रेणुकास्वामी हत्याकांड : उच्चतम न्यायालय ने अभिनेता दर्शन की जमानत रद्द की
नई दिल्ली, सर्वोच्च न्यायालय ने कर्नाटक उच्च न्यायालय द्वारा कन्नड़ अभिनेता दार्शनूगीता और छह अन्य को रेणुकास्वामी हत्या मामले में प्रदान की गई जमानत रद्द कर दी तथा अदालत में यह स्पष्ट किया कि चाहे कोई भी हो, कितनी भी ऊँचाई पर हो, वह कानून से ऊपर नहीं है। न्यायमूर्ति जे. बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ ने आदेश दिया कि अभिनेता तुरंत आत्मसमर्पण करें और राज्य प्रशासन उन्हें हिरासत में ले।
न्यायमूर्ति पारदीवाला ने राज्य को चेतावनी दी कि यदि जेल के भीतर अभिनेता अपने प्रभाव का किसी भी रूप में दुरुपयोग करते पाए गए, कोई फोटो या दृश्य प्रमाण सामने आया, तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई होगी। न्यायालय ने यह भी कहा कि उच्च न्यायालय ने हत्या के तथ्यों की असामान्य और विस्तृत समीक्षा करके जमानत दी, जो कि परीक्षण न्यायालय का विशेष क्षेत्र है।
सर्वोच्च न्यायालय ने यह बताते हुए कहा कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता को रोकने हेतु उसे अपनी असाधारण अधिकारिता का उपयोग करना पड़ा, क्योंकि परीक्षण प्रक्रिया के दौरान जमानत जारी रहने से न्याय प्रक्रिया में वास्तविक और तत्काल खतरा उत्पन्न हो सकता है। सर्वोच्च न्यायालय ने सुनवाई के दौरान यह भी कहा कि उच्च न्यायालय ने निष्पादन की धारणापूर्वक रिहाई का आदेश थोप दिया था, जो कि विवेकाधिकार के अत्यधिक प्रयोग का परिणाम था।
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यह निर्णय कर्नाटक राज्य सरकार द्वारा दायर अपील पर आया था, जिसे वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ लूथरा ने दायर किया था, जो उच्च न्यायालय के 13 दिसंबर 2024 के फैसले की चुनौती थी। मामले में दार्शनूगीता, अभिनेत्री पवित्रा गौड़ा और अन्य आरोपियों पर 33 वर्षीय फैन रेणुकास्वामी का अपहरण और उत्पीड़न करने का आरोप है, जिसमें पीड़ित की लाश एक नाले से बरामद की गई थी।
(भाषा)
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