तमिलनाडु : थलपति विजय की क्वांटम लीप

क्वांटम लीप वैज्ञानिक शब्दावली का टर्म है, लेकिन यदि भारतवर्ष की बीती अर्द्धशती की राजनीति का सिंहावलोकन करें तो इस टर्म को दक्षिण भारत की राजनीति के सन्दर्भ में बाखूबी प्रयुक्त किया जा सकता है। दक्षिण भारत के मतदाताओं में सिने-कलाकारों के प्रति गजब का क्रेज है और वहां लंबी नीहारिका है, जिसने राजनीति में चमकीली सफलता अर्जित की। एनटी रामाराव, एमजी रामचंद्रन, जयललिता, करूणानिधि और पवन कल्याण की फेहरिस्त में अब एक नया नाम आ जुड़ा है। यह नाम है विजय थलपति का, जो सिने-स्टारडम से लंबी छलांग लगाकर तमिलनाडु जैसे महत्वपूर्ण प्रांत के मुख्यमंत्री की कुर्सी तक जा पहुँचे हैं।

थलपति यानि कमांडर के नाम से विख्यात विजय का पूरा नाम है जोसेफ विजय चंद्रशेखर। अगले माह 22 जून को वह अपने जीवन के बावन वर्ष पूरे कर लेंगे। उनके पिता एसए चंद्रशेखर ईसाई हैं और मां शोभा हिन्दु। यह इसी पृष्ठभूमि का प्रभाव है कि वह मंदिर भी जाते हैं और चर्च भी, साथ ही उन्हें मस्जिद और दरगाह जाने में कोई संकोच नहीं होता। तमिल-सिनेमा से उनका नाता इस नाते पुराना है कि उनके पिता सिने निर्देशक रहे हैं और कांग्रेस के प्रति उनकी रूझान रही है।

चेन्नै से लोयोला कॉलेज तक का सफर

चेन्नै में जनमे विजय की पढ़ाई भी स्थानीय लोयोला कॉलेज में हुई और उन्होंने शुरूआती डेढ़ दो दशक तक अपना ध्यान पूरी तौर पर फिल्मों पर केंद्रित किया। इसके बाद वह सार्वजनिक जीवन की ओर मुड़े और फैन क्लबों के जरिये उन्होंने सधे हुये कदमों से वह यात्रा शुरू की, जिसकी परिणति चार मई, 26 को उनकी आशातीत राजनीतिक सफलता और उपलब्धि में हुई।थलपति विजय आज तमिल सिनेमा की सफलतम और शीर्षस्थ कमाऊ सितारों की सूची में शुमार हैं।

वह अब तक 69 फिल्मों में लीड-भूमिकाओं में आ चुके हैं और फिल्म में उनकी मौजूदगी टिकट खिड़की पर सफलता की गारंटी मानी जाती है। यदि उनके जीवन-वृत्त को खंगालें तो दिलचस्प तौर पर पिता के प्रोत्साहन और प्रेरणा पर उन्होंने अपना सिनेमाई सफर सन 1984 में तमिल फिल्म वेट्री में बाल कलाकार के तौर पर किया। पिता द्वारा निर्देशित कुछ फिल्मों में बाल भूमिकाएं निभाने के उपरांत 18 वर्ष की वय में 1992 में उन्हें नालैया थीर्पु में नायक की भूमिका निभाने का मौका मिला।

तदंतर पूर्व उनक्कगा, लव टुडे, कडलुक्कू मरियाधई, थुल्लथ, मानामम थुल्लम, कुशी, प्रियम्मनावले और फ्रेंड्स आदि ने एक दशक में उन्हें तमिल सिने उद्योग में शिखर पर पहुंचा दिया। इसके बाद के ढाई दशक रूपहले पर्दे पर उनकी धूम की दहाई थी। वह तमिल सिने दर्शकों की पहली पसन्द बनकर उभरे। अंतत: सन 2024 में उन्होंने सिनेमा को सायोनारा कह दिया और राजनीति उनका पहला प्रेम बनकर उभरी। दिलचस्प बात है कि इसी साल आई उनकी फिल्म का टाईटिल था ग्रेटेस्ट आफ आल टाइम। मगर उनकी अंतिम फिल्म जन नायगान का रिलीज होना अभी शेष है।

फरवरी 2024 में टीवीके पार्टी का गठन

फरवरी, सन 2024 में विजय ने अपनी नयी पार्टी लाँच की। द्रविड़ पार्टियों के वर्चस्व की अर्द्धशती के परिप्रेक्ष्य में यह एक साहसिक कदम था, लेकिन यह साहस उन्हें फला। नयी पार्टी का उन्होंने नाम रखा तमिलगा वेट्री कझगम। बताते हैं कि वह विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के साथ गठबंधन के इच्छुक थे। इसके वास्ते उन्होंने राहुल गांधी से भेंट व चर्चा भी की थी, लेकिन द्रमुक से जारी गठबंधन और स्थानीय ईकाई के परामर्श से वह ऐसा करने से हिचक गये। फलत: कांग्रेस और टीवीके मेल सिरे नहीं चढ़ा।

यह सोचना भ्रामक होगा कि थलपति की सियासी सफलता दो वर्ष की सक्रियता का नतीजा है। इसके पीछे बिलाशक उनके फैन क्लबों की गतिविधियों का हाथ है। थलपति ने सन 2009 में अपने फैन क्लब विजय मक्काल इयक्कम की नींव डाली थी। समय के साथ ये फैन क्लब समूचे तमिलनाडु में ओरछोर फैल गये। इन क्लबों ने राहत कार्यों, शिक्षण, प्रशिक्षण और चैरिटी का काम हाथ में लिया। इसने उनकी सिनेमाई छवि में हातिमताई के रंगे भरे।

आपदा पीड़ितों के लिये दरवाजे और थैलियां खोलने ने जननायक की संवदेनशील छवि अर्जित करने में मदद की। इसके बावजूद जब-तब उनकी सियासत में रूचि और रूझान सामने आती रही। सन 2011 के चुनाव में उन्होंने अन्नाद्रमुक-नीत गठबंधन को समर्थन दिया। सन 2019 में उन्होंने नागरिकता अधिनियम का यह कहकर विरोध किया कि इससे सामाजिक-धार्मिक सौमनस्यता पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा। सन 2022 में उनके फैन क्लब के सदस्यों ने निकाय चुनावों में शिरकत की और 115 सीटों पर सफलता पाई। उनकी बढ़ती लोकप्रियता प्रमाण 27 सितंबर, 2025 को करूर में तब मिला, जब उनकी रैली में भगदड़ से 41 लोगों की जानें गयीं। इस पर उन्होंने शोक संवेदना व्यक्त की और हताहतों के लिये धनराशि वितरित की।

85,000 फैन क्लबों की मजबूत चुनावी ताकत

थलपति विजय की खूबी है कि उन्होंने करीब 85000 फैन क्लबों की मजबूत चुनावी मशीनरी में बदल दिया है। ये क्लब उन्हें कार्यकर्ता, चुनावी भीड़ और समर्थक तो जुटाते ही हैं, उनकी नायक की छवि में निर्मित करते हैं। जब वह भ्रष्टाचार मुक्त राजनीति की बात करते हैं तो यह छवि उसमें सहायक होती है। उनकी यह इमेज़ दक्षिण भारतीय मतदाताओं की सितारों के प्रति नैसर्गिक चाहत को पोसती है। मान सकते हैं कि सन 2011 में जयललिता को समर्थन की परिणति ने उनके मन में सियासत में शिरकत का बिरवा रोपा था।

बहरहाल, ताजा चुनाव में टीवीके की 108 सीटों पर कामयाबी से वह नया इतिहास रचने में सफल रहे हैं। उन्होंने स्वयं दो सीटों पेरांबूर और त्रिची ईस्ट से चुनाव लड़ा और विजयी रहे। यह भी तय है कि बहुमत से कुछ सीटों का फासला पूरने में वह सफल होंगे। तयशुदा है कि दोनों लेफ्ट पार्टियां भी उन्हें समर्थन देंगी। नतीजों के बाद वह राजभवन जाकर सरकार बनाने का दावा जता चुके हैं।

कांग्रेस ने समर्थन के साथ यह शर्त जरूर नत्थी की है कि विजय सांप्रदायिक ताकतों से दूरी बरतेंगे, संवैधानिक मूल्यों का पालन करेंगे, थंथाई पेरियार के सामाजिक आदर्शों के प्रति प्रतिबद्धता रखेगें और पेरूंथ लैवर कामराज के गौरवशाली दिनों की वापसी के लिये जतन करेंगे। जहां तक विजय के विचारों की बात है वह स्पष्ट कर चुके हैं कि द्रमुक उनकी राजनीतिक बैरी है और बीजेपी वैचारिक शत्रु।

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लोकलुभावन घोषणाएँ और वित्तीय चुनौतियाँ

चुनाव प्रचार के दरम्यान उन्होंने इतनी अधिक लोकलुभावन घोषणायें की हैं कि वित्तीय कारणों से उन्हें अमल में लाना कठिन होगा। तमिल मतदाताओं को उनसे उम्मीद इस नाते है कि वह फैन क्लबों के जरिये मुफ्त कैंटीन, कंप्यूटर वितरण, ब्लड डोनेशन और राहत कार्यों का अभियान चलाते रहे हैं। मीडिया की चकाचौंध से बचने के लिये बाज वक्त वह रूमाल से चेहरा ढंककर अथवा दुपहिया वाहन पर बैठकर घटना स्थल पर गये। वह राहुल गांधी ही नहीं अन्ना हजारे और नरेन्द्र मोदी से भी मिल चुके हैं। वह करूणानिधि और एमजीआर के प्रशंसक हैं।

सामाजिक न्याय उनके लिए मायने रखता है। कम ही लोगों को ज्ञात होगा कि वह कुशल और पुरस्कृत गायक हैं और इलैयाराजा और एआर रहमान तक के लिए गा चुके हैं। हां, उनका निजी जीवन विवाद और नुक्ताची का शिकर रहा है। उन्होंने सन 1999 में संगीता सोर्नालिंगम से शादी की थी, जो श्रीलंका में जनमी ब्रिटिश तमिल युवती थीं।

डॉ. सुधीर सक्सेना
डॉ. सुधीर सक्सेना

संगीता ने गत वर्ष उनसे तलाक की अर्जी लगाई है, अलबत्ता उनकी दोनों संतानों से उनके रिश्तों को इससे बूझा जा सकता है कि उनका पुत्र जेसन संजय और पुत्री दिव्या साशा उनके साथ क्रमशः वेट्टेकरन और थेरी में रुपहले पर्दे पर आ चुके हैं।? 6.25 बिलियन संपत्ति के स्वामी थलपति विजय का तृषा कृष्णन के साथ प्रेम प्रसंग संप्रति लोगों की जुबान पर है, लेकिन आज की राजनीति में नायकों के प्रेम-प्रसंग और विवाहेतर संबंध समर्थकों और प्रशंसकों के लिये मायने नहीं रखते, अत: थलपति का पर्फामेन्स ही तय करेगा कि वह राजनीति में कितनी लंबी और कैसी पारी खेलते हैं?

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