महिला वोटर और लाडली बहना पॉलिटिक्स

बिहार विधानसभा चुनाव आगामी अक्टूबर-नवंबर में संभावित है और सभी दलों के केंद्र में महिला वोटर हैं। इस बार मुकाबला नीतीश कुमार की जदयू और भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन बनाम कांग्रेस और तेजस्वी यादव की राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेतृत्व वाले महागठबंधन (इंडिया ब्लॉक) के बीच होगा लेकिन बिहार की सत्ता उसे ही मिलेगी जिस पर महिलाओं को भरोसा होगा ।

बिहार विधानसभा चुनावों में महिलाओं की भूमिका पिछले एक दशक में निर्णायक बनकर उभरी है। 2010 से लेकर 2020 तक के चुनावों में महिला मतदाताओं की भागीदारी लगातार बढ़ी है। 2025 के आगामी चुनावों में भी उनकी भूमिका अहम मानी जा रही है। 2010 के विधानसभा चुनावों में पहली बार महिला मतदाताओं का मतदान प्रतिशत पुरुषों से ज्यादा रहा था। महिलाओं का मतदान प्रतिशत 54.85 फीसदी था जबकि पुरुषों का 50.70 फीसदी।

यह बदलाव मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की महिलाओं के लिए चलाई गई योजनाओं, जैसे साइकिल योजना और पंचायती राज में 50 फीसदी आरक्षण का परिणाम था। यह एक उल्लेखनीय उपलब्धि थी क्योंकि 2000 तक, मतदाता मतदान में लिंग अंतर लगभग 20 फीसदी था। सभी राजनीतिक दल महिलाओं को लुभाने में लगे हैं। चुनाव आयोग के द्वारा जारी किए गए आकड़ों के अनुसार, बिहार में 3.6 करोड़ महिला वोटर्स हैं।

वहीं, प्रदेश में कुल वोटरों की संख्या 7.6 करोड़ है, यानी राज्य में 4 करोड़ पुरुष वोटर हैं। बिहार चुनाव के दिन जैसे-जैसे करीब आ रहे हैं, लाडली बहना पॉलिटिक्स को लेकर चर्चा तेज होती जा रही है। महिला मतदाताओं को अपने पाले में करने के लिए राज्य सरकार महिला संवाद कार्पाम कर रही है। सरकार ने अगले दो महीनों में करीब दो करोड़ महिलाओं तक पहुंचने की योजना बनाई है। वहीं कांग्रेस पार्टी ने भी महिला की बात, कांग्रेस के साथ अभियान शुरू किया है।

महिला सशक्तिकरण के लिए कांग्रेस का बड़ा चुनाव अभियान

अखिल भारतीय महिला कांग्रेस की अध्यक्ष अलका लांबा के अनुसार इस अभियान का मकसद महिलाओं की जरूरतों, आकांक्षाओं और अपेक्षाओं को उजागर करना और उन्हें पार्टी के चुनाव घोषणापत्र में शामिल करना है। इसे लेकर कांग्रेस की महिला नेत्रियों का दौरा लगातार जारी है। इसके बाद सुप्रिया श्रीनेत, राज्यसभा सदस्य रंजीत रंजन का बिहार दौरा हो रहा है।कांग्रेस पार्टी ने बिहार की बहनों और बेटियों के लिए ऐतिहासिक पहल की है।

माई बहिन मान योजना के अंतर्गत कांग्रेस पार्टी की अगुवाई में इंडिया गठबंधन की सरकार बनने पर राज्य की पात्र बहनों और बेटियों को प्रति माह 2500 की आर्थिक सहायता सीधे उनके बैंक खातों में दी जाएगी। यह योजना न केवल आर्थिक राहत देगी बल्कि बिहार की महिलाओं को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाएगी। माई बहिन मान योजना के तहत बिहार की पात्र महिलाओं (18 से 60 वर्ष की आयु वर्ग की महिलाओं) को 2500 प्रति माह सीधे उनके बैंक खाते में मिलेगा। कांग्रेस ने हमेशा महिलाओं के सशक्तिकरण को प्राथमिकता दी है।

कांग्रेस शासित कई प्रदेशों में लाडली, गृहलक्ष्मी और इंदिरा गांधी प्यारी बहना जैसी योजनाओं के तहत महिलाओं को आर्थिक सहायता दी जा रही है। सांसद रंजीत रंजन ने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने सदैव देश की महिलाओं के अधिकार और सशक्तिकरण की सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। देश में लाडली योजना की शुरुआत सबसे पहले कांग्रेस ने की थी। दिल्ली में शीला दीक्षित सरकार ने 2008 में लाडली योजना शुरू की थी, जिसके तहत बेटी के जन्म के समय 36,000 और कक्षा 1 से 12 तक पढ़ाई के लिए 25,000 की सहायता दी जाती थी।

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महिला सहायता योजनाओं में बढ़ोतरी और कांग्रेस का अभियान

12वीं कक्षा पूरी करने पर खाते में 1 लाख का मैच्युरिटी अकाउंट सीधे जाता था। कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने गृहलक्ष्मी योजना शुरू की जिसके तहत हर महिला को प्रति माह 2000 बैंक खाते में दिया जा रहा है। इसका लाभ 1.35 करोड़ महिलाओं को मिल रहा है। हिमाचल प्रदेश में इंदिरा गांधी प्यारी बहना सुख सम्मान निधि योजना के तहत पात्र महिलाओं को प्रति माह 1500 की सहायता दी जा रही है।

झारखंड की कांग्रेस गठबंधन सरकार ने मुख्यमंत्री मईयां सम्मान योजना के अंतर्गत महिलाओं को प्रति माह 2500 की वार्षिक सहायता देना शुरू किया है। पहले यह 1000 थी। कांग्रेस ने इसे बढ़ाने का वादा किया था और वादा निभाया। योजना से 56.61 लाख महिलाएं लाभान्वित हो रही हैं। बिहार में भी कांग्रेस का हाथ, महिलाओं को सशक्त करने के साथ।वजह वही है, नीतीश-मोदी सरकार की महंगाई और गरीबी ने लोगों को त्राहिमाम किया।

कुमार कृष्णन
कुमार कृष्णन

भाजपा-जेडीयू के वादे झूठे साबित हुए। अब जनता सच्चे बदलाव की उम्मीद करती है और कांग्रेस है तो उम्मीद है। आशा कार्यकर्ता, जीविका, आंगनवाड़ी, स्वयं सहायता समूह और मध्याह्न भोजन पकाने वाली महिलाओं पर महिला कांग्रेस का फोकस है। बिहार में लगभग दो करोड़ से ज्यादा जीविका दीदी हैं जो नीतीश कुमार की खास वोटर मानीं जाती हैं। इन महिला वोटर को साधने के लिए जहां तेजस्वी यादव ने माई-बहिन मान योजना की घोषणा की है तो वहीं अब कांग्रेस भी महिला वोटरों को साधने की पूरी तैयारी में जुट गई है। उसके लिए बड़ा अभियान आरंभ कर दिया है।

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