सदुपयोग के संयोजक हितेन संघोई ने बताया कि सदुपयोग स्वैच्छिक संगठन एवं गूंज संस्था के संयुक्त तत्वावधान में 3 दिवसीय दान अभियान कार्यक्रम काचीगुड़ा के वुडसाइड होटल के सामने स्थित सिंध बेकरी के पास प्रारंभ हुआ। हितेन संघोई ने कहा कि वर्ष 2017 में सदुपयोग संस्था का शुभारंभ हुआ, यह स्वैच्छिक संगठन है, जो मुख्यतः सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों के बच्चों की भलाई के लिए काम कर रहा है।
संस्था द्वारा पुरानी एवं नई किताबें, पेन-पेंसिल, टिफीन बॉक्स, वाटर बॉटल, कपड़े, जूते आदि विभिन्न सामग्री को संग्रहीत किया जाता है, जिसे बाद में विभिन्न जरूतमंद सरकारी स्कूल के बच्चों में वितरण किया जाता है। संयोजिका भावना पदम हरिया ने कहा कि ‘गीव-अवे’ अभियान में कपड़े, विशेषकर पुरुष परिधान, साड़ी, जूते, चप्पल, खिलौने, किताबें, स्टेशनरी, खाना बनाने के पात्रों, हाजेरी, कॉटन कपड़े या कोई अन्य घरेलु वस्तुएँ दान दें सकते हैं। दान देने के इच्छुक सुबह 10 से दोपहर 12 बजे तक एवं शाम 4 से 6 बजे तक काचीगुड़ा के पास स्थापित केन्द्र में जमा करा सकते हैं।
ज्योति गाला एवं अवनी छेड़ा ने कहा कि संस्था मुख्यतः 2 प्रोजक्ट्स पर कार्य कर रही है, जिसमें प्रोजक्ट ए में बच्चों को कला और शिल्प कला के माध्यम से बेहतर मोटर कौशल प्रदान करना, जिससे वे अपनी रचनात्मकता में सुधार कर सके। ये तनाव बस्टर के रूप में काम करता है, आत्मविश्वास, सुधार और संज्ञानात्मक कौशल, हाथ व मस्तिष्क समन्वय बनाता है। प्रोजक्ट-बी किसी भी महिला के जीवन में स्वच्छता महत्वपूर्ण पहलू है, लेकिन कई युवतियाँ व महिलाएँ युवावस्था की जटिलताओं में होने वाले परिवर्तन के बारे में अनजान हैं।
जरूरतमंदों की मदद के लिए सामाजिक संस्थाओं का आह्वान
इसके अलावा सैनिटरी पैड की उच्च लागत भी एक निवरक है। इसलिए सदुपयोग ने इसे एक कारण के रूप में लिया है। आगामी प्रोजेक्ट-बी के अतंर्गत स्वच्छता के बारे में युवा लड़कियों को शिक्षित करना, कम लागत वाले पैड बनाने के लिए प्रशिक्षण देना। पर्यावरणीय लाभों को ध्यान में रखते हुए विभिन्न अनाथालयों और सरकारी अनुदानित विद्यालयों पर पैड के निपटान हेतु मशीनों को स्थापित करना।
अवसर पर तोरल जागीरदार ने कहा कि सदुपयोग संस्था द्वारा किये जा रहे कार्य अत्यंत प्रशंनीय है। उन्हें यह जानकर प्रसन्नता हो रही है कि संस्था द्वारा विभिन्न प्रकार के सामाजिक कार्यक्रमों का आयोजन करती हैं, जिसमें जरूरतमंदों की सहायता करना मुख्य है। उन्होंने कहा कि अन्य संस्थाओं को भी आगे आकर इस प्रकार के कार्यों को बड़े पैमाने पर आयोजित करना चाहिये। रिद्धिश जागीरदार ने कहा कि जब हम त्यौहार के मौकों पर नये कपड़े खरीदते हैं, तो हमे उन निःसहाय एवं जरूरतमंदों लोगों का भी ध्यान रखना चाहिये, जो ऐसा नहीं कर सकते है।
स्वयंसेवकों की भागीदारी से सफल हुआ सेवा कार्यक्रम
जागीरदार फाउंडेशन द्वारा पिछले करीब 17 वर्षों से विभिन्न अवसरों पर शहर के स्कूलों में स्टेशनरी कीट, किताबों आदि का वितरण किया जाता है। कार्यक्रम में श्री कच्छी मित्र मंडल के कार्यकारीणी सदस्य रिद्धिश जागीरदार, प्राणीमित्र रमेश जागीरदार मेमोरियल फाउंडेशन के संस्थापक सहमंत्री तोरल लोडाया ने भाग लिया।
अवसर पर भावना-पदम हरिया, हिना-हितेन संगोई, ज्योति-हितेश गाला, भावना-मेहुल छेड़ा, अवनी-अनीश छेड़ा, निता मालदे, मीता धरोड़, श्रेया-विकास शाह, मीना-मेहुल मोता, ग्रीष्मा-मेहुल धरोड़, दीपा-नयम सावला, फेनीला छेड़ा, कल्पा छेड़ा, किंजल धरोड़, पायल काराणी, वैशाली आदि स्वयमसेवी हैं, सदुपयोग संस्था से जुड़कर अपना विशेष योगदान दे रही हैं।
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