जगन्नाथ धाम की परंपराओं का रहस्य
ओडिशा के पुरी में स्थित जगन्नाथ धाम चार धामों में से एक है। यहां भगवान जगन्नाथ बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ विराजते हैं। भगवान जगन्नाथ भगवान विष्णु के 8वें अवतार श्रीकृष्ण का ही स्वरूप हैं। यह धाम न केवल आस्था का प्रतीक है, बल्कि अपने रहस्यों और परंपराओं के लिए भी विख्यात है।
यह धाम चमत्कारों, भव्य रथ यात्रा और अनगिनत कहानियों के लिए जाना जाता है। मान्यता है कि यहाँ की दो ऐसी परंपराएं हैं, जिनका अनुपालन ना किया जाए तो इस धाम को अट्ठारह वर्षों के लिए बंद करना होगा। पृथ्वी के सबसे बड़े धाम जगन्नाथ पुरी मंदिर में दो परंपराएं ऐसी हैं, जिनका हर रोज पालन करना अनिवार्य माना गया है।
भोग अग्नि
जगन्नाथ पुरी मंदिर की सबसे पवित्र परंपराओं में से एक है- नीति चक्र के अनुसार महाप्रसाद की नित्य अग्नि जलाना। इसे आकाशीय अग्नि भी कहा जाता है, जो प्रतिदिन भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के लिए भोग पकाती है। यह अग्नि सदियों से कभी नहीं बुझी और इसे देव अग्नि का स्वरूप माना जाता है। मंदिर की रसोई में सात मिट्टी के बर्तनों में भोग पकता है, लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि इसमें सबसे नीचले बर्तन में रखा भोग सबसे देर से और सबसे ऊपर रखा हुआ भोग सबसे पहले पकता है।
मान्यता है कि अगर यह अग्नि किसी कारणवश बुझ जाए तो धाम को अपवित्र मानते हुए अट्ठारह साल तक भक्तों के लिए बंद करना पड़ेगा। इस दौरान मंत्रोच्चार, अनुष्ठान और विशेष यज्ञों के जरिए धाम को पुन शुद्ध किया जाएगा। भगवान जगन्नाथ और उनके भाई-बहन के लिए प्रसाद में खिचड़ी, मालपुआ, भात और छप्पन भोग जैसी कई चीजें शामिल होती हैं, जिनमें सबसे प्रिय खिचड़ी मानी जाती है।
पटकासी सेवा
जगन्नाथ धाम की अहम परंपरा है- पटकासी सेवा। धाम के शिखर पर लगा पतित पावन पताका प्रतिदिन बदला जाता है। यह पताका हवा की दिशा के विपरीत लहराता है, जिसे श्रद्धालु भगवान का चमत्कारी संकेत मानते हैं। 215 फीट ऊंचाई पर बिना किसी सुरक्षा के पुजारियों द्वारा पताका बदलने की यह अनोखी परंपरा सदियों से निभाई जा रही है।
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धार्मिक ग्रंथों के अनुसार इन दो परंपराओं की अखंडता बनाए रखना मंदिर की शुद्धता और जीवंतता के लिए अनिवार्य है। इसे बारिश या तूफान में भी निभाया जाता है। इनकी निरंतरता ही मंदिर की दिव्यता और श्रद्धालुओं की आस्था को बनाए रखती है। यही कारण है कि पुरी का जगन्नाथ मंदिर न केवल भव्यता और आस्था का केंद्र है, बल्कि अपने अनुशासन और रहस्यमयी परंपराओं के लिए भी अद्वितीय है।
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