देविका सिहाग : भारतीय बैडमिंटन क्षितिज पर चमका सितारा

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मैं जीत गई। इस एहसास को समझने में समय लगा। बैंकॉक में थाईलैंड मास्टर्स 2026 में सफलता आगमन जैसी कम और खामोश घोषणा जैसी अधिक प्रतीत हुई। मात्र 20 वर्ष की आयु में देविका सिहाग सबसे कम उम्र की और केवल तीसरी- भारतीय महिला एकल शटलर बनी हैं साइना नेहवाल व पीवी सिंधु के बाद, जिन्होंने बीडब्लूएफ वर्ल्ड टूर सुपर 300 ख़िताब जीता है। इस प्रकार भारतीय बैडमिंटन की विशिष्ट विजेता सूची में एक और नाम जुड़ गया। कुल ढाई लाख प्राइज पूल की यह प्रतियोगिता बैंकॉक के निमिबुत्र स्टेडियम में 27 जनवरी से 1 फरवरी तक खेली गई।

इस प्रतियोगिता में जाने से पहले मैंने अपना मन बना लिया था कि मैं हर मैच में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करूंगी। शुरू से मैं बहुत अच्छा खेल रही थी। नंबर 1 सीड सुपानिदा (कटेथोंग) को पराजित करने के बाद मुझे विश्वास हो गया था कि मेरी कामयाबी की प्रबल संभावनाएं हैं। देविका ने बैंकॉक से लौटने के बाद बताया। पंचकुला की रहने वाली देविका की हाइट 172 सें.मी. है। वह बंग्लुरु में सेंटर ऑ़फ बैडमिंटन एक्सीलेंस (प्रकाश पादुकोण बैडमिंटन अकादमी या पीपीबीए) के ट्रेनियों में सबसे लंबे कद की लड़की हैं।

देविका सिंधु के साथ ट्रेनिंग कर तेज़ी और स्पीड सुधार रही हैं

देविका के मामले में कद गारंटी की बजाय संसाधन है। वह जिस स्पीड की संभावना प्रदर्शित कर रही हैं, उसमें अभी पैनापन लाने की ज़रूरत है। वह कहती हैं, सिंधु दीदी के साथ ट्रेनिंग करने के बाद मैं साफ देख सकती हूं कि हमारी स्पीड्स में कितना अंतर है। वह खेल के उच्चतम स्तर पर खेल रही हैं। अब मुझे अपने खेल में ज़बरदस्त गति लानी है ताकि हाई-रैंक खिलाड़ियों के साथ मुकाबला कर सकूं। इस बिंदु तक की यात्रा कुलीन अकादमियों के नियंत्रित वातावरण से बहुत दूर आरंभ हुई थी, पंचकुला में देविका अपने चार शुरुआती वर्षों में ताऊ देवी लाल स्टेडियम में कोच रोहित मंधाना की निगरानी में ट्रेनिंग करती थीं।

वहां उन्होंने प्रतिस्पर्धा की रिद्म सीखी। उनके पिता अजित सिहाग वकील हैं और अध्यापिका माता ने उन्हें व उनके भाई को बैडमिंटन में फिटनेस के लिए प्रवेश दिलाया था। इससे पहले देविका स्केटर थीं। जब बैडमिंटन में अच्छे नतीजे आने लगे तो परिवार का नज़रिया मनोरंजन से संभावना में बदल गया। इस संभावना ने 2017 में निर्णायक कदम उठाने को प्रेरित किया और देविका बंग्लुरु शिफ्ट हो गईं। पीपीबीए में वह उमेंद्र राना की निगरानी में ट्रेनिंग करने लगीं।

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देविका का फोकस फिटनेस और सुपर 500-750 में बेहतर प्रदर्शन पर

हाल के महीनों में उनकी कोर्ट शिक्षा ने एक अन्य मोड़ लिया। वह सिंधु व विख्यात कोच इर्वान्स्याह अदि प्रतामा के साथ काम कर रही हैं। देविका कहती हैं, कोच इर्वान्स्याह बताते हैं कि मेरे स्ट्रोक्स अच्छे हैं, लेकिन मुझे अपनी स्पीड व चपलता पर काम करना है। देविका का कहना है, अब लोग मुझसे अधिक की उम्मीद रखेंगे। मैं आशा करती हूं कि सुपर 500 व सुपर 750 प्रतियोगिताओं में भी अच्छा प्रदर्शन कर सकूं।

मैं उन गलतियों में सुधार लाऊंगी, जो बंग्लुरु में की। मैं हर संभव कोशिश करूंगी कि मेरे खेल में अतिरिक्त सुधार आये। देविका का फोकस अब फिटनेस पर है। घर पर जीत का जश्न संक्षिप्त व ज़मीन से जुड़ा रहा है। देविका ने बताया, मेरे पैरेंट्स वास्तव में खुश हैं। उन्होंने मुझे कड़ी मेहनत करने के लिए कहा है। मेरे पिता बताते रहते हैं कि मैं कहां गलतियां कर रही हूं और मुझे किन पहलुओं पर काम करना चाहिए। देविका की सफलता पर पीवी सिंधु का कहना है, जब मेरी ट्रेनिंग पार्टनर्स अच्छा करती हैं तो मैं अति उत्साहित हो जाती हूं। देविका मेरे व कोच इर्वान्स्याह के साथ ट्रेनिंग करती हैं और करीब से उनके समर्पण को देखना अविश्वसनीय रहा है।

-सारिम अन्ना

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