तेलंगाना इंटरमीडिएट शिक्षा विभाग ने लांच की टी-स्टेम पहल
हैदराबाद, तेलंगाना इंटरमीडिएट शिक्षा विभाग द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए टी-स्टेम (तेलंगाना साइंस टेक्नोलॉजी एंड इंजीनियरिंग फैसिलिटीज मैप) पहल को लांच किया गया। सेंटर फॉर गुड गवर्नेंस द्वारा विकसित यह डिजिटल प्लेटफार्म सरकारी जूनियर कॉलेजों सहित अन्य शैक्षणिक संस्थानों में व्यावसायिक प्रयोगशालाओं के बुनियादी ढाँचे के उपयोग का मानचित्रण और अनुकूलन करने के लिए डिजाइन किया गया है।
जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, इस डिजिटल प्लेटफार्म का एक ट्रायल रन गत 23 अक्तूबर को आयोजित किया गया था। चार जूनियर शिक्षण संस्थानों के दस छात्रों ने सहयोगी कॉलेजों में आयोजित व्यावहारिक सत्रों में भाग लिया। गोकाराजू रंगाराजू इंजीनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी संस्थान, सरकारी पॉलिटेक्निक मासाब टैंक, गुरु नानक इंजीनियरिंग कॉलेज तथा जी. नारायणम्मा प्रौद्योगिकी एवं विज्ञान संस्थान स्थित सरकारी चमड़ा प्रौद्योगिकी संस्थान का नाम इसमें शामिल रहा।
प्लेटफार्म की कार्यक्षमता को प्रमाणित करने वाले सफल परीक्षण के साथ टी-स्टेम पहल अब पूरे तेलंगाना में विस्तार के लिए तैयार है। यह बुनियादी ढाँचे की कमियों को पाटने, व्यावसायिक प्रशिक्षण को उद्योग की जरूरतों के अनुरूप बनाने और नवाचार एवं सहयोग की संस्कृति को बढ़ावा देने में सहायक सिद्ध होगा। टी-एसटीईएम पोर्टल 22 व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के लिए प्रयोगशालाओं के बुनियादी ढाँचे का डिजिटल मानचित्रण करने में सक्षम बनाएगा।
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शिक्षा में संसाधन साझा करने की नई पहल
यह जीजेसी, डिग्री कॉलेजों, पॉलिटेक्निक और विश्वविद्यालयों के बीच संसाधन साझा करने की सुविधा प्रदान करते हुए अंतर-संस्थागत प्रयोगशाला उपयोग के लिए स्लॉट बुकिंग और अनुमोदन कार्यप्रवाह प्रदान करेगा। शिक्षा विभाग की सचिव डॉ. योगिता राणा ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे क्रॉस-लर्निंग और संसाधन अनुकूलन की एक नई शुरुआत बताया। उन्होंने कहा कि किसी भी छात्र को स्कूल से लेकर स्नातक स्तर तक व्यावहारिक ज्ञान से वंचित नहीं रहना चाहिए।
इस कड़ी में टी-स्टेम केवल एक डिजिटल बुनियादी ढाँचा नहीं है, बल्कि अनुभवात्मक शिक्षा के लिए स्थायी, सहयोगात्मक पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण की दिशा में दूरदर्शी तथा महत्वाकांक्षी कदम है। इंटरमीडिएट शिक्षा निदेशक कृष्ण आदित्य ने कहा कि टी-स्टेम के तहत हम केवल डिजिटल रूप से बुनियादी ढाँचे का प्रबंधन नहीं कर रहे, अपितु स्थायी पारिस्थितिकी तंत्र बना रहे हैं, जहाँ राज्य के छात्र व्यावहारिक ज्ञान के साथ सहजता से जुड़कर अकादमिक उत्कृष्टता प्राप्त कर सकें।
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