परस्तू अहमदी : प्रतिरोध का संगीत!

खबर है कि ईरान में 27 साल की गायिका परस्तू अहमदी को जब गिरफ्तार कर लिया गया, तो उनका अपराध यह बताया गया कि उन्होंने यूट्यूब पर बिना हिजाब के ऑनलाइन कंसर्ट का अपना वीडियो प्रसारित किया था। इस वीडियो में अहमदी ने बिना आस्तीन और कॉलर के लंबी ड्रेस पहनी थी, लेकिन उन्होंने हिजाब नहीं पहना था। उनके इस कृत्य को इस तथ्य ने और अधिक संगीन बना दिया कि इस कार्पाम में अहमदी के साथ चार पुरुष संगीतकार भी थे। कहना न होगा कि यह गिरफ्तारी ईरान में महिलाओं और कलाकारों की आज़ादी पर बढ़ते दबाव को दिखाती है। यही वजह है कि परस्तू की यह कार्रवाई केवल संगीत नहीं, बल्कि एक प्रतिरोध का प्रतीक बन गई।

सयाने याद दिला रहे हैं कि ईरान में 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद हिजाब को अनिवार्य कर दिया गया था। इस तरह यह केवल पहनावा नहीं, बल्कि सरकार की विचारधारा को थोपने का एक तरीका बन गया। परस्तू अहमदी ने बिना हिजाब के प्रदर्शन करके इस व्यवस्था को चुनौती दी। उनकी गिरफ्तारी उस दौर की याद दिलाती है, जब महसा अमीनी की मौत के बाद देशभर में प्रदर्शन हुए थे। आज भी इक्का-दुक्का ही सही, ईरान में महिलाएँ अनिवार्य हिजाब के कानून के खिलाफ आवाज़ उठा रही हैं। अहमदी ने वर्चुअल मंच पर अपनी कला प्रस्तुत की, लेकिन सरकार इसे भी बर्दाश्त करने को तैयार नहीं है। इससे यह भी पता चलता है कि यह घटना दिखाती है कि सरकार आभासी मंचों पर बढ़ते विरोध से बौखला गयी।

परस्तू अहमदी की गिरफ्तारी ने दुनियाभर का ध्यान खींचा। भले ही बाद में उन्हें रिहा भी कर दिया गया हो, लेकिन यह दिखाता है कि ईरानी महिलाएँ और कलाकार किस तरह के दबाव का सामना कर रहे हैं। इस गिरफ्तारी ने ईरानवासी और प्रवासी ईरानियों में एकजुटता की भावना को बढ़ावा दिया। कलात्मक दृष्टि से भी इसका बड़ा असर है। परस्तू जैसे कलाकार आभासी मंच का उपयोग कर विरोध को एकजुट करने का काम करते हैं। उनकी गिरफ्तारी ने उनकी आवाज़ को दबाने के बजाय उसे और बड़ा बना दिया है। इससे आभासी मंच की ताकत का भी पता चलता है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस गिरफ्तारी की निंदा हो रही है तथा मानवाधिकार संगठनों और सांस्कृतिक हस्तियों ने ईरान सरकार के स्त्रा-विरोधी और दकियानूसी रवैये की आलोचना की।

गिरफ्तारी की इस घटना से सरकार की असुरक्षा स्पष्ट होती है। ऐसे कड़े कदम यह दिखाते हैं कि सरकार अपने विचारों को थोपने में अब नाकाम हो रही है। लेकिन यह रणनीति उल्टी पड़ सकती है। असंभव नहीं कि ऐसी हर गिरफ्तारी से विरोध को और मजबूती मिल जाए। ईरान में यह गिरफ्तारी सरकार की स़ाख पर और चोट करेगी। हो सकता है, महिलाएँ अब सिर्फ हिजाब कानून को ही नहीं, पितृसत्ता की पूरी संरचना को चुनौती देती दिखाई दें।

कुल मिलाकर, परस्तू अहमदी की गिरफ्तारी केवल दमन की कहानी नहीं है। यह उन लोगों की अडिग भावना का सबूत है, जो तानाशाही का विरोध करते हैं। ईरानी सरकार भले ही कुछ समय के लिए इन आवाज़ों को दबा दे, लेकिन आज़ादी की पुकार और तेज़ हो रही है। अहमदी का संगीत और उनका साहस एक ऐसा संदेश है, जो कभी चुप नहीं होगा। दुनिया को इस पर ध्यान देना चाहिए। परस्तू अहमदी को चुप कराकर सरकार ने शायद यह भूल की है कि ऐसी हर चुप्पी के पीछे कई और आवाज़ें उठती हैं। आज नहीं तो कल, इस विवादित वीडियो में कहे गए ये शब्द पुरुष-वर्चस्ववाद को चीरकर सब दिशाओं में गूँजेंगे कि-मैं परस्तू हूँ, एक लड़की, जो अपने प्रियजनों के लिए गाना चाहती है। उस देश के लिए गाना, जिसे मैं दिल से प्यार करती हूँ, यह एक ऐसा अधिकार है, जिसे मैं अनदेखा नहीं कर सकती।

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