गैलरी से आगे की चीज है कला – अन्नपूर्णा मडिपडिगा

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अन्नपूर्णा मडिपडिगा आर्ट क्यूरेटर हैं। उन्होंने जुबली हिल्स में एकचित्रा आर्ट गैलरी की स्थापना की है। हाल ही में स्टेट आर्ट गैलरी में उनके द्वारा आयोजित चित्रकला प्रदर्शनी चर्चा का केंद्र रही है, जिसमें प्रिंटमेकिंग जैसी दुर्लभ शैली से जुड़े कलाकारों ने अपनी कलाकृतियाँ प्रदर्शित कीं। कला उनको विरासत में मिली है। उनके पिता रोहिणी कुमार भी कलाकार हैं। अन्नपूर्णा ने चित्रकला में स्नातकोत्तर की उपाधि अर्जित करने बाद पारंपरिक रूप से चित्रकला शुरू की। उसके बाद वह कला-कृतियों के संरक्षण और कला-शैलियों के प्रोत्साहन में रम गईं। उनसे बातचीत के कुछ अंश यहाँ प्रस्तुत हैं-

कला क्षेत्र में आना इत्तफाक है या पिताजी से प्रभावित होकर आपने इधर का रुख़ किया?

निश्चित रूप से मैं पिताजी से प्रभावित रही। वे हैदराबाद में जेएनएफयू की पहली बैच के विद्यार्थी थे। आँखें खोलीं तो उन्हें पेंटिंग करते पाया। मैंने पिताजी के साथ रहते हुए महसूस किया कि वो हमें कोई चीज़ बोलकर नहीं सिखाते थे कि ऐसा सीखना है, बल्कि ऐसा कुछ कर जाते थे कि हम उन्हें देख व सुन कर ही सीख लें। टेबल पर फ्रूट रखकर स्टिल लाइफ, ट्रेन में सफर के दौरान बाहर दिखाई देने वाले घर, सामने चर रही गाय और दूसरी चीज़ों को देखकर कहते कि यह पूरा संपूर्ण चित्र है, दूर दिखाई दे रहे पेड़ और हरे-भरे मैदान लैंड स्केप हो सकते हैं।

चित्रकारिता तो आपने पिता से सीखी और अध्ययन भी किया, लेकिन आर्ट क्यूरेटर के रूप में काम करने का निर्णय क्यों लिया?

पहले से कोई योजना बिल्कुल नहीं थी, न ही मन में ऐसी कोई बात थी। लगभग 8 साल पहले की बात है। एक मित्र को उनकी गैलरी के रख-रखाव के लिए सहयोग की आवश्यकता थी, सो मैंने उनके साथ काम करना शुरू किया। गैलरी में प्रबंधन के दौरान मैंने पाया कि मुझे उसमें अधिक रुचि है और मैं कई तरह के काम बड़ी आसानी से कर पा रही हूँ।

एक और खास बात है कि दूसरे कलाकार की कला को समझना और उनकी सराहना करना कितना ज़रूरी है और वह किस तरह से हो, यह मैंने अपने पिता से सीखा। यहाँ वह बहुत काम आया। खास तौर पर जब पिताजी वैकुंठम और शेषगिरी राव के घर ले जाते थे तो मैं देखती थी कि वो आपस में कला के बारे में ढेर सारी बातें करते थे। वह सब दिमाग़ में कहीं न कहीं था कि कला और कलाकार को प्रोत्साहन पूरे पारिस्थितिकी तंत्र का अहम हिस्सा है।

आपके शो चित्रम की अक्सर बात होती है, वह योजना कैसे बनी?

बिल्कुल मुझे याद है कि कोविड के दौरान लोगों से बातचीत अधिकतर बात दो ही मुद्दों तक सीमित रहती, क्या देखा (सिनेमा) या फिर क्या खाया? मैंने कई कलाकारों से इस मुद्दे पर बात की। उस चित्र-श्रृंखला में जीवन पर फिल्म के प्रभाव के आधार पर चित्रकारों ने बहुत ही प्रभावी चित्र बनाए थे। सिनेमा केवल मनोरंजन नहीं है, वह लोगों के जीवन को गहरे प्रभावित करता है, बल्कि कई लोगों के लिए यह बहुत निकट रिश्तों से भी अधिक प्रभावित करता है।

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कलाकारों का जीवन भी सिनेमा के क्षेत्र में महत्व रहता है। कई कलाकारों ने फिल्म के पोस्टर बनाने से अपना जीवन शुरू किया है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए एक बड़ा शो चित्रम स्टेट आर्ट गैलरी में किया गया था, जिसमें चार गैलरियों में तीस से अधिक कलाकारों की कृतियों का प्रदर्शन किया गया था। चित्रम शो सिनेमा के कई पहलुओं पर आधारित था और लोगों ने उसकी सराहना भी की।

अपनी गैलरी स्थापित करने का ख़्याल कैसे आया?

मैं आर्ट गैलरी जैसा कुछ नहीं बनाना चाहती। मुझे लगता है कि कला गैलरी से आगे की चीज़ है। उसे चारदीवारी में रखने या बांधने में मुझे विश्वास नहीं है। मैंने कई आर्ट गैलरियों के प्रबंधन में सहयोग किया। जब इस काम में अधिक आनंद आने लगा तो मैंने सोचा कि अपनी रुचि के अनुसार स्वतंत्र रूप से काम करने के लिए एक मंच की आवश्यकता है, लेकिन वह आर्ट गैलरी न कहलाए, बस एक कार्य-स्थल हो, जहाँ कला के कई पहलुओं पर काम किया जाए।

विशेषकर प्रिंटमेकिंग से जुड़े कई कलाकारों के साथ मैं काम कर रही हूँ। यह कला दुर्लभ होती जा रही है, बहु कठिन कार्य है, लेकिन उसका महत्व आज भी बहुत अधिक है। मैं चाहती हूं कि कई विभिन्न कलाओं, जैसे- नाटक, नृत्य, कविता, साहित्य आदि के लिए एक संयुक्त मंच स्थापित किया जाए, इससे विचारों का आदान-प्रदान होगा। ऐसा पहले भी होता आया है। विशेषज्ञता के नाम पर कलाओं को अलग करने से उनका संरक्षण कठिन होता जा रहा है। इसलिए इनको संयुक्त रूप से संरक्षित किया जा सकता है।

यह बताइए कि आर्ट क्यूरेटर की कौन-सी भूमिका आपको अच्छी लगती है?

एफ.एम.सलीम
एफ.एम.सलीम

क्यूरेटर तो हर क्षेत्र में होते हैं। दरअसल, रचनात्मक सोच के साथ रख-रखाव, प्रोत्साहन और संरक्षण जैसी कई जिम्मेदारियां आर्ट क्यूरेटर को निभानी होती है। क्यूरेटर को प्राथमिक रूप से यह सोचना होता है कि कलाकार की रचनात्मकता को किस तरह लोगों तक पहुँचाया जाए और उसे अधिक से अधिक प्रशंसा किस तरह मिले। जहाँ तक मेरा संबंध है, मैं विभिन्न कलाओं को एक मंच उपलब्ध कराने का प्रयास कर रही हूँ।

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