ड्रग्स के खिलाफ सख्ती बढ़ाएगी पुलिस : सी.वी. आनंद

हैदराबाद, पुलिस महानिदेशक सी.वी. आनंद ने कहा कि जिस प्रकार से राज्य को माओवादी मुक्त राज्य बनाने के लिए पुलिस और एजेंसियाँ कार्य कर रही है। ठीक उसी तरह से ड्रग्स के खिलाफ भी संपूर्ण पुलिस बल को एक भावना से कार्य करने की आवश्यकता है।

पुलिस महानिदेशक का पद्भार संभालने के बाद सी.वी. आनंद ने आज ईगल फोर्स के साथ पहली समीक्षा बैठक की। इस बैठक में नशीले पदार्थों की सप्लाई और इस्तेमाल के खिलाफ सख्ती से कार्य करने की आवश्यकता जताई गई। सी.वी. आनंद ने कहा कि मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने पहले से ही पुलिस अधिकारियों को तेलंगाना में ड्रग्स की आपूर्ति को पूरी तरह से खत्म करने के लिए सख्त आदेश जारी किए हैं और इस दिशा में ईगल फोर्स का गठन किया गया। उन्होंने कहा कि ड्रग्स की समस्या पुलिस की समस्या नहीं, बल्कि पूरे राज्य, शहर और हर समाज की समस्या है।

इस महामारी को रोकने के लिए सभी को एकजुट होकर कार्य करना है, क्योंकि इस महामारी का शिकार होकर युवा पीढ़ी अपना भविष्य बिगाड़ रही है। उन्होंने कहा कि केवल एक ब्यूरो बनाना काफी नहीं है, बल्कि पूरे राज्य में पूरे पुलिस तंत्र को अच्छे से काम करना चाहिए। पूरे पुलिस बल को एक भावना के साथ कार्य करते हुए इस महामारी से निपटना है। जिस प्रकार से राज्य को माओवादी मुक्त करने के लिए पुलिस बल ने प्रदर्शन किया है, वही प्रदर्शन इस महामारी से निपटने के लिए करना होगा। उन्होंने कहा कि ड्रग्स के अलावा साइबर अपराध और यातायात समस्या हमारे सामने बड़ी चुनौती बने हुए हैं।

ड्रग्स नेटवर्क पर एडवांस तकनीक से होगी निगरानी

समीक्षा बैठक के दौरान पुलिस महानिदेशक ने ईगल फोर्स के कामकाज और पिछले परफार्मेंस की समीक्षा की और अधिकारियों को एडवांस तकनीक का इस्तेमाल करने की आवश्यकता जताई, जिससे कि ड्रग्स तस्करी से जुड़े वित्तीय आपूर्ति का पता लगाया जा सके। उन्होंने कहा कि विदेशी सिंडिकेट को खत्म करने के लिए एक उद्देश्य के साथ आगे बढ़ने की आवश्यकता है, क्योंकि एक सुनियोजित साजिश और योजना के तहत ड्रग्स तस्करी के मामलों में हवाले के जरिए पैसों का लेन-देन हो रहा है।

विशेषकर तकनीकी रूप से जाँच-पड़ताल करने से डीएचएल और फेडेक्स जैसी कूरियर सेवा के जरिए ड्रग्स तस्करी की पहचान हुई है, जिससे पता चलता है कि तस्कर गिरोह कपड़ों और किराणा सामान के भुगतान के तौर पर ड्रग्स से संबंधित पैसा विदेश भेज रहे हैं। इस प्रकार के मामलों में 93 विदेशी नागरिकों को (सूडान, नाइजीरिया, घाणा आदि) डिपोर्ट किया गया है।

सी.वी. आनंद ने अधिकारियों से सोशल मीडिया, डार्क वेब और क्रिप्टो करेंसी ट्रांजक्शन पर लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए। उन्होंने संदिग्धों को पकड़ने के लिए डिजिटल फोरेंसिक और जियो लोकेशन ट्रैकिंग का इस्तेमाल करने पर जोर दिया। उन्होंने ड्रग्स के मामलों में सजा की दर 19 प्रतिशत से बढ़कर 28 प्रतिशत होने पर प्रसन्नता जताई। उन्होंने कहा कि कुछ शैक्षणिक संस्थाएँ उनके विद्यार्थियों के ड्रग्स का शिकार होने पर कुछ मामलों में लापरवाही का हवाला देकर मामलों से अपना पल्ला झाड़ रही हैं, लेकिन विद्यार्थियों के ड्रग्स की महामारी का शिकार होने पर संबंधित शैक्षणिक संस्थान भी बदनाम हो रहे हैं।

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स्कूल-कॉलेजों में बनेगी नई सुरक्षा कमेटी

सी.वी. आनंद ने कहा कि ड्रग्स के खिलाफ जागरूकता लाने के लिए 4,500 एंटी ड्रग कमेटियाँ बनाई गई, लेकिन वे अपने मकसद को पूरी तरह से हासिल नहीं कर पा रही हैं। इस कारण स्कूलों और कॉलेजों में कॉप्रेहेन्सिव कमेटियाँ बनाने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है, जिसमें न सिर्फ ड्रग्स, बल्कि रैगिंग, साइबर अपराध, महिला सुरक्षा, बच्चों के साथ छेड़छाड़, सड़क सुरक्षा और यातायात नियमों को भी शामिल किया जाएगा।

इन समितियों की पहली जिम्मेदारी किसी भी घटना की तुरन्त अधिकारियों को रिपोर्ट करने की होगी। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ईगल फोर्स या अन्य दूसरी टीमें गैर-कानूनी कार्य का पता लगाती है, जिनकी रिपोर्ट शैक्षणिक संस्थान नहीं की, तो उस शैक्षणिक संस्थान के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि कई संस्थान खराब रेपुटेशन के डर से ऐसे मामलों को छुपाते हैं, लेकिन यह उनकी बुनियादी जिम्मेदारी है।

सी.वी. आनंद ने सुझाव दिया कि शैक्षणिक संस्थान में प्रवेश के दौरान विद्यार्थियों के लिए एक आवश्यक डिक्लेरेशन फार्म भराया जाए, जिसमें विद्यार्थी को यह घोषणा करनी होगी कि वह ड्रग्स का सेवन नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि इस प्रकार से बुनियादी तौर पर कार्रवाई करने से ही राज्य को ड्रग्स मुक्त राज्य बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि वे जल्दी ही ड्रग्स, साइबर अपराध और यातायात के मामलों में अधिकारियों को दिशा-निर्देश देने के लिए ज़िलों का दौरा करेंगे।

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