क्या महिलाओं को अधिक नींद की ज़रूरत होती है?

विभिन्न अध्ययनों से यह बात स्पष्ट हुई है कि महिला पुरुषों की तुलना में औसतन अधिक नींद लेती हैं। साल 2022 में किये गये एक बड़े वैश्विक अध्ययन में जिनमें 70 हज़ार महिलाओं का डेटा शामिल किया गया था, इस अध्ययन के नतीजों के अनुसार हर उम्र की महिलाओं ने पुरुषों की तुलना में ज़्यादा नींद ली थी। 40 से 44 साल की महिलाओं ने इस बात को स्वीकार किया कि वे पुरुषों की तुलना में 20 से 30 मिनट ज़्यादा नींद लेती हैं।
कुछ अन्य अध्ययनों के आधार पर महिला और पुरुषों के नींद की गुणवत्ता पर भी जब ध्यान दिया गया तो उसमें यह तथ्य सामने आया कि पुरुषों के मुकाबले महिलाओं को ज़्यादा गहरी और आरामदायक नींद की ज़रूरत होती है और वो जितना गहरी नींद लेती हैं, उतना ही उनकी कार्यक्षमता में बढ़ोत्तरी होती है। स्वस्थ रहने के लिए हमें कम से कम 7-8 घंटे की नींद लेनी चाहिए, ऐसा कहा जाता है। लेकिन महिलाओं को इतनी नींद लेने के बावजूद भी सुबह उठते समय थकावट महसूस होती है और उन्हें लगता है कि उनकी नींद पूरी नहीं हुई और उन्हें थोड़ा और सोना चाहिए। वहीं पुरुष 7-8 घंटे की नींद से ही अच्छी तरह से काम कर लेते हैं।
नींद की कमी के नतीजे
अगर महिलाओं को पर्याप्त नींद न मिले तो उनमें हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, दिल की बीमारियां और स्ट्रोक का खतरा बढ़ता है। इससे उनकी मेंटल हेल्थ पर भी बुरा असर होता है। नींद की कमी से तनाव, गुस्सा, उदासी और चिंता होती है। नींद की कमी से थकान बढ़ती है और काम में मन नहीं लगता। लंबे समय तक नींद कम लेने से मासिक पा गड़बड़ा जाता है और प्रजनन क्षमता पर भी बुरा असर होता है। यही वजह है कि महिलाओं के लिए अच्छी नींद लेना बेहद ज़रूरी है।
नींद का बदलता पैटर्न
विभिन्न शोधों के अनुसार महिलाओं की मस्तिष्क की संरचना पुरुषों की तुलना में अलग और जटिल होती है। महिलाएं एक साथ कई कार्य करने और एक ही समय में अपनी बुद्धि का कई कामों के लिए इस्तेमाल करने के लिए जानी जाती हैं। यही वजह है कि उन्हें शारीरिक और मानसिक थकान ज़्यादा लगती है और पुरुषों की तुलना में उन्हें ज़्यादा नींद की ज़रूरत होती है। इसके अलावा महिलाओं में अनिंद्रा का खतरा पुरुषों की तुलना में 40 प्रतिशत ज़्यादा होता है।
विभिन्न अध्ययन भी इस बात का खुलासा करते हैं कि अधिक नींद लेने के बावजूद नींद में बार-बार व्यवधान और गड़बड़ी के कारण पुरुषों की तुलना में महिलाओं में नींद की गुणवत्ता कम हो जाती है, जिसकी एक वजह महिलाओं की नींद पर उनमें हार्मोन्स का बदलाव भी मायने रखता है। मासिक धर्म के दौरान एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोनों में उतार-चढ़ाव भी महिलाओं में नींद के पैटर्न को बाधित करते हैं।
इसके अलावा गर्भावस्था में हार्मोनल परिवर्तन और शरीर में होने वाले बदलावों के कारण भी उनके नींद के पैटर्न में बदलाव आ जाता है। मोनोपॉज के दौरान भी महिलाओं के शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव उनकी नींद को प्रभावित करते हैं। इसके अलावा महिलाएं ज़्यादा तनाव और डिप्रेशन से गुजरती हैं। महिलाएँ अपनी ज़िम्मेदारियों को निभाने के दौरान कई बार अपने स्वास्थ्य की बहुत अनदेखी करती हैं, जिसका असर उनके मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य पर पड़ता है। हमारे पारिवारिक व्यवस्था के तानेबाने में वह अपनी देखभाल को अंतिम प्राथमिकता देती हैं, यही वजह है कि उनकी नींद का पैटर्न पुरुषों से अलग हो जाता है।
बेहतर नींद के लिए क्या करें
- रोज एक ही समय पर सोएं और उठें, इससे नींद की गुणवत्ता सुधरती है।
- सोने से पहले संगीत सुनने या पढ़ने की गतिविधियों में खुद को संग्लन करें। देर रात में मोबाइल से दूरी बनाकर रखें, क्योंकि पीन भी नींद के पैटर्न को प्रभावित करती है।
- कमरे का माहौल शांत और आरामदायक नींद के अनुकूल होना चाहिए। सोने के गद्दे और तकिये ऐसे हों, जिनमें अच्छी नींद आए।
- सोने से तीन घंटे पहले कैफीन और भारी भोजन करने से बचें। क्योंकि इससे पाचन क्रिया पर बुरा असर होता है और नींद का चक्र भी बिगड़ता है।
- सोने से पहले अगर करना चाहें तो हल्का व्यायाम करें। ज़्यादा भारी व्यायाम शरीर को थका देता है और इससे सोने में कठिनाई पैदा होती है।
- यदि आपकी नींद बार-बार टूट जाती है, एक या दो घंटे गहरी नींद के बाद पूरी रात नींद नहीं आती या रात में नींद न आए और सुबह के समय गहरी नींद आए तो अपनी नींद की गुणवत्ता में सुधार के लिए डॉक्टर से सहायता लें।
डॉ. माजिद अलीम
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