तेलंगाना के किसानों ने की जैव प्रौद्योगिकी तक पहुँच की माँग

हैदराबाद,आनुवंशिक रूप से संशोधित फसलों सहित जैव प्रौद्योगिकी से उन्नत फसलों को अपनाने पर जारी राष्ट्रीय बहस के बीच तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के किसानों ने सराकर से अनुरोध किया है कि नीति निर्माण में विज्ञान-आधारित और उन्नत कृषि प्रौद्योगिकियों के दृष्टिकोण को अपनाया जाए।

तेलंगाना-आंध्र के किसान जैव प्रौद्योगिकी नीति में बदलाव चाहते हैं

राष्ट्रीय किसान सशक्तीकरण पहल के अंतर्गत आज यहाँ प्रेस क्लब हैदराबाद में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में किसानों ने कहा कि प्रगतिशील किसानों ने आधुनिक जैव प्रौद्योगिकी तक पहुँच नवाचार उत्पादकता बढ़ाने, आजीविका को सुरक्षित करने और भारत की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने की कुंजी है। किसानों की मांग है कि उन्हें सर्वोत्तम उपलब्ध प्रौद्योगिकी को चुनने का अधिकार होना चाहिए। भारतीय किसानों को उन उपकरणों से वंचित नहीं किया जाना चाहिए, जिनका उपयोग अमेरिका, ब्राजील और अर्जेंटीना जैसे देशों में उनके समकक्ष लंबे समय से कर रहे हैं।

गुंटुरपल्ली गांव के कपास किसान वेल्लंगन रेड्डी ने कहा कि प्रौद्योगिकी ने हमेशा प्रगति को गति दी है। कृषि को भी प्रौद्योगिकी के सहारे विकसित होना चाहिए। जैव प्रौद्योगिकी भविष्य है और किसानों को पीछे नहीं रहना चाहिए। इसके लिए सरकार को उचित मार्गदर्शन के साथ किसानों के सहयोग के लिए आगे आना चाहिए। उन्होंने कहा कि दो दशक पहले, बीटी कपास की शुरूआत ने भारत में कपास की खेती में क्रांति ला दी थी। कीटनाशकों के उपयोग को कम किया गया और उपज में वृद्धि देखी गयी। जैव प्रौद्योगिकी भारतीय किसानों के जीवन को बदल सकती है। फिर भी कई किसान इस बात से निराश हैं कि अन्य फसलों के लिए इसी तरह की प्रगति को रोका जा रहा है।

बीटी कपास से मिली सफलता, अन्य फसलों के लिए भी मांग तेज

विकाराबाद जिले के रुद्रराम गांव के किसान दयावरी नारायण ने बताया कि वे दालें, बाजरा, उच्च घनत्व वाली बीटी कपास उगाते हैं। जहां भारतीय किसान अप्रत्याशित मौसम, कीटों और स्थिर उपज से जूझ रहे हैं, वहीं विदेशों में उनके समकक्ष बायोटेक फसलों के साथ फल-फूल रहे हैं, जो कीटों के प्रति प्रतिरोधक क्षमता, सूखा सहनीयता और उच्च उत्पादकता प्रदान करते हैं। किसानों को यह तय करना चाहिए कि हमारे लिए सबसे अच्छा क्या है।

एलायंस फॉर एग्री इनोवेशन के निदेशक डॉ. वेंकटराम वसंतवाड़ा ने किसानों की चिंताओं के बारे में बताया कि साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण की आवश्यकता है। जैव-प्रौद्योगिकी से उन्नत फसलों को कई देशों में सुरक्षित रूप से अपनाया गया है, जिससे उपज, किसानों की आय और पर्यावरणीय स्थिरता में महत्वपूर्ण सुधार हुआ है।

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