पेड़े फलते पेड़ों पर

सोच रहा हूं कहीं अगर
पेड़े फलते पेड़ों पर।

पेड़े की बगिया मैं जाता
मुंह में भर-भर पेड़े खाता
डाल पकड़ता और हिलाता
पेड़े झरते मैं ले-लेता

नहीं चींटियां घर में टिकतीं
पेड़े के पेड़ों पर दिखतीं

फिर पेड़े ठेले पर दिखते
नहीं दुकानों पर ये बिकते
लोग खरीदा करते इसको
ले जाते झोला भर-भर के

पेड़े वाले रामदुलारे
जाने क्या करते बेचारे
नहीं बनाते वे पेड़े तो
कैसे चलता उनका घर?

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-शादाब आलम

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