एमएलसी नियुक्ति के खिलाफ याचिका खारिज
हैदराबाद, तेलंगाना उच्च न्यायालय ने राज्यपाल के कोटे से प्रो. एम. कोदंडराम रेड्डी और मो. अजहरुद्दीन की एमएलसी के रूप में नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी। अदालत ने फैसला सुनाया कि वह एमएलसी की नियुक्ति के मामले में हस्तक्षेप नहीं कर सकता है। याचिकाकर्ता द्वारा इस नियुक्ति के विरुद्ध उठाई गई आपत्तियों का निर्णय सर्वोच्च न्यायालय में किया जाना चाहिए, जो इस विवाद की सुनवाई कर रहा है।
उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जस्टिस नागेश भीमपाका ने गुरुवार को इसके संबंध में आदेश जारी किए। यह फैसला हैदराबाद के सय्यद हैदर द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई समाप्त करते हुए सुनाया गया, जिसमें राज्य सरकार द्वारा 26 अप्रैल को जारी सरकारी आदेश संख्या 71 को चुनौती दी गई थी, जिसके तहत कोदंडराम और मो. अजहरुद्दीन को राज्यपाल कोटे के तहत एमएलसी नियुक्त किया गया था।
सुनवाई के दौरान प्रारंभ में याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने दलील देते हुए कहा कि नियुक्ति का मामला सर्वोच्च न्यायालय में है और इन परिस्थितियों में एमएलसी की नियुक्ति अवैध है। सरकार ने कहा था कि यह विवाद सर्वोच्च न्यायालय में लम्बित मामले के अधीन होगा। लेकिन उसने अपनी याचिका में एसएलपी का उल्लेख नहीं किया।
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दलीलों का जवाब देते हुए न्यायाधीश ने याद दिलाया कि सरकारी आदेश संख्या 71 के अनुसार सर्वोच्च न्यायालय में लम्बित एमएलसी की नियुक्ति का मामला अंतिम निर्णय के अधीन होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे सर्वोच्च न्यायालय में लम्बित मामलों में हस्तक्षेप नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि यदि कोई आपत्ति है, तो उसका समाधान सर्वोच्च न्यायालय में ही किया जाएगा और इसके साथ ही याचिका पर सुनवाई समाप्त करने की घोषणा की।
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