सीप का मोती

सागर की गहराइयों में सीप चुपचाप रहती,

शांत, सहनशील हर दर्द वो सहती,

रेत का एक कण सीने में बरसों रहता,

पीड़ा को धैर्य में ढाल मोती बन चमकता।

हर दिन लहरें आतीं कभी प्यार से थपथपातीं,

कभी क्रूर थपेड़ों से सीने को चीर जातीं,

दर्द को ज़हर नहीं बना सीप हार नहीं मानती,

शांति से रेत के कण को परतों में है ढालती।

कोई देखे न संर्घष चमक सबको भाए,

सीप की खामोशी में ही मोती की पहचान समाए,

कितना अकेला होता होगा सीप का नन्हा मन,

दर्द को सहता तभी बनता है अनमोल धन।

सीप सिखाती है जीवन को दुःख से मत घबराना,

दर्द की गोद में ही सफलता का रत्न पाना,

सिखलाता है मोती तकलीफ बेकार नहीं होती,

सह कर संर्घष पाए उजला रंग सीप यही है कहती।

सीप ने सिखाया चुप रहना,

दर्द को दिल में भर हर ठोकर को सहना,

जो भीतर पीड़ा को सहेज लेता मुस्कान में,

वीनू नाहटा

वही सीप बनकर चमकता है जिंदगी के जहान में।।

यह भी पढ़े: बगैर माध्यम के

अब आपके लिए डेली हिंदी मिलाप द्वारा हर दिन ताज़ा समाचार और सूचनाओं की जानकारी के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल की सेवाएं प्रस्तुत हैं। हमें फॉलो करने के लिए लिए Facebook , Instagram और Twitter पर क्लिक करें।

Related Articles

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Check Also
Close
Back to top button