कृषि अनुसंधान सचिव ने किया भाकृअनुप-भाश्रीअनुसं का दौरा
हैदराबाद, कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग के सचिव तथा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक डॉ. मांगीलाल जाट ने भाकृअनुप-भारतीय श्री अन्न अनुसंधान संस्थान के अनुसंधान, हैदराबाद में हुई प्रगति, बुनियादी ढांचे के विकास एवं देश में श्री अन्न परितंत्र को सुदृढ़ करने पर केंद्रित लोक-संपर्क पहलों की समीक्षा हेतु आज संस्थान (श्री अन्न वैश्विक उत्कृष्ट शोध केंद्र) का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने पोषण सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन का सामना करने की क्षमता तथा सतत आजीविका सुनिश्चित करने में श्री अन्न के बढ़ते महत्व पर बल दिया।

डॉ. मांगीलाल जाट ने भाकृअनुप-भाश्रीअनुसं में श्री अन्न वैश्विक उत्कृष्ट शोध केंद्र परियोजना के अंतर्गत राष्ट्रीय तथा वैश्विक स्तर पर श्री अन्न अनुसंधान को सुदृढ़ करने तथा बेहतर बनाने हेतु निर्मित अत्याधुनिक न्यूट्रीजेनोमिक प्रयोगशाला की समीक्षा की। यह उन्नत सुविधा पूरी तरह से स्वचालित, उच्च प्रवाह क्षमता जीनोमिक के माध्यम से श्री अन्न में अग्रणी जीनोमिक व आणविक प्रजनन अनुसंधान में सहायता हेतु विकसित की गई है।
यह सुविधा चिह्नक सहाय प्रजनन, कृत्रिम मेधा (एआई)-सक्षम उत्पादक प्रजनन एवं जीन-संपादन उपयोग को तीव्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी, ताकि जलवायु परिवर्तन का सामना करने हेतु सक्षम, पोषण से भरपूर एवं ज़्यादा पैदावार वाली श्री अन्न किस्मों का तेज़ी से विकास किया जा सके।
इस नई प्रयोगशाला से आशा है कि यह शोधकर्ताओं, विश्वविद्यालयों, राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय संस्थानों, स्टार्टअप्स एवं व्यावसायिक कंपनियों के सहयोगी अनुसंधान कार्यक्रम एवं प्रौद्योगिकी साझेदारी के माध्यम से उन्नत जीनोमिक सहायता प्रदान करके वैश्विक श्री अन्न अनुसंधान एवं नवोन्मेष को आगे बढ़ाएगी।
जलवायु बदलाव और खाद्य सुरक्षा पर अनुसंधान को मजबूती
यह सुविधा पोषण जीनोमिक, तनाव जीवविज्ञान, प्रकार्यात्मक लक्षण खोज तथा अगली पीढ़ी के प्रजनन प्रौद्योगिकियों में अनुसंधान को सुदृढ़ करेगी, जिससे खाद्य तथा पोषण सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन का सामना करने एवं सतत कृषि में सहायता मिलेगी। डॉ. जाट और डॉ. डी. के. यादव, उप महानिदेशक (फसल विज्ञान) ने उन्नत फेनोमिक सुविधा का भी दौरा किया तथा श्री अन्न वैश्विक उत्कृष्ट शोध केंद्र के भवन निर्माण की प्रगति की समीक्षा की, जहां उन्होंने श्री अन्न अनुसंधान एवं नवोन्मेष को आगे बढ़ाने के लिए विश्व स्तरीय वैज्ञानिक आधारिक संरचना के निर्माण में संस्थान के प्रयासों की सराहना की।

डॉ. सी. तारा सत्यवती, निदेशक, भाकृअनुप-भारतीय श्री अन्न अनुसंधान ने टीएसपी, एसीएसपी, एनईएच तथा एफपीओ कार्यक्रम के अंतर्गत संस्थान की महत्वपूर्ण उपलब्धियों तथा विशेष पहलों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने देशभर में आदिवासी किसानों, महिला समूहों, किसान उत्पाद संगठनों एवं छोटे किसान समुदायों के बीच श्री अन्न से होने वाली आजीविका, मूल्य वर्धन, उद्यमशीलता तथा सतत खेती को बढ़ावा देने में संस्थान के प्रयासों पर प्रकाश डाला।
यह भी पढ़ें… ओयू परिसर में पर्यावरण अनुकूल वाहनों का नया बेड़ा शामिल
डॉ. जाट ने प्रदर्शन क्षेत्र में वैज्ञानिकों से चर्चा की तथा संस्थान द्वारा विकसित श्री अन्न की नई किस्मों, समृद्ध जननद्रव्य संग्रहण एवं नई श्री अन्न प्रसंस्करण तथा मूल्य-वर्धन प्रौद्योगिकियों की समीक्षा की। उन्होंने तेलंगाना तथा आंध्र प्रदेश के श्री अन्न किसानों से भी बातचीत की, जिन्होंने भाकृअनुप-भाश्रीअनुसं के हस्तक्षेप से श्री अन्न की खेती, मूल्य-वर्धन एवं आजीविका में सुधार पर अपनी सफल गाथाएं साझा कीं।
अब आपके लिए डेली हिंदी मिलाप द्वारा हर दिन ताज़ा समाचार और सूचनाओं की जानकारी के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल की सेवाएं प्रस्तुत हैं। हमें फॉलो करने के लिए लिए Facebook , Instagram और Twitter पर क्लिक करें।



