मोक्ष के मार्ग में सम्यक ज्ञान, दर्शन, चारित्र हैं मुख्य अंग : सुमंगलप्रभाजी

हैदराबाद, मोक्ष मार्ग को प्राप्त करने के लिए सम्यक ज्ञान, दर्शन, चारित्र और तप को मुख्य अंग बताया गया है। उक्त उद्गार सिकंदराबाद मारुति विधि जैन स्थानक में श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ सिकंदराबाद द्वारा आयोजित चातुर्मासिक धर्मसभा को संबोधित करते हुए पूज्य साध्वी डॉ. सुमंगलप्रभाजी म.सा. ने दिये। पूज्यश्री ने कहा कि उत्तराध्ययन 26वां अध्ययन है समाचारी। यह धर्म आचरण का पावन पथ है।

तीर्थंकरों द्वारा कहा गया तथा शिष्ट जनों द्वारा आचरण किया गया क्रिया कलाप समाचारी है। इस अध्ययन में साधु की दस समाचारी आती है जिनका पालन संयम के दौरान किया जाता है। म.सा. ने कहा कि जो आराधक अनुशासन की अवहेलना करता है वह जीवन को महान नहीं बना सकता है। म.सा. ने कहा कि उत्तराध्ययन के 28वें अध्ययन में मोक्ष मार्ग के लिए चार अंग सम्यक ज्ञान, सम्यक दर्शन, सम्यक चारित्र और तप बताये गये हैं। मोक्ष मार्ग के लिए इन चार अंगों का पालन आवश्यक है। इनके बिना मोक्ष नहीं प्राप्त होता है।

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धर्म सभा का संचालन करते हुए संघ के अभिषेक अलिजार ने बताया कि 5 घंटे का जाप सुचारू रूप से चल रहा है। अध्यक्ष गौतमचंद गुगलिया ने बताया कि 8.30 बजे से 9.30 बजे तक उत्तराध्ययन सूत्र वाचन हुआ, उसके पश्चात विवेचना की गई। प्रतिदिन लाभार्थी परिवार द्वारा अल्पाहार की व्यवस्था रखी जा रही है। आज के लाभार्थी पारसमल, ताराचंद, प्रवीण कुमार अलिजार परिवार एवं भंवरलाल, रोशनलाल, विमल पितलिया परिवार रहे। महामंत्री सुरेन्द्र कटारिया ने बताया कि वंदना मासखमन में अनेक श्रद्धालुओं ने भाग लिया।

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