त्योहार के लिए ऐसे करें घर के मंदिर की सफाई

दिवाली आने वाली है। अब घर के मंदिर की साफ-सफाई करने में जरा भी देरी न करें। अगर घर की भी साफ-सफाई शुरु कर लें तो उससे अच्छी कोई बात नहीं। सवाल है मंदिर की सफाई कैसे करें? तो आइए, यहाँ प्रस्तुत हैं कुछ सुझाव:-

सबसे पहले मंदिर को खाली कर दें। खाली करने के पहले घर के किसी एक हिस्से में सफाई करके वहां एक धुली हुई चादर बिछाएं और मंदिर की सभी मूर्तियों और मंदिर की दूसरी चीजों को उस धुली चादर में रख दें। इन चीजों को घर की ऐसी जगह में रखना चाहिए, जहां घर के लोगों के आते-जाते इनके टूटने का डर न हो और न ही इन पर कोई पैर लगाकर जाए।

लकड़ी और पत्थर के मंदिर की सफाई के लिए असरदार घरेलू उपाय

अगर आपके घर का मंदिर लकड़ी का रेडीमेड मंदिर है, तो उसकी सफाई ऑलिव ऑयल, नींबू के रस से करें। बाजार में कई तरह के लिक्विड मिल जाते हैं, जो खास तौरपर लकड़ी पर लगे दाग धब्बों को आसानी से मिटा देते हैं तो इससे भी किसी साफ कपड़े के जरिये लकड़ी के मंदिर की अच्छी सफाई करें।

अगर घर में कोई साफ कपड़ा न हो तो बाजार से सफाई के लिए कपड़े वाली नैपिकन खरीद लें या पुरानी धुली हुई धोतियां भी हार्डवेयर की दुकानों में मिलती हैं, उनसे सफाई बहुत अच्छी होती है। अगर घर का मंदिर स्थायी हो या संगमरमर का बना हो या किसी दूसरे पत्थर का हो तो पानी में सोडा मिलाकर इसकी सफाई करें।

पीतल-तांबे के मंदिर बर्तनों की गहराई से सफाई कैसे करें

इसके अलावा बाजार में आजकल पत्थर के फर्श और टाईल्स साफ करने के लिए ऐसे ही शानदार लिक्विड मौजूद हैं, उनकी सहायता से स्थायी मंदिर की अच्छी सफाई कर लें। अब बात आती है मंदिर की मूर्तियों और मंदिर में रखे कई तरह के बर्तनों की सफाई की, जैसे- पूजा की थाली, आरती, जलाभिषेक वाला पीतल का लोटा और ऐसे कई बर्तन जो मंदिर में पूजा के दौरान इस्तेमाल होते हैं।

उन सबकी भी इस दौरान अच्छा- सी सफाई करें, क्योंकि डेली रूटीन वाली सफाई में उनकी अच्छी सफाई नहीं हो पाती। इन चीजों की सफाई के लिए पहले पीतल और तांबे के बर्तनों को गरम पानी में 30 से 40 मिनट के लिए डुबो दें और इसके बाद सफाई नींबू और नमक से सफाई करें।

मंदिर के बर्तन और वस्त्रों की सफाई के आसान उपाय

अगर मंदिर के बर्तनों की सफाई नींबू और नमक से सही तरीके से ना हो पाए तो बेसन का भी सहारा लिया जा सकता है। बेसन से भी, खासकर बेसन और नमक से भी बर्तन बहुत अच्छे से साफ हो जाते हैं। मंदिर के बर्तनों में साबुन न लगाएं तो ठीक है। अब बात आती है मंदिर में इस्तेमाल होने वाले कपड़ों की जो भगवान जी की पोशाकें हो सकती हैं।

मंदिर के कपड़ों को साफ करते समय सिरके की मदद भी ले सकती हैं और गरम पानी में धोना तो इन्हें जरूरी ही है। हालांकि कपड़ों को साफ करने के लिए साबुन का भी इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन कुछ लोग धार्मिक मान्यताओं के चलते नहीं करते, लेकिन इससे भी कुछ फर्क नहीं पड़ता।

मंदिर के कपड़े और तस्वीरें कैसे करें सुरक्षित सफाई?

अगर कपड़े बहुत गंदे नहीं हैं तो वो आधे घंटे तक अगर गरम पानी डूबे रहेंगे और इस पानी में नींबू और सिरका भी मौजूद होगा, तो कपड़ों का सारा मैल कट चुका होगा। अब बस उन्हें अच्छे से हाथ से मसलना भर होता है। मंदिर के कपड़े निखर आते हैं। अंत में मंदिर में रखी तस्वीरों को हल्के हाथों से बहुत सजगता से साफ करें। पानी और रफ हाथों से तस्वीरों को बचाएं।

याद रखिए, सबसे संवेदनशील सफाई मंदिर के अंदर रखी आपकी आस्था से जुड़ी तस्वीरों और हमारे विश्वास के केंद्र मूर्तियों की सफाई करने में ही होती है। तस्वीरों और मूर्तियों की सफाई के लिए भी नींबू का रस, सोडा और बाजार में उपलब्ध कई दूसरी चीजों की मदद ली जा सकती जो बहुत तीखी न हों, जिससे कि तस्वीरों में खरोंच का डर हो।

मंदिर की सफाई में गंगाजल का उपयोग क्यों न करें?

कुछ लोग मंदिर की मूर्तियों की सफाई करते हुए उसमें गंगाजल आदि डाल लेते हैं, ताकि उनकी सफाई में पवित्रता भी बनी रहे, लेकिन ऐसा नहीं करना चाहिए। क्योंकि सफाई के बाद इस पानी को गंदी नाली में ही फेंका जाता है। इसलिए आपने जो गंगा जल मिलाया होता है, वह गंदी नाली में पहुंचता है और फिर उससे वह अगल काफी दिनों तक बड़े गंदे नाले में ही घूमता है।

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अत: सफाई करते समय इसमें गंगा जल न डालें। इस तरह अगर सजगता से घर के मंदिर की सफाई करेंगी तो कितना भी बड़ा मंदिर हो, आधे दिन से ज्यादा नहीं लगेगा। यह आधा दिन लगाएं और त्योहारों में साफ सुथरे मंदिर की अनुभूतियों का एहसास करें।

-मधु सिंह

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