भारत और न्यूजीलैंड : कुछ दोस्ती, कुछ बाज़ार

सत्ताइस अप्रैल, 2026 को भारत और न्यूजीलैंड ने एक ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर मुहर लगा दी है। सरल शब्दों में कहें तो अब दोनों देशों के बीच व्यापार करना पहले से कहीं ज्यादा आसान और सस्ता हो जाएगा। जब दो देश आपस में ऐसा समझौता करते हैं, तो वे एक-दूसरे के सामान पर लगने वाले टैक्स (सीमा शुल्क) को या तो खत्म कर देते हैं या बहुत कम कर देते हैं। आइए समझते हैं कि इस समझौते का सामान्य नागरिक की जेब और देश की सेहत पर क्या असर पड़ेगा।

सबसे पहले तो यही कि हमें क्या मिलेगा। सो, इस समझौते का सबसे बड़ा फायदा भारतीय रसोई और बाजार में दिखेगा। न्यूजीलैंड अपने बेहतरीन फलों, खासकर कीवी और सेब के लिए जाना जाता है। अब तक इन पर ज्यादा टैक्स होने के कारण ये महंगे मिलते थे, लेकिन अब ये आम उपभोक्ता की पहुँच के भीतर होंगे। इसके अलावा, भारत की ताकत उसकी सेवाएँ हैं। हमारे आईटी प्रोफेशनल, इंजीनियर और छात्र अब ज्यादा आसानी से न्यूजीलैंड जा सकेंगे। वहाँ वीजा मिलना अब पहले जैसा सिरदर्द नहीं रहेगा। साथ ही, भारत में बनी दवाइयाँ (जेनेरिक मेडिसिन) और हमारे कपड़े भी न्यूजीलैंड के बाजारों में छाने को तैयार हैं।

एफटीए में किसानों की सुरक्षा पर उठे सवाल

पूछा जाना स्वाभाविक है कि एफटीए में किसानों की सुरक्षा का ख्याल रखा गया है या नहीं। दरअसल, जब भी व्यापार समझौते की बात आती है, तो हमारे मन में एक ही डर होता है। वह यह कि, कहीं विदेशी सामान आने से हमारे किसानों का नुकसान तो नहीं होगा? खासकर न्यूजीलैंड के दूध और घी (डेयरी उत्पाद) को लेकर भारतीय किसानों में चिंता रहती है। लेकिन सरकार की मानें तो इस समझौते में इस बारे में पूरी सावधानी बरती गई है।

भारतीय दूध और डेयरी कारोबार को पूरी तरह सुरक्षित रखा गया है, क्योंकि वह भारत में करोड़ों लोगों की रोजी-रोटी है। बताया जा रहा है कि न्यूजीलैंड के डेयरी उत्पादों को भारत में बेरोक-टोक आने की इजाज़त नहीं दी गई है, बल्कि उन पर एक सीमा (कोटा) तय की गई है। यानी, विदेशी पनीर या मक्खन आएगा तो सही, लेकिन इतना नहीं कि वह हमारे अमूल या स्थानीय डेयरी किसानों का खेल बिगाड़ दे।

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भारत-न्यूजीलैंड समझौते की जरूरत क्यों पड़ी

सहज जिज्ञासा यह भी हो सकती है कि आखिर यह समझौता जरूरी क्यों था। सो, याद रहे कि आज की दुनिया में कोई भी देश अकेले तरक्की नहीं कर सकता। न्यूजीलैंड एक समृद्ध देश है और उसके पास खेती की बेहतरीन तकनीक है। इस समझौते से वह तकनीक भारत आएगी, जिससे हमारे किसानों को अपनी फसल की क्वालिटी सुधारने में मदद मिलेगी। साथ ही, रणनीतिक तौर पर भी न्यूजीलैंड के साथ जुड़ना भारत के लिए फायदेमंद है, क्योंकि वह अंतरराष्ट्रीय मंचों पर एक भरोसेमंद साथी रहा है।

अगर भविष्य की बात करें, तो कहा जा सकता है कि यह समझौता सिर्फ सामान बेचने और खरीदने तक सीमित नहीं है। आने वाले समय में दोनों देश मिलकर क्लाइमेट चेंज और साफ ऊर्जा जैसे मुद्दों पर भी काम करेंगे। यह भारत के आत्मनिर्भर बनने के संकल्प और दुनिया के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने की इच्छा का एक बेहतरीन नमूना है। कुल मिलाकर, भारत-न्यूजीलैंड का यह समझौता एक ऐसी विन-विन स्थिति है, जहाँ फायदा दोनों तरफ है। यह हमारे युवाओं के लिए नौकरियों के नए दरवाजे खोलेगा और उपभोक्ताओं को बेहतर विकल्प देगा। भारत अब दुनिया के साथ व्यापार करने की नई पिच पर उतर चुका है, जहाँ वह अपनी शर्तों पर, अपने लोगों के हितों का ध्यान रखते हुए खेल रहा है। शुभमस्तु!

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