देव दीपावली पर्व, देवी-देवता मनाते हैं असुर-वध का हर्ष

तिथि मुहूर्त

पंचांग के अनुसार, प्रदोष काल और उदया तिथि के आधार पर देव दीपावली 5 नवंबर, बुधवार को है।

दीप प्रज्वलन मुहूर्त

प्रदोष काल शाम के 5 बजकर 15 मिनट से 7 बजकर 50 मिनट तक।

शुभ मुहूर्त सिद्धि योग

5 नवंबर, बुधवार की सुबह से मध्याह्न 11 बजकर 28 मिनट तक।

भद्रा

5 नवंबर, बुधवार की सुबह 6 बजकर 36 मिनट से सुबह 8 बजकर 44 मिनट तक स्वर्ग की भद्रा रहेगी, जिसका पर्व पर कोई दुप्रभाव नहीं होता है।

देव दीपावली कार्तिक माह की पूर्णिमा तिथि को मनाई जाती है। देव दीपावली के नाम से ही स्पष्ट है, देवताओं की दीपावली। मान्यता है कि कार्तिक पूर्णिमा को सभी देवी-देवता शिव की नगरी काशी में गंगा के तट पर स्नान करते हैं और शिव की पूजा करके दीप जलाते हैं। इस वजह से हर साल कार्तिक पूर्णिमा को प्रदोष काल में काशी में गंगा के घाटों पर दीप जलाए कर देव दीपावली मनाई जाती है। जन विश्ववास है कि इस तिथि में गंगा स्नान करके शिव पूजा करने से भक्तों के सभी प्रकार के कष्ट, रोग, दुःख आदि मिटते हैं और शिव की कृपा बनी रहती है।

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पौराणिक कथा

तीनों लोकों में त्रिपुरासुर राक्षस का अत्याचार बढ़ गया था। उससे देवी, देवता, मनुष्य सभी परेशान थे। इसलिए भगवान शिव ने त्रिपुरासुर का अंत किया, इससे तीनों लोकों में खुशी छा गई। देवी और देवता उस दिन काशी में गंगा के किनारे उपस्थित होकर गंगा स्नान किया और प्रदोष काल में शिव पूजा करके दीप जलाए। यह उत्सव देव-दीपावली के नाम से लोकप्रिय हुआ।

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