श्रीकृष्ण का स्वरूप है मार्गशीर्ष माह
तिथि मुहूर्त
मार्गशीर्ष माह की शुरुआत अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार 6 नवंबर, गुरुवार से हो रही है, जो 4 दिसंबर, गुरुवार को समाप्त होगा।
मार्गशीर्ष या अगहन का माह विक्रम पंचांग के अनुसार नौवां महीना है, जो कार्तिक मास के बाद आता है। यह माह धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस माह की शुरुआत अंग्रेजी महीनों के हिसाब से आमतौर पर नवंबर के अंत या दिसंबर के प्रारंभ में होती है। यह महीना चंद्र कैलेंडर पर आधारित होता है। इसलिए इसकी तिथियाँ हर साल बदलती रहती हैं।
धार्मिक ग्रंथों में इसे भगवान श्रीकृष्ण का प्रिय महीना कहा गया है, क्योंकि श्रीमद्भगवद्गगीता के दसवें अध्याय के विभूति योग में भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं कहा है- मासानां मार्गशीर्षो?हम्। इसका मतलब है- साल के सभी महीनों में, मैं मार्गशीर्ष हूँ। इसे स्वयं भगवान श्रीकृष्ण का स्वरूप माना जाता है। इसलिए इसमें भगवान श्रीकृष्ण की अनेक स्वरूपों पूजा की जाती है।
महत्व
इस माह पर्व, त्योहार ग्रह-नक्षत्र के लिए यह महीना बेहद खास होता है। इसमें लग्न की शुरुआत हो जाती है, तो सभी मांगलिक कार्य किए जाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मार्गशीर्ष माह को भगवान कृष्ण ने विशेष महत्त्व प्रदान किया है। इस दौरान विधि पूर्वक किया गया व्रत और जप कई गुना अधिक फलदाई सिद्ध होता है।
इस माह में श्रीकृष्ण के उपदेशों का अध्ययन, श्रीमद्भगवद् गीता का पाठ, विष्णु सहस्त्रनाम का जप और श्रीकृष्ण की उपासना करना अत्यंत फलदायी और ज्ञानवर्धक माना जाता है। श्रीकृष्ण को तुलसी-पत्र अर्पित करना, माखन-मिश्री का भोग लगाना और दीप प्रज्वलित करना पुण्यकारी माना जाता है।
श्रीकृष्ण से जुड़े तीर्थों की यात्रा का धार्मिक महत्व
इन दिनों श्रीकृष्ण से जुड़े पौराणिक तीर्थों की यात्रा करनी चाहिए। इस माह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर गंगा स्नान, यमुना या किसी अन्य पवित्र नदी में स्नान करने की भी परंपरा है, जो आध्यात्मिक शुद्धि के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। ज्योतिषियों के मुताबिक, मार्गशीर्ष मास धर्म-कर्म के साथ ही सेहत के लिए भी बहुत खास है।
इस महीने से ठंड का असर शुरू हो जाता है। इन दिनों में खान-पान और जीवन शैली में की गई लापरवाही की वजह से मौसमी बीमारियां बहुत जल्दी हो जाती हैं। इसलिए कुछ देर सूर्य की रोशनी में रहने से स्वास्थ्य लाभ होता है। इस माह सूर्य को अर्घ्य अर्पित करके पूजा-घर में श्रीगणेश की पूजा करें।
विवाह पंचमी, दत्तात्रेय जयंती और मोक्षदा एकादशी का महत्व
इसके बाद श्रीकृष्ण पूजा करें। दक्षिणावर्ती शंख में जल व दूध भरकर श्रीकृष्ण का अभिषेक करें। कृं कृष्णाय नम: मंत्र का जप करते हुए धूप-दीप प्रज्वलित करके आरती करें। पूजा में तुलसी पत्र, माखन-मिश्री का भोग लगाएं। इस माह में श्रीकृष्ण की पूजा के साथ शंख की भी पूजा करते हैं। पांचजन्य शंख श्रीकृष्ण को विशेष प्रिय है। पूजा में श्रीकृष्ण प्रिय बांसुरी, गौमाता, मोर पंख, पीले वस्त्र भी रख सकते हैं।
इस माह में जरूरतमंदों को ऊनी वस्त्र, जूते-चप्पल, धन, अनाज और भोजन का दान करें। गौ शाला में गायों की सेवा के लिए धन का दान करें। भगवान शिव का जल और दूध से अभिषेक करें। शिवलिंग का चंदन, बिल्व पत्र, धतूरा, आंकड़े के फूल, गुलाब से श्रृंगार करें। जनेऊ चढ़ाएं। धूप-दीप प्रज्वलित करके आरती करें।
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मिठाई का भोग लगाएं। ॐ नम: शिवाय मंत्र का जप करें। इस माह में कई महत्वपूर्ण व्रत और त्योहार आते हैं, जो हिंदू धर्म के अनुयायियों के लिए आध्यात्मिक और धार्मिक गतिविधियों से जुड़ने का अवसर प्रदान करते हैं, जैसे- विवाह पंचमी, दत्तात्रेय जयंती, मोक्षदा एकादशी तिथि आदि।
-प्रमोद श्रृंगारी
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