अनंत पुण्य के संचय से मिलता है धर्म : राजमतीश्रीजी
हैदराबाद, जीवन में यदि धर्म मिला तो सब कुछ मिल जाता है। पुण्य को हमेशा धन्यवाद देना चाहिए। व्यक्ति को धन नहीं बल्कि धर्म तारता है। धन पुण्य वाणी से मिलता है, पर धर्म अनंत पुण्य के संचय से मिलता है। उक्त उद्गार सिख छावनी स्थित श्री आनंद जैन भवन कोरा में श्री जैन श्रावक संघ कोरा के तत्वावधान में आयोजित धर्मसभा में श्री राजमतीश्रीजी म.सा. राजुल आदि ठाणा 3 ने दिये।
यहां मंत्री अनिल तातेड़ एवं धर्मेंद्र मांडोत द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, पूज्यश्री ने कहा कि जो स्वयं करेगा, वह दूसरों को भी करवायेगा। स्वयं दान, तप करेगा तो दूसरों को भी बोलेगा। जो व्यक्ति सेवा करेगा वही दूसरे को भी सेवा के लिए प्रेरित करेगा। हमारे परम पिता भगवान महावीर हैं जो हमेशा रहेंगे। हमारे जन्म देने वाला पिता तो संसार से विदा हो जाते हैं पर परमेश्वर हमेशा साथ रहने वाले हैं। वे करुणा सागर अनाथों के नाथ हैं।
पर्युषण में तप, दान और शक्ति साधना का महत्व
म.सा. ने कहा कि यदि गौतम गणधर का ध्यान आराधना साधना करते हैं, तो शक्ति मिलती है। शक्ति मिलने के साथ आत्मा पवित्र होती है। शक्ति के बिना कुछ होने वाला नहीं है। गुरु भगवान, देव की शक्ति तभी मिलती है जब जीवन में तप जप, दान शील का पालन करें। शक्ति नहीं तो कुछ भी नहीं कर सकते हैं। परमात्मा की इच्छा के बिना पत्ता भी नहीं हिलता है। प्रभु की इच्छा से ही हर कार्य होता है।
पवित्र महापर्व पर्युषण के लिए सात दिन बताये गए हैं पर इससे पूर्व संवत्सरी एक ही दिन होती थी। आचार्यों ने बताया कि पंचम आरे के अंदर व्यक्ति बहुत ही आलसी, प्रमादी, लालची और लोभी होगा इसलिए इसे सात दिन किया गया ताकि इन सातों दिनों में वह कभी तो अपने जीवन को शुद्ध करेगा। पर्युषण के सातवें दिन में यदि एक साथ कर्मों का क्षय किया तो आठवां कर्म तोडना बहुत मुश्किल होगा। इसके लिए परिश्रम करें तो एक एक कर्म टूटता है।
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पर्युषण कार्यक्रम: एकासन, प्रतिक्रमण और जन्मजयंती
तप जप आराधना नहीं भी होती है तो दान-शील कर सकते हैं। म.सा. ने कहा कि साल में पर्युषण का इंतजार करते हैं और तप जप दान शील करने की बात करते हैं पर पर्युषण आने के बाद प्रमाद करते हैं। पर्युषण के 6 दिन चले गये। अच्छा आयुष कर अच्छा कर्म करें। मंच का संचालन महामंत्री गौतमचंद मुथा ने करते हुए कहा कि नवकार महामंत्र का जाप प्रवचन के पश्चात प्रतिदिन गतिमान है। अंतगढ सूत्र का वाचन हुआ।
प्रवचन के 10 के पचखान श्रीकांत छाजेड़ ने लिए एवं 7 उपवास के पचखान संजना गुंडेचा, सुनीता भंडारी, समता सिंघवी, महिमा सिंघवी, महावीर तातेड़, अपेक्षा बोहरा व दर्शित तातेड़ ने लिए। लगभग 100 के ऊपर एकासना हुए जिनमें लाभार्थी विक्रमचंद गौतम पारसमल किशोर विमल रूपेश सुखानी परिवार एवं किरण देवी अमरचंद उमेश सुमित बागरेचा परिवार रहा। कल्पसूत्र का वाचन किया गया एवं धार्मिक प्रतियोगिता महिलाओं के लिए रखी गई। एकासन व्यवस्था में आनंद युवा मंडल एवं श्री वर्धमान महिला मण्डल के सदस्यों ने पूर्ण सहयोग दिया।
गौतमचंद मुथा ने बताया कि 27 तारीख को समतचारी का प्रवचन आदिनाथ भवन में रहेगा। पुरुषों के लिए आदिनाथ भवन में प्रतिक्रमण रहेगा एवं आनंद भवन में महिलाओं के लिए प्रतिक्रमण रहेगा। जो भी पोशा करना चाह रहे हैं, उनके लिए व्यवस्था रखी गई है। चक्रवर्ती आचार्य सम्राट जयमलजी महाराज की 318वीं जन्म जयंती तीन दिवसीय कार्यक्रम के रूप में मनायी जाएगी। 29 अगस्त को एकासन दिवस रहेगा। 30 अगस्त को सह-जोड़े जय होगा। 31 अगस्त को आदिनाथ भवन में भव्य रूप से जन्म जयंती मनाई जाएगी। सभी से अधिक से अधिक संख्या में पधारने का आग्रह किया गया है। सांसद ईटेला राजेंद्र एवं कंटोनमेंट के मल्लिकार्जुन ने श्री आनन्द जैन भवन पधाकर पूज्य गुरुणी मैया से आशीर्वाद प्राप्त किया।
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