माँ तुम राज़ी रहो
द्वार तिहारे खड़े, दुःखी हम हो!!
माँ तुम राज़ी रहो, माँ तुम राज़ी रहो!!
जब-जब संकट छाया
भक्तों को आकर बचाया
सुन-सुन कर ये परचा
दरबार में बस आया
दर्शन देकर परचा देकर
जीता दो जीवन की बाज़ी!!
माँ तुम राज़ी रहो, माँ तुम राज़ी रहो!!
गांव-गांव से जात्रा निकले
घर-घर से तेरे भक्त निकले
धूप-छांवं में चल धाम पहुंचे
खुशी के आँसू झरझर निकले
आँसू बन जाए मोती
आँखों में तेरी बाती हो!!
माँ तुम राज़ी रहो, माँ तुम राज़ी रहो!!
सुंदर रूप निहारे ये जग सारा
सुंदर भक्ति करे ये जग सारा
विनति सुन लो भक्तों की ज़रा
आशीर्वाद पाये ये जग सारा
क्यों दुःखी गौतम अकेला
अब सुखद जिंदगानी दो!
माँ तुम राज़ी रहो, माँ तुम राज़ी रहो!!
-गौतम चंद पारख
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