टीनएजर से दूरी क्यों? माता-पिता की ये 7 बड़ी गलतियां


माता-पिता बनते ही हर इंसान बदल जाता है। उनके बच्चे उनकी दुनिया बन जाते हैं और अपने बच्चों को सारी खुशियां और सुख-सुविधाएं देने के लिए पेरेंट्स हर मुमकिन प्रयास करते हैं। लेकिन कई बार पेरेंट्स अनजाने में कुछ ऐसी गलतियां कर बैठते हैं जो बच्चों के लिए मजा की जगह सजा बन जाती हैं।
जाहिर सी बात है कि जब भी आप पहली बार पेरेंट्स बनते हैं तो आप भी बहुत कुछ नया सीखते हैं और बच्चे के साथ बतौर माता-पिता ग्रो करते हैं। लेकिन इस जर्नी में आप अपने बच्चे के साथ जाने-अनजाने कुछ ऐसा कर जाते हैं, जिसका उनके इमोशन्स, डेवलपमेंट और आप दोनों के रिश्ते पर बुरा असर पड़ सकता है।
ओवरप्रोटेक्टिव होना

पेरेंट्स हमेशा अपने बच्चों के लिए अच्छा चाहते हैं और उन्हें हर समस्याओं से दूर रखने के प्रयास में लगे रहते हैं। ऐसे में वह अक्सर बच्चे के लिए ओवरप्रोटेक्टिव बन जाते हैं। लेकिन वो कहते हैं ना कि कोई भी चीज हद से ज्यादा हो तो फायदे की जगह नुकसान ही पहुंचाती है। आपका आपके बच्चे के लिए ओवरप्रोटेक्टिव नेचर न केवल बच्चे के सामाजिक विकास को नुकसान पहुँचा सकता है,बल्कि उनके आत्मविश्वास को भी प्रभावित करता है। साथ ही उनके सीखने और विकास पर भी नकारात्मक असर डालता है। आपके यह अत्यधिक सुरक्षात्मक व्यवहार धीरे-धीरे बच्चे को आपसे दूर कर सकता है।
तुलना करना

अक्सर माता-पिता जाने-अनजाने में अपने बच्चे को सामने वाले बच्चे से कमतर महसूस कराने लग जाते हैं। वो ऐसा कहते हैं कि ”उसे देखो वो कितना समझदार है,वो पढ़ाई और स्पोर्ट्स दोनों में अच्छा है उसकी तरह बनो।” इस तरह की बातें बच्चों को मोटिवेट नहीं बल्कि आपसे दूर करती हैं। आपको समझना होगा कि पांचों उंगलियां बराबर नहीं होतीं,यानी हर इंसान अलग होता है,उनका स्वभाव,इंटरेस्ट,पर्सनैलिटी सभी अलग होते हैं। आप अपने बच्चे की किसी अन्य से तुलना करने की बजाय उसे मोटिवेट करें अच्छा करने के लिए।
बात-बात पर डांटना

अपने बच्चों के लिए रूल सेट करना कोई गलत बात नहीं है लेकिन अगर वो छोटी सी गलती कर बैठते हैं तो उन्हें डांटने से बचना चाहिए। अक्सर माता-पिता बच्चों को सही सिखाने की कोशिश में उन्हें बात-बात पर डालने लग जाते हैं जिससे उनके रिश्ते में दरार आ सकती है। अगर आपका बच्चा खुद अपनी गलती को स्वीकार कर रहा है तो उसे सराहना चाहिए और उस गलती को दोबारा न करने के लिए समझाना चाहिए। वहीं,अगर आप हर वक्त उन्हें डांटेंगे तो हो सकता है कि वो आपसे आगे चलकर बातें छिपाने लगे।

हर बात में रोक-टोक करना

इसके अलावा अगर आप हर समय अपने बच्चे से “यह मत करो,वह मत करो” कहते रहते हैं तो इससे रिश्तों में दरार आ सकती है। ऐसा इसलिए क्योंकि वो आपके साथ आजाद महसूस नहीं करते हैं और फिर आपसे दूरी बना लेते हैं। कभी-कभार ये जरूरी होता है कि बच्चों को अपने ढंग से चीजों को एक्सपीरिएंस करने दिया जाए। इससे उनका विकास भी अच्छा होता है।
घर के वातावारण पर भी दीजिए ध्यान

अगर हर समय ताने, तुलना या प्रेशर बना रहता है, तो टीनएजर बच्चे बात नहीं सुनते और केवल खुद को प्रोटेक्ट करने में लगे रहते हैं। ऐसे में जितना अधिक आप दबाव डालेंगे या उन्हें कंट्रोल करने की कोशिश करेंगे, वे उतना ही अधिक रिसिस्ट करेंगे। इसलिए यह तरीका अपनाने की बजाय, घर में शांत और सपोर्टिव वातावरण बनाइए और उनके साथ मजबूत कनेक्शन बनाने पर ध्यान दीजिए।
कैसे बच्चों के साथ रखें हेल्दी रिलेशनशिप?

यहां कुछ टिप्स दिए गए हैं,जिनके जरिए आप अपने बच्चों के साथ हेल्दी और हैप्पी रिलेशनशिप बनाए रख सकते हैं-
1- सबसे जरूरी है कि अपने बच्चों पर प्यार जताएं। उन्हें जेंटली हग करें,किस करें और उन्हें आई लव यू कहें। केवल एक सिंपल “आई लव यू” आपके बच्चे के साथ आपके लॉन्ग-टर्म रिलेशनशिप पर बड़ा प्रभाव डाल सकता है।
2- उनसे कनेक्शन बनाने के लिए जरूरी है कि आप उनकी भी भावनाओं को महत्व दें और उनकी बातों को सुनें। उनके मन में किसी चीज को लेकर क्या भावना या नजरिया है ये जानने की कोशिश करें। इससे वो आपके साथ अपनी फिलिंग्स को शेयर करने में कंफर्टेबल फील करते हैं।
3- उनके साथ जितना भी समय मिले बिताएं। उनके साथ खाना खाएं,खेलें,बातें करें। इससे आपको एक-दूसरे के साथ वक्त बिताने का अधिक मौका मिलता है।
4- इसके साथ ही ये भी जरूरी है कि उनके सीक्रेट को सीक्रेट रखें। अक्सर पेरेंट्स अपने बच्चों की बातों को रिश्तेदारों के सामने खुलकर बता देते हैं,जिससे उनका आपसे ट्रस्ट हट जाता है। ऐसे में उनकी बातों को अपने तक ही रखें।
5- उन्हें मोटिवेट करें। अगर वो खुद से कॉन्फिडेंस खो रहे हैं तो उनसे कहें कि तुम ये कर सकते हो। तुम बहुत ब्रेव हो तुमसे ये हो जाएगा। इन शब्दों को सुनकर उनमें आत्मविश्वास जागता है।
6 अपने बच्चे के लिए जो महत्वपूर्ण है उसमें रुचि दिखाएं ताकि यह पता चले कि आप उसकी परवाह करते हैं।
7 अपने बारे में बातें साझा करें और संबंध बनाने तथा साझा रुचियों की पहचान करने के तरीके खोजें।
8 अपने बच्चे से उनकी राय, विचार और दृष्टिकोण के बारे में पूछें ताकि आप उनकी भावनाओं को समझ सकें।
9 अपने किशोर बच्चे के साथ बचपन में जो संवाद था, उसे आगे बढ़ाएं – बचपन से लेकर वयस्कता तक संवाद महत्वपूर्ण है, और यदि आपने और आपके बच्चे ने अच्छी तरह से संवाद किया, अपनी भावनाओं और विचारों को साझा किया, तो यह अधिक संभावना है कि किशोरावस्था में आगे बढ़ने के साथ यह सिलसिला जारी रहेगा।
10 वे अपने जीवन के उस चरण में हैं, जहां नई चीजों को जानने और खोजने की जिज्ञासा और उत्साह अपने चरम पर होता है। उन्हें जबरदस्ती रोकें नहीं। उनसे यह अपेक्षा न करें कि वे चीजों को नहीं जानते होंगे जबकि वो खुद अपने अनुभवों से सीख रहे होते हैं। अपने अनुभव को बच्चों पर थोपने के बजाय उन्हें खुद अपने अनुभवों और गलतियों से सीखने मौका दें।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य जागरूकता के लिए है। इसकी पूर्ण सत्यता या सटीकता की पुष्टि नहीं की जाती है।
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