मटके का पानी
बाल कविता
इस भीषण गर्मी में
याद आ रही नानी।
चलो पी लिया जाए
मटके का थोड़ा पानी।
फ्रिज का पानी फेल हो गया
काम आया मटके का पानी।
दिन-रात ठंडा रहता है
मटके का यह पानी।
यह भी पढ़ें…नकारात्मक विचारों से बढ़ती है निराशा : रमेशजी
बचपन में मेरी माँ
गर्मी में मटका बड़ा मँगाती थी।
भर कर उसमें पानी
घर भर को खूब पिलाती थी।
आज फिर लौट आया
मटके का वही जमाना।
हर घर में नजर आ रहा
मटका वही पुराना।
यह पानी स्वास्थ्य के लिए
है बहुत लाभदायक।
यह पानी प्रदूषित नहीं होता
हर दिन रहता पीने लायक।
बद्री प्रसाद वर्मा अनजान
अब आपके लिए डेली हिंदी मिलाप द्वारा हर दिन ताज़ा समाचार और सूचनाओं की जानकारी के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल की सेवाएं प्रस्तुत हैं। हमें फॉलो करने के लिए लिए Facebook , Instagram और Twitter पर क्लिक करें।



