नॉर्वे में 16 से कम उम्र के लिए बैन हो सकता है सोशल मीडिया

नई दिल्ली, दुनिया भर में कई देश अब बच्चों को सोशल मीडिया की लत और नुकसान देह कंटेंट से बचाने के लिए कड़े कदम उठा रहे हैं। मुख्य रूप से 15 या 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर रोक लगाई जा रही है। नियमों को सख्ती से लागू करने के लिए सोशल मीडिया कंपनियों को ‘एज वेरिफिकेशन’ के तरीके अपनाने को कहा गया है। इसमें आईडी चेक करना या फेशियल रिकग्निशन जैसी तकनीकें शामिल हैं।
इसी कड़ी में नॉर्वे सरकार ने भी बच्चों को मोबाइल की लत से बाहर निकालने और उनका बचपन सुरक्षित करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने एलान किया है कि 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल बैन किया जाएगा।
इसके लिए वर्ष 2026 के अंत तक संसद में एक बिल पेश किया जाएगा। आइए जानते हैं नार्वे सरकार का क्या प्लान है और किन देशों ने ये कदम उठाएं हैं.
उम्र जांचने की जिम्मेदारी टेक कंपनियों की
इस नए नियम की सबसे खास बात यह है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बच्चों की एज वेरिफिकेशन करने का पूरा जिम्मा सीधे तौर पर टेक्नोलॉजी कंपनियों का होगा। कंपनियों को ये सुनिश्चित करना होगा कि कोई भी 16 वर्ष से कम उम्र का बच्चा उनके प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल न कर सके।
नार्वे के प्रधानमंत्री ने क्या कहा?
नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनस गहर स्टोर ने इस कदम के बारे में बताते हुए कहा, “हम यह कानून इसलिए ला रहे हैं क्योंकि हम चाहते हैं कि बच्चे अपना बचपन जिएं। उनका खेल-कूद, उनकी दोस्ती और उनकी रोजमर्रा की जिंदगी को स्क्रीन और एल्गोरिदम के हवाले नहीं किया जा सकता। बच्चों के डिजिटल जीवन को सुरक्षित करने के लिए यह एक बहुत जरूरी कदम है।”
कौन-से एप्स होंगे बैन?
नॉर्वे की लेबर सरकार ने अभी तक आधिकारिक तौर पर उन एप्स के नाम नहीं बताए हैं, जिन पर यह नियम लागू होगा।
ऑस्ट्रेलिया से शुरू हुआ था ट्रेंड
आपको बता दें कि पिछले वर्ष दिसंबर में ऑस्ट्रेलिया दुनिया का पहला ऐसा देश बना था, जिसने 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन किया था। ऑस्ट्रेलिया के इस बैन के दायरे में मेटा के एप्स (इंस्टाग्राम और फेसबुक) के अलावा टिकटॉक, स्नैपचैट, गूगल का यूट्यूब और एलन मस्क का एक्स शामिल हैं। ऑस्ट्रेलिया के इस एतिहासिक कदम के बाद अब नॉर्वे समेत कई यूरोपीय देश भी बच्चों को सोशल मीडिया की लत से बचाने के लिए इसी राह पर आगे बढ़ रहे हैं।
इन देशों में लागू हुए या बनने वाले हैं सख्त नियम:
ऑस्ट्रेलिया: यहां दिसंबर 2025 में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पूरी तरह बैन कर दिया गया है। नियम तोड़ने वाले प्लेटफॉर्म्स पर करोड़ों का जुर्माना लगेगा।
फ्रांस: 15 साल से कम उम्र के यूजर्स के लिए माता-पिता की सहमति जरूरी कर दी गई है। साथ ही, इस उम्र के बच्चों के लिए पूरी तरह बैन लगाने पर भी विचार चल रहा है।
ग्रीस: 15 साल से कम उम्र वालों पर सोशल मीडिया बैन की घोषणा कर दी गई है, जो जनवरी 2027 से लागू होगा।
इंडोनेशिया और मलेशिया: 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर कई पाबंदियां और बैन लागू कर दिए गए हैं।
तुर्किये: 15 साल से कम उम्र के बच्चों की सोशल मीडिया तक पहुंच रोकने के लिए बिल पास कर दिया गया है।
स्पेन और डेनमार्क: स्पेन (16 साल) और डेनमार्क (15 साल) की सरकारें बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन करने की योजना बना रही हैं।
पोलैंड: 15 और 16 साल से कम उम्र वालों के लिए ऐसे ही सख्त कानून लाने पर विचार हो रहा है।
ब्रिटेन: ब्रिटेन भी ऑस्ट्रेलिया की तर्ज पर 16 साल से कम उम्र वालों के लिए बैन लाने पर विचार कर रहा है।
अमेरिका: वर्जीनिया और यूटा जैसे कई अमेरिकी राज्यों में बच्चों के लिए सोशल मीडिया फीचर्स को सीमित करने और उम्र की जांच के नियम लागू कर दिए गए हैं।
चीन: यहां बच्चों का स्क्रीन टाइम और कंटेंट कंट्रोल करने के लिए एक खास ‘माइनर मोड’ चलाया जाता है।
सोशल मीडिया के नए नियम कैसे काम करेंगे?
दुनिया भर की सरकारें नई तकनीक और सख्त नियमों के जरिए बच्चों को सोशल मीडिया से दूर रखने की कोशिश कर रही हैं। इसके लिए सरकारें ये 3 मुख्य तरीके अपना रही हैं:
उम्र की पक्की जांच (एज वेरिफिकेशन): पहले वेबसाइट्स पर उम्र के सत्यापन के लिए सिर्फ ‘मेरी उम्र 18 साल है’ वाले बॉक्स पर टिक करना होता था, जो अब काफी नहीं होगा।
असली उम्र पता करने के लिए फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया और इटली जैसे देश एडवांस तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसमें सरकारी आईडी कार्ड मांगना, चेहरा पहचानने वाली तकनीक और एआई की मदद से उम्र का अंदाजा लगाना शामिल है।
माता-पिता की इजाजत जरूरी: 13 से 15 साल तक के बच्चों के लिए सिर्फ उम्र की जांच ही काफी नहीं है। फ्रांस और पुर्तगाल जैसे देशों में नियम बना दिया गया है कि इस उम्र के बच्चे बिना अपने माता-पिता की ऑनलाइन मंजूरी के अपना सोशल मीडिया अकाउंट नहीं चला पाएंगे।
कंपनियों की जिम्मेदारी: अब बच्चों को सोशल मीडिया से बचाने की जिम्मेदारी सिर्फ माता-पिता की नहीं है, बल्कि फेसबुक, इंस्टाग्राम और टिकटॉक जैसी कंपनियों की भी है। उन्हें यह पक्का करना ही होगा कि उनके एप पर छोटे बच्चे न आएं।
अगर कंपनियां ऐसा करने में फेल हो जाती हैं तो उन पर भारी जुर्माना लगेगा। उदाहरण के लिए, ऑस्ट्रेलिया में यह जुर्माना 270 करोड़ रुपये तक हो सकता है। (भाषा)
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