ममता का इस्तीफा न देना केंद्र-निर्वाचन आयोग के खिलाफ विरोध : राउत

मुंबई, शिवसेना(उबाठा) नेता संजय राउत ने बुधवार को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के विधानसभा चुनावों में हार के बाद इस्तीफा न देने के फैसले का समर्थन करते हुए, इसे केंद्र और निर्वाचन आयोग के खिलाफ उनका विरोध करार दिया।

राउत ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि केंद्र की ‘तानाशाही’ और निर्वाचन आयोग के ‘पक्षपातपूर्ण’ व्यवहार के खिलाफ एकजुट होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि चुनाव निकाय केंद्र का ‘‘गुलाम’’ बन गया है। शिवसेना(उबाठा) नेता ने कहा कि विपक्ष को यह तय करना होगा कि उसे चुनाव लड़ना है या नहीं। उन्होंने कहा, ‘‘ममता बनर्जी का इस्तीफा न देना केंद्र सरकार, निर्वाचन आयोग और लोकतंत्र के खिलाफ कई कृत्यों के खिलाफ उनके आंदोलन का हिस्सा है।’’

राउत ने कहा कि यह देखना बाकी है कि आंदोलन किस दिशा में आगे बढ़ता है। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों को जनता का जनादेश नहीं बल्कि एक साजिश करार देते हुए ममता बनर्जी ने मंगलवार को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने से इनकार कर दिया। पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यी विधानसभा में भाजपा ने 207 सीट पर जीत दर्ज कर 15 साल के तृणमूल कांग्रेस का शासन का अंत कर दिया। ममता बनर्जी ने इस परिणाम को धांधली का नतीजा करार देते हुए कहा कि उनकी पार्टी निर्वाचन आयोग से लड़ रही थी, भाजपा से नहीं। तृणमूल को केवल 80 सीटें ही मिल सकीं।

‘इंडिया’ गठबंधन नेताओं की एकजुटता पर जोर

राउत ने एक फेसबुक पोस्ट में कहा कि ममता बनर्जी का इस्तीफा न देने का फैसला पूरी तरह से उचित है। उन्होंने 2022 के महाराष्ट्र राजनीतिक संकट से भी इसकी तुलना करने की कोशिश की। राउत ने कहा कि अविभाजित शिवसेना के बागी विधायकों को अयोग्य करार देने के लिए दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश ने टिप्पणी की थी कि उद्धव ठाकरे, जो उस समय पार्टी के प्रमुख थे, यदि उन्होंने इस्तीफा नहीं दिया होता तो उन्हें मुख्यमंत्री के रूप में बहाल किया जा सकता था।

राज्यसभा सदस्य ने कहा कि शिवसेना (उबाठा) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने चुनाव के बाद बनर्जी को फोन किया और उन्हें समर्थन दिया। लगभग सभी ‘इंडिया’ (इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव अलायंस)गठबंधन के नेताओं ने बनर्जी को फोन करके अपना समर्थन दिया है। राउत ने कहा, ‘‘अगर हमें केंद्र की तानाशाही और निर्वाचन आयोग के पक्षपातपूर्ण व्यवहार या जिस तरह से चुनाव निकाय सरकार का गुलाम बन गया है, उसके खिलाफ एकजुट होना है, तो हमें एक साथ आना होगा।’’ उन्होंने दावा किया कि सरकार में भी कई लोग ‘‘लोकतंत्र के पतन’’ से सहमत नहीं हैं। (भाषा)

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