मनुष्य की प्रवृत्ति ही करती है उसके भविष्य का निर्माण : निर्मलाजी

हैदराबाद, मनुष्य की प्रवृत्ति ही उसके भविष्य का निर्माण करती है। प्रत्येक जीव अपने कर्म, लेश्या और भावना के अनुसार विभिन्न योनियों में गमन करता है। मनुष्य के जीवन में चार प्रकार की प्रवृत्तियाँ बताई गई हैं, जिसमें से दानवी प्रवृत्ति, जहाँ मनुष्य के जीवन को स्वार्थी बना देती है, उसका पूरा जीवन स्वार्थ की पूर्ति में लग जाता है, दुर्योधन के जीवन को इसका उदाहरण माना जा सकता है। वहीं दूसरी प्रवृत्ति मानवी प्रवृत्ति मनुष्य के जीवन को त्याग, सेवा और धर्म के मार्ग पर आगे बढ़ाती है।

महासती निर्मला जी म.सा ने मानव जीवन पर प्रवचन दिया

उक्त उद्गार श्री वर्धमान स्थानक जैन श्रावक संघ ग्रेटर हैदराबाद काचीगुड़ा जैन श्रावक संघ के पूनमचंद गांधी जैन स्थानक में विराजित महासती निर्मलाजी म.सा ने प्रवचन सभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किये। संघ के महामंत्री पवन कटारिया ने आज यहाँ जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि होली चातुर्मास के तहत धर्मसभा को संबोधित करते हुए म.सा. ने मानव जीवन की महत्ता, उसकी दुर्लभता एवं मनुष्य की विभिन्न प्रवृत्तियों पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि उत्तराध्ययन सूत्र में मानव जीवन को अत्यंत दुर्लभ बताया गया है, जो अनंत योनियों में भ्रमण करने के पश्चात प्राप्त होता है।

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मनुष्य भव मिलने के बाद भी सद्गुणों का विकास आवश्यक

मनुष्य भव मिलने के बाद भी जीवन में सद्गुणों का विकास न हो, तो उसका वास्तविक उद्देश्य अधूरा रह जाता है। म.सा. ने कहा कि मनुष्य की प्रवृत्ति ही उसके भविष्य का निर्माण करती है, जहाँ दानवी प्रवृत्ति जीवन का पतन करती है, वहीं मानवी प्रवृत्ति जीवन को सही राह पर ले जाती है। मानवी प्रवृत्ति में व्यक्ति ज्ञान प्राप्ति के पश्चात विवेकपूर्ण आचरण करता है। वह त्याग, सेवा और धर्म मार्ग का अनुसरण करता है। धर्मराज युधिष्ठिर जैसे चरित्र मानवी प्रवृत्ति के आदर्श उदाहरण माने जाते है, जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी धर्म का मार्ग नहीं छोड़ा।

महासती निर्मला जी म.सा ने मानव जीवन पर प्रवचन दिया

म.सा. ने कहा की केवल बाह्य आडंबर से धर्म की प्राप्ति नहीं होती, बल्कि आंतरिक परिवर्तन आवश्यक है। जब तक मनुष्य अपनी प्रवृत्तियों का परिष्कार नहीं करता और लोभ, क्रोध, अहंकार तथा मोह का त्याग नहीं करता, तब तक सच्चा धर्म जीवन में प्रकट नहीं होता। म.सा. ने मंगलवार, 3 मार्च को होली चातुर्मास में सभी श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक धर्म आराधना से जुड़कर आत्मचिंतन, संयम और सदाचार अपनाने का संदेश देते हुए जीवन को धर्ममय बनाने का आह्वान किया।

संघ के महामंत्री पवन कटारिया ने धर्मसभा का संचालन करते हुए कहा कि 3 मार्च को संघ के तत्वावधान में होली चातुर्मास भव्य रूप से तप, त्याग और धार्मिक साधना-आराधना के साथ मनाया जाएगा। कार्यक्रम सुबह 9.15 बजे प्रारम्भ होगा। सर्वप्रथम पैंसठिया जाप का आयोजन किया जाएगा। म.सा. ने सभी को दो-दो सामायिक करने का लक्ष्य रखने की प्रेरणा दी। कार्यक्रम के पश्चात संघ की ओर से गौतम प्रसादी का आयोजन किया जाएगा।

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