राज्यसभा में दिखाई देंगे कमल हासन
सन् 2024 के चुनाव में उन्होंने डीएमके से हाथ मिला लिये। उनके समर्थन के एवज में स्टालिन ने तभी घोषणा कर दी थी कि उनकी पार्टी कृतज्ञता स्वरूप कमल हासन को राज्यसभा में भेजेगी। स्टालिन ने वायदा निभाया और छह जून को उनकी उपस्थिति में कमल ने पर्चा दाखिल कर दिया। अब 19 जून को चुनाव की रस्म अदायगी के बाद कमल हासन राज्यसभा में दिखाई देंगे।
कमल हासन सिने-संसार की विलक्षण शख्सियत हैं। उनके व्यक्तित्व में अनेक व्यक्तित्वों का समावेश है। प्रतिभा के समुच्चय का यूं पर्याय हैं कमल हासन कि उनके बखान के लिए मणिकांचन योग की संज्ञा नाकाफी है। 7 नवंबर, 1954 को परमकुड़ी, मद्रास (अब चेन्नै) में जन्मे कमल अभिनेता, राजनीतिज्ञ, पटकथा लेखक, फिल्म निर्माता-निर्देशक, गीतकार, पार्श्वगायक और कोरियाग्राफर हैं। वह राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और फिल्म फेयर पुरस्कार सहित अनेक प्रतिष्ठित पुरस्कार विजेताओं के तौर पर जाने जाते हैं।
कमल हासन की अभिनय यात्रा और लोकप्रियता
सर्वश्रेष्ठ विदेशी भाषा फिल्म के लिए अकादमी पुरस्कार विजेता में भारत द्वारा प्रस्तुत सर्वाधिक फिल्मों वाले अभिनेता का श्रेय उन्हें प्राप्त है। उनकी फिल्म निर्माण कंपनी राजकमल इंटरनेशनल ने अनेक सफल और उत्कृष्ट फिल्मों का निर्माण किया है। स्वयं कमल हासन अभिनय और निर्देशन की दुनिया की अलीक शख्सियत हैं। वह चुनौतीपूर्ण भूमिकाएं स्वीकार करते हैं और कुछ अलग हटकर करने की कोशिश करते हैं।
इसी कोशिश में उनकी सफलता और लोकप्रियता का राज छिपा है। उनके अभिनय का फलक बड़ा है। अभिनय की उनकी रेंज आश्चर्यचकित करती है। हिन्दी और तमिल सिने-उद्योग में उनका नाम सफलता की गारंटी माना जाता है। हिन्दी संसार में उनके प्रशंसकों का बड़ा वर्ग है और इसकी तादाद बॉक्स ऑफिस पर उनके द्वारा निर्मित या अभिनीत फिल्मों की सफलता सुनिश्चित करती है।
यह ाढम सन् 1981 में प्रदर्शित के बालाचंदर की एक दूजे के लिए से प्रारंभ हुआ था और सदमा, चाची 420, सागर, गिरफ्तार, पुष्पक, अप्पू राजा, हिन्दुस्तानी, हे राम आदि के जरिये परवान चढ़ा। उनके पुरस्कारों की फेहरिस्त वजनी और लंबी है। उनकी भूमिकाएं अविस्मरणीय हैं और मानस पटल पर छाप छोड़ती हैं। सदमा, पुष्पक और चाची 420 के कमल हासन को कौन भूल सकता है।
पुरस्कारों से सजी कमल की अभिनय यात्रा और विवाद
मूक फिल्म पुष्पक उनकी बेमिसाल अदाकारी का प्रमाण है और चाची 420 दिलचस्प प्रस्तुति। वह अप्पू राजा भी बन सकते हैं और सागर के असफल प्रेमी भी। सागर में अपने अभिनय से वह दो पुरस्कार जीतते हैं। मणिरत्नम की गॉडफादरनुमा फिल्म नायकन (1987) में उनके अभिनय को व्यापक सराहना मिली और इसे टाइम पत्रिका ने सार्वकालिक सर्वश्रेष्ठ फिल्मों में शुमार किया। पद्मश्री से विभूषित कमल हासन भारतीय सिने उद्योग के सर्वाधिक सम्मानित कलाकार है।
सर्वाधिक चार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार, तीन सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार तथा एक सर्वश्रेष्ठ बाल कलाकार पुरस्कार उनकी उपलब्धियों के खाते में दर्ज है। वह अब तक पांच भाषाओं में रिकार्ड 19 फिल्म फेयर पुरस्कार जीत चुके हैं। उन्हें तमिलनाडु राज्य फिल्म पुरस्कार, नंदी पुरस्कार और विजय पुरस्कार तो मिला ही दशावतारम ने उनकी झोली में एक साथ चार पुरस्कार डाले। स्थिति ऐसी बनी कि उन्होंने उन्हें पुरस्कारों से दूर रखने की सर्वाधिक अपील की।
सन् 1960 में तमिल फिल्म कलतूर कन्नम्मा में बहैसियत बाल कलाकार अभिनय-जीवन की शुरूआत करने वाले कमल हासन इन दिनों सुर्खियों में हैं और जेरे बहस भी। उनकी फिल्म ठग लाइफ कर्नाटक में प्रदर्शित नहीं होगी, क्योंकि उन्होंने कन्नड़ को तमिल से उद्भूत बताकर बर्र के छत्ते में हाथ डाल दिया है। कन्नडिगे उनसे रूष्ट हैं। कर्नाटक हाईकोर्ट ने उन्हें फटकार लगाई है, लेकिन कमल हासन ने कैफियत तो दी, मगर क्षमयाचना नहीं की। उन्हें अपनी महत्वाकांक्षी फिल्म का कर्नाटक में प्रदर्शन नहीं होना तो बर्दाश्त है, लेकिन अपनी मान्यताओं पर समझौता स्वीकार्य नहीं।
कमल हासन का दर्दभरा निजी जीवन
बेतहाशा कामयाबी और अपार शोहरत के बावजूद कमल हासन का निजी जीवन पीड़ादायी रहा है। उनके दांपत्य जीवन में दरारें पड़ती रहीं। उनका निजी जीवन मिलन और बिछोह की मिश्रित गाथा है। सन् 1970 के दशक में तमिल और मलयालम की लोकप्रिय अभिनेत्री श्रीविद्या से उनका प्रेम-प्रसंग चर्चित रहा। श्रीवद्या की मृत्यु सन् 2006 में हुई। अंतिम दिनों में जब वह रोग शैय्या पर थीं, कमल उनसे मिलने भी गये थे।
बहरहाल, सन् 1978 में उन्होंने आयु में उनसे बड़ी वाणी गणपति से शादी की। वाणी कमल की फिल्मों में कॉस्टयूम डिजाइनर रहीं और शोहरत बटोरी लेकिन करीब दस वर्ष के साहचर्य के बाद सारिका से डेटिंग का पता चलने पर आहत वाणी अलग हो गयीं और दोनों के बीच संपर्क के तार भी टूट गये। सन् 1988 में कमल और सारिका परिणय-बंधन में बँध गये। उनकी दो बेटियां हैं श्रुति और अक्षरा। श्रुति सफल गायिका और अभिनेत्री हैं।
सारिका भी वाणी की भांति कमल की कॉस्टयूम डिजाइनर रही और हे राम में उससे बड़ी प्रशंसा मिली। लेकिन सन् 2004 में इस जोड़ी में भी तलाक हो गया। इस अलगाव की वजह रही 22 साल छोटी नायिका सिमरन बग्गा से कमल की अंतरंगता। मगर यह रिश्ता ज्यादा खिंचा नहीं और कमल सन् 80 और सन् 90 के दशक की रूपहले पर्दे की अपनी नायिका गौतमी के साथ रहने लगे। कमल ने स्तन कैंसर से ग्रस्त गौतमी का साथ निभाया। संप्रति, श्रुति और अक्षरा तथा गौतमी की बिटिया सुब्बलक्ष्मी कमल के साथ एक छत तले रहती हैं।
राजनीति में कमल हासन की अब तक की यात्रा
आपको हैरत होगी अगर कहा जाये कि कमल का यह परिचय अधूरा है। अधूरा इस नाते कि वह बतौर खिलाड़ी राजनीति के मैदान में भी उतर चुके हैं। 21 फरवरी, 2018 को उन्होंने मदुरै में मक्कल निधि मैयम (एमएनएम) नामक पार्टी की स्थापना की। इस पार्टी के झंडे में प्रतीकस्वरूप परस्पर आबद्ध छह हाथ हैं, जो दक्षिण भारत के पुदुच्चेरि समेत छह राज्यों को दर्शाते हैं। इस पार्टी के महासचिव हैं ए.अरूणाचलम।
दिलचस्प तौर पर इस पार्टी ने लोकसभा अथवा राज्यसभा की अब तक एक भी सीट नहीं जीती है। इस पार्टी का चुनाव चिन्ह है टॉर्च। चेन्नै में अलवारपेट में इसका दफ्तर है। पार्टी ने मोबाइल व्हिसिल ब्लोअर ऐप भी जारी किया है, जिसका नाम है मैयम व्हिसिल। सन् 2019 के लोकसभा चुनाव में पार्टी ने 37 सीटों पर चुनाव लड़ा, लेकिन उसका सूपड़ा साफ हो गया। सन् 2021 में तमिलनाडु की 180 असेंबली सीटों पर चुनाव लड़ा। वह एक भी सीट नहीं जीत सकी।

स्वयं कमल भी 1728 वोटों को मामूली अंतर से हार गये। इसके बाद उपचुनाव आये तो कमल कांग्रेस से जुड़े, मगर सन् 2024 के चुनाव में उन्होंने डीएमके से हाथ मिला लिये। उनके समर्थन के एवज में स्टालिन ने तभी घोषणा कर दी थी कि उनकी पार्टी कृतज्ञता स्वरूप कमल हासन को राज्यसभा में भेजेगी। स्टालिन ने वायदा निभाया और छह जून को उनकी उपस्थिति में कमल ने पर्चा दाखिल कर दिया। अब 19 जून को चुनाव की रस्म अदायगी के बाद कमल हासन राज्यसभा में दिखाई देंगे।
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