तुम हो तो…(कविता)

तुम कहती हो
तुम चंदना सेन हो
मैं कहता हूँ :
नहीं, नहीं, तुम चंदना सेन नहीं
तुम्हीं थीं चित्रांगदा,
तुम्हीं वनलता,
तुम्हीं यशस्विनी, तुम्हीं सुप्रिया, तुम्हीं सुभाषिणी
तुम्हीं अमृता, तुम्हीं…..

तुम एकबारगी आईं तो कभी गईं ही नहीं,
चंदना सेन।

सुधीर सक्सेना-‘तुम हो तो’
सुधीर सक्सेना

युग-युगांतर से
तुम हो तो
चहक और महक से भरी है धरती
तुम हो तो
धरती पर शेष है प्रेम का उजास।

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