मानवता के साथ श्रद्धा, संयम और मर्यादा आवश्यक : श्रुतमुनिजी म.सा.
हैदराबाद, श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रमणोपासक संघ, रामकोट के तत्वावधान में गुरु गणेश जैन भवन में आयोजित प्रवचन सभा में श्रमणसंघीय उप-प्रवर्तक श्रुतमुनिजी म.सा. ने गुरु की महिमा बताई। उन्होंने कहा कि गुरु चार प्रकार के होते हैं। जन्म देने वाले माता-पिता भी गुरु होते हैं।
यहाँ रतनचंद कटारिया, शांतिलाल छाजेड़ एवं प्रिया कोठारी द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, मसा ने कहा कि जीविका देने वाले को भी गुरु मानना चाहिए, क्योंकि उनके माध्यम से ही जीवन जीने की कला सीखने को मिलती है। सम्यक का महत्व समझाने तथा उसे जीवन में अपनाने की प्रेरणा देने वाले गुरु होते हैं।
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वही व्यक्ति को देव का माध्यम और गुरु के बारे में समझाते हैं। उन्होंने कहा कि मानवता के साथ-साथ श्रद्धा, संयम, मर्यादा और पुरुषार्थ आवश्यक है। कथनी और करनी में समानता होनी चाहिए। अवसर पर तपस्वीराज अक्षरमुनिजी म.सा. ने कहा कि गुरु ही भवसागर से पार कराते हैं। अवसर पर बताया गया कि संघ के तत्वावधान में 18 से 20 अप्रैल तक अक्षय तृतीया पारणा का आयोजन किया जाएगा।
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