पोस्टमार्टम 2025: भक्ति, भगदड़, धोखा, धमाका, हमले व हंगामे वाला धुरंधर साल

वर्ष 2025 को भारतीय इतिहास में उस ब्लॉकबस्टर फिल्म की तरह दर्ज किया जाएगा, जिसमें निर्देशक बदलते रहे, पटकथा रोज़ लिखी गई, कलाकार खुद ही डायलॉग बोलते रहे और दर्शक बेचारे टिकट लेकर भी हॉल से बाहर नहीं निकल पाए। इसमें कहानी थी, सस्पेंस था, रोमांस था, वाद-विवाद संवाद था, ऐक्शन था, थ्रिल था, बस नहीं था तो इंटरवल और ना ही चैनल बदलने का विकल्प, क्योंकि पूरा देश ही सिनेमा हॉल और देशवासी दर्शक बने हुए थे।

भक्ति, भीड़ और व्यूअरशिप का त्रिवेणी संगम

फिल्म की ओपनिंग भव्य रही। प्रयागराज महाकुंभ में लगभग पैंसठ करोड़ श्रद्धालुओं ने पाप-विमोचन के लिए आस्था की डुबकी लगाई। कुछ श्रद्धालु ऐसे भी थे, जिन्होंने माला पोता मोनालिसा की आँखों में डुबकी लगाकर वैतरणी पार करने का शॉर्टकट खोज लिया। भक्ति, भावुकता और व्युअरशिप – तीनों का त्रिवेणी संगम हुआ। कैमरे भी श्रद्धा में लीन थे, बस लाइक-शेयर बाकी रह गया था।

ऐक्शन सीन: भगदड़ से ब्लास्ट तक

जैसे फिल्म में हर मसाला होता है, वैसे ही शांत भक्ति के बाद भारतीय पटल पर ऐक्शन सीन भी देखने को मिला। महाकुंभ, दिल्ली स्टेशन और रथ यात्रा की भगदड़; एयर इंडिया का प्लेन क्रैश, पहलगाम आतंकी हमला, यूपी, एमपी और बंगाल की हिंसा, दिल्ली ब्लास्ट, गोवा नाइट क्लब आगजनी और रोहित शेट्टी की फिल्म की तरह कोहरे में यमुना एक्सप्रेस-वे पर गाड़ियों की टक्कर – इन सबने वर्ष को पूरी तरह धमाकेदार बना दिया। इन घटनाओं से देश कुछ देर के लिए जरूर थमा, लेकिन इन परिस्थितियों में भी माननीयों के चुनावी दौरे और विदेशी यात्राएँ बदस्तूर जारी रहीं। दर्शक कन्फ्यूज हो गए कि यह ब्रेकिंग न्यूज़ है या अगली वेब सीरीज़ का ट्रेलर अथवा अविराम जीवन का परम सत्य!

गॉसिप, ग़लतफहमियाँ और टीआरपी की दुल्हन

इस वर्ष डायलॉगबाज़ी भी दमदार रही। पिछले साल के बंटोगे तो कटोगे के बाद इस वर्ष आई लव मोहम्मद और आई लव महादेव जैसे नारे राष्ट्रीय स्तर पर रिलीज़ हुए। बंगाल फाइल से ज्यादा एप्सटीन फाइल की चर्चा हुई। इस साल भी धर्म और प्रकृति पर ख़तरा मंडराता रहा। अली और बजरंग बली के बाद अरावली भी ख़तरे में आ गया।

एसआईआर, शरबत जिहाद, बीएलओ, बुल्डोजर, टैरिफ, जीएसटी, जेन-जी जैसे शब्द चर्चा में रहे। बाबाओं और नेताओं का बड़बोलापन, अक्षय का ठुमकना, माननीय द्वारा हिजाब हटाने की घटना सबने सुर्खियाँ बटोरीं। इधर मोस्ट एलिजिबल बैचलर राहुल गांधी और सलमान खान को इस वर्ष भी दुल्हन नहीं मिली, उधर वक्फ संशोधन विधेयक और एसआईआर प्रक्रिया सबने मिलकर गॉसिप चैनलों की टीआरपी को दुल्हन बना दिया। पटना पुस्तक मेला में पंद्रह करोड़ की पुस्तक आई स्टडी की बजाय सेल्फी के कारण चर्चा में आई।

अंतरराष्ट्रीय कूटनीति का मल्टी-स्टारर सीन

अंतरराष्ट्रीय फ्रेम में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ग्लोबल फूफा़ की भूमिका निभाते हुए नोबेल की तलाश में भटकते रहे, लेकिन भारतीय कूटनीति और नार्वेजियन नोबेल कमेटी ने मोगेंबो को खुश होने का मौका ही नहीं दिया। टैरिफ की आड़ में ट्रंप भारत के पीछे ऐसे पड़े रहे, जैसे कुत्तों के पीछे दिल्ली कोर्ट। ऑपरेशन सिंदूर और एशिया कप के दौरान पाकिस्तान को जमकर कूटा गया – कूटनीति का यह मल्टी-स्टारर सीन था, जिसमें संवाद कम और संदेश ज़्यादा था।

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रोमांस और नीला ड्रम

रोमांस और थ्रिलर ने भी दर्शकों को निराश नहीं किया। समधी-समधन, चाची-भतीजा और सास-दामाद की भागम भाग प्रेमकथाएँ ट्रेंड में रहीं। शादीशुदा पुरुषों के जीवन में राहु-केतु साथ-साथ गोचर करते दिखे। वो के चक्कर में नीला ड्रम, हॉरर हनीमून, सूटकेस कांड और हसीन दिलरूबा टाइप घटनाओं ने सस्पेंस को चरम पर पहुँचा दिया। हसीन दिलरूबा के कातिलाना अंदाज ने नवविवाहिता को दुल्हन कम संदिग्ध पात्र ज्यादा बना दिया।

मीडिया एवं सोशल मीडिया सनसनी

तैमूर के घर उसके अब्बा जान छोटे नवाब पर चाकू से हमला किया गया। मीडिया ने सबसे तेज़ बनने की होड़ में वीरू पाजी को वास्तविक देहांत से एक पखवाड़ा पूर्व ही श्रद्धांजलि दे दी। सोशल मीडिया पर भारतीय धुरंधर से अधिक पाकिस्तानी डकैत ने अधिक लोकप्रियता हासिल की। अपने सैयारा के लिए युवा वर्ग सिनेमाघरों में सिसकियां लेते दिखें, जबकि पाँच पत्नियों के चक्कर में फंसा कपिल शर्मा अगले साल तक यही सोचता रहेगा कि किस-किस को प्यार करूं! दूसरी ओर कपिल शर्मा के शो में हँसी की बौछार कम और उसके कैफे पर गोलियों की बौछार ज़्यादा चर्चा में रही।

खेल, चुनाव और क्षेत्रीय संगीत

आईपीएल में बैंग्लुरु की जीत के जश्न में फैंस ने कुर्बानी तक दे डाली। एसआईआर के पश्चात बिहार चुनाव में प्लस माइनस का खेला देखने को मिला। पुराने प्रत्याशियों का टिकट और पुराने अवैध वोटर का नाम कटा, तो नये प्रत्याशी को टिकट एवं मतदाता सूची में नये वोटर का नाम जुड़ा। फाइनली सुशासन की रीलांचिंग हुई, हालांकि इस दौरान मछली पालन नौटंकी, टिकट कटवा ड्रामा, जूत्तम पैजार और गाली-गलौज के चुनावी मैटेरियल ने मतदाताओं का भरपूर मनोरंजन किया। सबसे बड़ी बात कि दमदार गीत और गायकी से बिहार के क्षेत्रीय गायकों ने चुनाव प्रचार में अतुलनीय योगदान दिया। यह और बात है कि इनके गीत का केंद्र ढोढी (नाभि), होठ की बजाय राजनीतिक पार्टी और जाति विशेष रहा।

अंतिम दृश्य: गो इंडिया से इंडि गो क्राइसिस

हवाई चप्पल वालों की हवाई यात्रा का स्वप्न भले ही पूरा ना हुआ हो, लेकिन इंडिगो क्राइसिस ने टाई पहनने वालों को भी हलकान कर दिया। इस वर्ष के अंत में इंडिगो ने यात्रियों के गो पर इंड लगाने में कोई कसर नहीं छोड़ा। वर्ष 2025 में भी नाम बदलो, भाग्य बदलो अभियान जारी रहा। राज भवन से लोक भवन, पीएमओ से सेवा तीर्थ, मनरेगा से जी राम जी – नाम बदलते रहे। डॉलर के मुकाबले रुपया भी नेताओं के चारित्रिक प्रभाव का अनुसरण करता दिखा और गिरने में मौद्रिक महारत हासिल की।

बाढ़, चुनाव और अपराध का सीजन समय पर आया।

विनोद कुमार विक्की
विनोद कुमार विक्की

दिवालिया वर्ष में दिवाली को यूनेस्को की विश्व धरोहर में स्थान मिला। भारत में पाकिस्तानी रहमान डकैत का डांस एवं हिजाब प्रकरण के कारण पाकिस्तान में भारतीय सुशासन बाबू सुर्खियों में बने रहें। कुल मिलाकर, 2025 ने साबित कर दिया कि भारत में मनोरंजन के लिए सिनेमा हॉल की ज़रूरत नहीं – खबरें ही क़ाफी हैं। धुरंधर वर्ष 2025 के इस व्यंग्य पोस्ट-मार्टम को यहीं समाप्त किया जाता है, क्योंकि नववर्ष 2026 का लाइव टेलीकास्ट अब बस शुरू होने वाला है।

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