अलास्का की ठंड में गर्मजोशी का नाटक!

अलास्का की बर्फीली हवाओं में हाल ही में डोनल्ड ट्रंप और व्लादिमीर पुतिन की शिखर वार्ता हुई। दुनिया की नजरें इस ऐतिहासिक मुलाकात पर टिकी थीं। साथ ही इन दोनों नेताओं की देह भाषा पर भी टिकी थी। इतनी अधिक कि उसका साया ज़ेलेंस्की और ट्रंप की मीटिंग के ऊपर भी मँडराता दिखा। कहा भी गया है कि जब शब्द कम पड़ते हैं, तो हाथ-पैर और भौहें बोलने लगती हैं। यही वजह है कि सयानों ने देह भाषा का ऐसा विश्लेषण किया मानो ट्रंप और पुतिन दो सर्वाधिक शक्तिशाली राष्ट्राध्यक्ष न होकर किसी नाटक के पात्र हों!

सबसे पहले बात करें दोनों महाबलियों के ऐतिहासिक हैंडशेक की। टाइम्स ऑफ इंडिया की मानें तो ट्रंप ने पुतिन का हाथ कुछ इस अंदाज में थामा, जैसे कह रहे हों, देखो भाई, मैं तुमसे ज्यादा ताकतवर हूँ! लेकिन सयानों का कहना है कि ट्रंप की हथेली ऊपर की ओर थी, जो यह बताती है कि वे मन ही मन पुतिन को अपने से ज्यादा शक्तिशाली मान चुके थे। अरे, यह क्या? ट्रंप, जो ट्विटर पर खुद को विश्व का सबसे बड़ा डीलमेकर बताते नहीं थकते, पुतिन के सामने हल्का सा झुक गए?

पुतिन की मुस्कान और ट्रंप की ढीली देह भाषा

जंगल में घूमता शेर सामने बिल्ली को देखकर पूँछ दबा ले तो क्या कहिएगा? यही न कि शेर को मिला सवा शेर! वहीं, डेली मेल को पुतिन की चाल में बिल्ली जैसी मंथर चाल दिखाई दी। आमतौर पर ठंडे और कठोर दिखने वाले पुतिन इस बार मुस्कुराते हुए नजर आए। सयानों ने झट से इसे सच्ची मुस्कान कह दिया। पुतिन और सच्ची मुस्कान? यह तो वैसा ही है कि सर्दियों में अलास्का की बर्फ पिघल जाए! पुतिन की यह मुस्कान शायद इसलिए थी कि वे जानते थे कि ट्रंप उनके सामने थोड़ा नरम पड़ने वाले हैं।

और ट्रंप? वे तो हर बार की तरह अपने ट्रेडमार्क हाथ-पटक अंदाज में पुतिन को थपथपाते दिखे। न्यूयॉर्क पोस्ट के मुताबिक, यह थपथपाना ट्रंप का अहमियत दिखाने का तरीका था। वैसे, अगर थपथपाने से अहमियत दिखती, तो अब तक ट्रंप ने पूरी दुनिया को थपथपा दिया होता! इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट ने तो और भी मजेदार खुलासा किया। ट्रंप की देह भाषा मुलाकात के दौरान प्रमुखता से निराशा तक का सफर करती दिखी। शुरू में तो वे सीना तानकर बैठे थे, जैसे कह रहे हों, मैं हूँ विश्व शांति का मसीहा!

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ट्रंप-पुतिन वार्ता: देह भाषा का नाटकीय खेल

मगर जैसे-जैसे बातचीत आगे बढ़ी, उनके कंधे झुके, नजरें इधर-उधर भटकीं और चेहरा ऐसा जैसे कोई बच्चा आइसक्रीम छिनने पर मायूस हो गया हो। दूसरी ओर, पुतिन अपनी कुर्सी पर ऐसे जमे थे, जैसे वे वहाँ सदियों से बैठे हों। उनकी शांत मुद्रा और स्थिर नजरें बता रही थीं कि वे इस खेल के पुराने खिलाड़ी हैं। यूनिलैड की एक रिपोर्ट ने तो हद ही कर दी। उनके मुताबिक, पुतिन ने एक बार हाथ का ऐसा इशारा किया, जैसे वे ट्रंप को कह रहे हों, बस करो, अब ज्यादा ड्रामा मत करो!

और ट्रंप? हर बार की तरह अपनी बात पर जोर देने के लिए हाथ हिलाते रहे, जैसे कोई बॉलीवुड का हीरो डायलॉग मार रहा हो। मगर मजेदार बात यह कि जब पुतिन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में पहले बोलने का मौका लिया, तो ट्रंप चुपचाप खड़े रहे। मेहमान बाज़ी मार गया और मेज़बान खड़ा ताकता रहा!

सो, इस शिखर वार्ता का नतीजा भले ही कोई ठोस समझौता न दे पाया हो, मगर देह भाषा के तमाशे ने दुनिया का खूब मनोरंजन किया। ट्रंप का थपथपाना, पुतिन की चालाक मुस्कान और दोनों का एक-दूसरे को टटोलने वाला अंदाज! यह सब किसी हॉलीवुड थ्रिलर से कम नहीं था। इसलिए, अगली बार जब ये दोनों लें, तो समझौते से ज्यादा इनकी भौहों और हाथों की हरकतों पर नजर रखिएगा…

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