सेंट फ्रांसिस : एआई और डिजिटल शिक्षा पर विशेषज्ञों ने साझा किए विचार
हैदराबाद, सेंट फ्रांसिस कॉलेज फॉर वूमेन, बेगमपेट, हैदराबाद के आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (आईक्यूएसी) द्वारा रजत जयंती के उपलक्ष्य में, आज सेंट फ्रांसिस कॉलेज फॉर वूमेन में अनुपालन से उत्कृष्टता की ओर : गुणवत्ता की यात्रा की नई सोच विषय पर राष्ट्रीय सेमिनार आयोजित किया।




यहाँ जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, इस हाइब्रिड सेमिनार ने जाने-माने शिक्षा विदों, शिक्षा प्रशासकों, उद्योग विशेषज्ञों और गुणवत्ता विशेषज्ञों को एक मंच पर लाकर संस्थानों के बीच सहयोगात्मक शिक्षण व ज्ञान के आदान-प्रदान का अवसर प्रदान किया। उद्घाटन सत्र की शोभा मुख्य अतिथि अध्यक्ष, तेलंगाना उच्च शिक्षा परिषद प्रो. वी. बालकिस्ता रेड्डी और विशिष्ट अतिथि महासचिव, ज़ेवियर बोर्ड ऑ़फ हायर एजुकेशन इन इंडिया डॉ. सिस्टर दीप्ति ने बढ़ाई।
1959 से 3500 छात्रों तक कॉलेज की विकास यात्रा साझा
सभा को संबोधित करते हुए प्राचार्या प्रो. टी. उमा जोसेफ ने सेंट फ्रांसिस कॉलेज में आईक्यूएसी की 25 वर्षों की यात्रा पर प्रकाश डाला। प्रो. जोसेफ ने बताया कि कैसे 1959 में 15 छात्रों के साथ अपनी शुरुआत से लेकर 3500 छात्रों की वर्तमान संख्या तक कॉलेज ने गुणवत्ता बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास किए हैं। उन्होंने आईक्यूएसी की अपनी स्थापना के समय से ही अकादमिक अनुसंधान और सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों में कॉलेज की उपलब्धियों व मील के पत्थरों को बारीकी से दस्तावेज़ित करने के लिए सराहना की और साथ ही निरंतर गुणवत्ता वृद्धि के लिए मानक स्थापित किए। उन्होंने आईक्यूएसी के सभी पूर्व और वर्तमान समन्वयकों के प्रति अपनी गहरी कृतज्ञता व्यक्त की।
मुख्य अतिथि प्रो. वी. बालकिस्ता रेड्डी ने समन्वयकों को बधाई दी कि उन्होंने समकालीन उच्च शिक्षा में चर्चा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रासंगिक विषय का चयन किया है। उन्होंने कहा कि वैश्वीकरण के इस दौर में, जहाँ प्रतिस्पर्धा अपरिहार्य है, शिक्षकों के लिए यह ज़रूरी है कि वे खुद को अपडेट करें, अन्यथा वे पीछे रह जाएँगे। उन्होंने पाठ्यक्रम सुधारों, कौशल-आधारित शिक्षा और भविष्य-उन्मुखी दृष्टिकोण का आह्वान किया, जो विकसित भारत और तेलंगाना राइजिंग के विज़न के अनुरूप हो।
शिक्षा में समानता, गुणवत्ता और पहुँच पर दिया जोर
प्रो. रेड्डी ने टीजीसीएचई के समावेशी विकास के विज़न को साझा किया, जिसमें शिक्षा में सामर्थ्य, पहुँच, गुणवत्ता, समानता और समावेशिता पर विशेष ज़ोर दिया गया है। उन्होंने विभिन्न संस्थानों से आए प्रतिभागियों को सलाह दी कि वे भविष्योन्मुखी शिक्षा प्रणाली विकसित करने के लिए, ज़मीनी स्तर के दृष्टिकोण और हितधारकों को शामिल करते हुए अपने पाठ्यक्रम व उपलब्ध कराए जा रहे कोर्सों को अद्यतन करें।
विशिष्ट अतिथि डॉ. सिस्टर दीप्ति ने पारंपरिक शिक्षा मॉडलों से हटकर कौशल-उन्मुखी और एआई-एकीकृत शिक्षण की ओर हो रहे बदलाव पर ज़ोर दिया। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि शिक्षकों में बदलाव से छात्रों में बदलाव आता है, जिससे आगे चलकर संस्थान उत्कृष्टता की ओर बढ़ता है। उन्होंने ज़ेवियर बोर्ड के संस्थानों के नेटवर्क में मूल्यों, आस्था, नेतृत्व और सहयोगात्मक शिक्षा पर दिए जाने वाले विशेष ध्यान को रेखांकित किया।
आईक्यूएसी के 25 साल पूरे होने और एनएएसी के चार सफल प्रत्यायन चक्रों के अवसर पर संस्थान ने अपने आईक्यूएसी समन्वयकों के समर्पण और कॉलेज को निरंतर उत्कृष्टता की ओर ले जाने में उनकी अहम भूमिका को सराहा व उन्हें सम्मानित किया। सम्मानित किए गए समन्वयकों में माया रामकृष्ण, के. गिरिजा, प्रो. टी. उमा जोसेफ, डॉ. सविता सुकुमार और डॉ. पी. रोज़लीन शामिल थीं।
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देशभर की श्रेष्ठ कार्यप्रणालियाँ स्मारिका में संकलित
इस सत्र में सेमिनार स्मारिका का विमोचन किया गया, जिसमें देश भर के विभिन्न संस्थानों की सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों को संकलित किया गया था, यह स्मारिका साझा शिक्षा के लिए संसाधन के रूप में काम करेगी। सेमिनार के पहले सत्र उच्च शिक्षा में एआई उपकरण और डिजिटल परिपक्वता : एक अकादमिक दृष्टिकोण में आईटी, नेटवर्किंग और एआई संकाय के पंकज भगत ने बताया कि एआई को शिक्षण और सीखने की प्रक्रियाओं में प्रभावी ढंग से कैसे एकीकृत किया जा सकता है, ताकि शिक्षकों और छात्रों, दोनों को लाभ हो।
उन्होंने अकादमिक वातावरण में एआई का लाभ उठाने के लिए व्यावहारिक उपकरणों और दृष्टिकोणों का प्रदर्शन किया। उन्होंने संकाय सदस्यों से आग्रह किया कि वे छात्रों को केवल नौकरी चाहने वाला बनाने के बजाय, उन्हें सृजनकर्ता बनने के लिए प्रेरित करें, इसके लिए उन्होंने अपना विचार प्रस्तुत किया, नौकरियों के लिए आवेदन करना बंद करें, एआई का अनुप्रयोग करना शुरू करें।
उस्मानिया विश्वविद्यालय के वाणिज्य विभाग के प्रो. ए. पैट्रिक ने उच्च शिक्षा में समावेशी उत्कृष्टता की अवधारणा पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने शिक्षार्थी के साथ जुड़ाव स्थापित करने के महत्व पर ज़ोर दिया, इसके लिए उन्होंने मातृभाषा में संवाद करने, ग्रामीण शिक्षा सुविधाओं में सुधार करने, लैंगिक पूर्वाग्रह तथा आर्थिक कठिनाइयों जैसी बाधाओं को दूर करने के उपायों का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि अस्थायी सहायता प्रदान करने के बजाय, संस्थानों को लचीली शिक्षण पद्धतियों और विविध दृष्टिकोणों को अपनाते हुए समावेशिता सुनिश्चित करने के लिए अपनी प्रणालियों को पुनर्गठित करना चाहिए। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि बौद्धिक प्रदर्शन के लिए मनोवैज्ञानिक सुरक्षा अनिवार्य शर्त है और शिक्षकों की यह अहम ज़िम्मेदारी है कि वे कक्षाओं में सुरक्षित और समावेशी वातावरण का निर्माण करें।
एनईपी के अनुरूप इंटर्नशिप व रिसर्च संस्कृति पर चर्चा
तीसरे सत्र में सेंट फ्रांसिस कॉलेज फॉर वूमेन की प्रिंसिपल प्रो. टी. उमा जोसेफ ने इंस्टीट्यूशन की एक्सपीरिएंशियल लर्निंग और बेस्ट प्रैक्टिस के बारे में बात की। इंस्टीट्यूशनल ग्रोथ पर ज़ोर देते हुए उन्होंने एकैडमिक प्रोग्राम के विस्तार, फैकल्टी एक्सचेंज इनिशिएटिव, ग्लोबल कोलैबोरेशन के ज़रिए विदेश में पढ़ाई के मौकों और बड़े ऑर्गनाइज़ेशन के साथ एमओयू पर बात की। उन्होंने इंटर्नशिप व रिसर्च कल्चर के ज़रिए नेशनल एजुकेशन पॉलिसी के साथ अलाइन्ड करिकुलर और को-करिकुलर एक्सीलेंस पर फोकस करने पर ज़ोर दिया।
साथ ही कॉलेज की मज़बूत सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी इनिशिएटिव, जिसमें कम्युनिटी एंगेजमेंट और विलेज एडॉप्शन शामिल हैं, पर ज़ोर दिया, जिससे इंटेलेक्चुअली काबिल, नैतिक रूप से ईमानदार, सोशली कमिटेड, इमोशनली स्टेबल, स्पिरिचुअली इंस्पायर्ड और देशभक्त नागरिकों को तैयार करने के इसके मिशन को फिर से पक्का किया गया। सस्टेनेबल क्वालिटी ईकोसिस्टम और ग्लोबल बेंचमार्किंग पर पैनल चर्चा ने सेमिनार को और बेहतर बनाया, जिससे हायर एजुकेशन में लॉन्ग-टर्म क्वालिटी स्ट्रेटेजी और ग्लोबल स्टैंडर्ड पर बातचीत को बढ़ावा मिला।
अलग-अलग इंस्टीट्यूशन के प्रतिनिधियों ने सस्टेनेबल ग्रोथ पक्का करने और क्वालिटी एजुकेशन को बढ़ावा देने के लिए अपनाई गई बेस्ट प्रैक्टिस शेयर कीं। सेमिनार विदाई समारोह के साथ संपन्न हुआ।
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